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हाईकोर्ट की टिप्पणी- जो खुद निर्दोष नहीं, वह कैसे किसी दूसरे पर आरोप लगाने का अधिकार रखता है
Sun, 17 Mar 2019 10:59 AM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sun, 17 Mar 2019 10:59 AM IST
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आंगनबाड़ी वर्कर के पद पर नियुक्ति पाने के लिए महिला द्वारा आठवीं पास का फर्जी सर्टिफिकेट देने का आरोप लगाने वाली याचिका को पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। याचिका खारिज करते हुए जस्टिस आरएन रैना ने कहा कि जो खुद निर्दोष नहीं है, वह कैसे किसी अन्य पर दोष लगा सकता है। साथ ही हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को फर्जी सर्टिफिकेट के जरिये नियुक्ति लेने वाली महिला पर उचित कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं।
पलवल के एक गांव में आंगनबाड़ी वर्कर की नियुक्ति के लिए आवेदन मांगे गए थे। आवेदक का दसवीं पास होना अनिवार्य शर्त थी, लेकिन तय किया गया था कि गांव में अगर कोई दसवीं पास आवेदक नहीं है तो उसकी जगह आठवीं पास आवेदक की भी नियुक्ति की जा सकती है। दसवीं पास आवेदक नहीं मिला, इसलिए आठवीं पास महिला को नियुक्त कर दिया गया। नियुक्ति को एक अन्य महिला आवेदक ने चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी।
याचिका में बताया गया कि जिस महिला की नियुक्ति की गई वह आठवीं पास भी नहीं है। उसने आठवीं के फर्जी सर्टिफिकेट के जरिये यह नौकरी हासिल की है, जबकि याचिकाकर्ता दसवीं पास है। ऐसे में उसे इस पद पर नियुक्ति दी जानी चाहिए। वहीं जिस महिला ने याचिका दायर करके खुलासा किया है, उसने खुद फर्जी डोमिसाइल का सर्टिफिकेट दिया है।
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इस जानकारी पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि हाईकोर्ट आने वाला याचिकाकर्ता खुद बेदाग होना चाहिए। यह भी एक गंभीर मामला है की महिला ने आठवीं के फर्जी सर्टिफिकेट के जरिये नौकरी ली है लिहाजा हाईकोर्ट ने मामले में सरकार को नियुक्त की गई आंगनबाड़ी वर्कर के मामले में निर्ण लिए जाने के आदेश दे दिए हैं।
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पलवल के एक गांव में आंगनबाड़ी वर्कर की नियुक्ति के लिए आवेदन मांगे गए थे। आवेदक का दसवीं पास होना अनिवार्य शर्त थी, लेकिन तय किया गया था कि गांव में अगर कोई दसवीं पास आवेदक नहीं है तो उसकी जगह आठवीं पास आवेदक की भी नियुक्ति की जा सकती है। दसवीं पास आवेदक नहीं मिला, इसलिए आठवीं पास महिला को नियुक्त कर दिया गया। नियुक्ति को एक अन्य महिला आवेदक ने चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी।
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याचिका में बताया गया कि जिस महिला की नियुक्ति की गई वह आठवीं पास भी नहीं है। उसने आठवीं के फर्जी सर्टिफिकेट के जरिये यह नौकरी हासिल की है, जबकि याचिकाकर्ता दसवीं पास है। ऐसे में उसे इस पद पर नियुक्ति दी जानी चाहिए। वहीं जिस महिला ने याचिका दायर करके खुलासा किया है, उसने खुद फर्जी डोमिसाइल का सर्टिफिकेट दिया है।
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इस जानकारी पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि हाईकोर्ट आने वाला याचिकाकर्ता खुद बेदाग होना चाहिए। यह भी एक गंभीर मामला है की महिला ने आठवीं के फर्जी सर्टिफिकेट के जरिये नौकरी ली है लिहाजा हाईकोर्ट ने मामले में सरकार को नियुक्त की गई आंगनबाड़ी वर्कर के मामले में निर्ण लिए जाने के आदेश दे दिए हैं।