फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Punjab Haryana High Court Rejected Punjab University Petition

पंजाब यूनिवर्सिटी को झटका, डीएवी को एमबीए की मान्यता न देने का फैसला हाईकोर्ट ने किया खारिज

Fri, 07 Aug 2020 11:18 AM IST
खुशबू गोयल अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Fri, 07 Aug 2020 11:18 AM IST
विज्ञापन
Punjab Haryana High Court Rejected Punjab University Petition
पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट
हाईकोट ने डीएवी कॉलेज को बड़ी राहत देते पंजाब विश्वविद्यालय की सिंडिकेट द्वारा एमबीए पाठ्यक्रम को अस्थाई मान्यता न देने के फैसले को खारिज कर दिया है। पीयू को झटका देते हुए उच्च न्यायालय ने कहा कि पंजाब विश्वविद्यालय ने यूजीसी के प्रावधानों का उल्लंघन कर महाविद्यालय के एमबीए पाठ्यक्रम को मान्यता देने से इनकार किया था।
विज्ञापन


उच्च न्यायालय ने विश्वविद्यालय को नए सिरे से तय प्रावधानों के तहत कोर्स की जांच के लिए एक नई जांच समिति गठित करने के आदेश दे दिए हैं। जस्टिस अरुण मोंगा ने यह आदेश डीएवी कॉलेज द्वारा पीयू सिंडिकेट द्वारा उनके एमबीए कोर्स की मान्यता विस्तार की मांग को अस्वीकार किए जाने के आदेशों के खिलाफ दायर याचिका का निपटारा करते हुए दिए हैं।  
विज्ञापन


नई कमेटी में कोई पुराना सदस्य न रखा जाए
इसके साथी पीयू को सख्ती से कहा है कि वह यह ध्यान रखें कि जो नई जांच समिति गठित की जाए, उसमें एक भी सदस्य ऐसा न हो जो पहले की समिति में शामिल रहा हो। जब तक महाविद्यालय के इस पाठ्यक्रम पर नए सिरे से गौर कर निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक डीएवी महाविद्यालय के एमबीए कोर्स की मान्यता जारी रखी जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन


इस आदेश पर दो महीनों में कार्रवाई पूरी करने के निर्देश देते हुए कहा है कि विश्वविद्यालय की नई जांच समिति के अंतिम निर्णय पर यदि महाविद्यालय को कोई आपत्ति हो तो वह दोबारा उच्च न्यायालय आ सकता है।

यह है मामला

डीएवी महाविद्यालय ने 2017 में महाविद्यालय परिसर में एमबीए पाठ्यक्रम शुरू करने का निर्णय लिया और एआईसीटीई से मंजूरी मांगी। एआईसीटीई ने 30 अप्रैल 2017 को पाठ्यक्रम शुरू करने की महाविद्यालय को इजाजत दे दी और कहा कि वह पंजाब विश्वविद्यालय से इसके लिए मान्यता ले ले। 27 जुलाई 2017 को विश्वविद्यालय ने महाविद्यालय को इस पाठ्यक्रम की अस्थायी मान्यता तो दे दी लेकिन जांच में कुछ आपत्तियां जता दी।

11 जुलाई 2017 को समिति ने सर्वसम्मति से पाठ्यक्रम की इजाजत देते हुए 2018 -19 के सत्र में छात्रों को अस्थायी दाखिले की इजाजत दे दी। 8 मई 2018 और फिर 30 अक्तूबर 2018 में एक अन्य समिति ने महाविद्यालय का दो बार दौरा किया और पाठ्यक्रम में कई खामियां बता दीं। इस पर पीयू सिंडिकेट ने इस कोर्स को स्थायी मान्यता देने से मना कर दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed