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तो क्या पनवाड़ियों को दवा बेचने की अनुमति दे दें: हाईकोर्ट
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 12 Sep 2017 09:40 AM IST
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : File Photo
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दवा निर्माता कंपनी सिपला की हरियाणा में निकोटीन को जहर की सूची में शामिल करने वाली नोटिफिकेशन को चुनौती देने वाली याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कंपनी को फटकार लगाई। हाईकोर्ट ने कहा कि इस याचिका को मानें तो क्या हम पनवाड़ियों को दवा बेचने की अनुमति दे दें। कंपनी ने कुछ समय दिए जाने की अपील की। हाईकोर्ट ने इस पर सुनवाई 18 सितंबर तक टाल दी।
मामले में याचिका दाखिल कर सिपला कंपनी ने कहा कि हरियाणा सरकार की ओर से निकोटीन को जहर की सूची में शामिल किया गया है। इससे पूर्व हरियाणा में 19 जहर घोषित हैं, जिनका इस्तेमाल और बिक्री पूरी तरह से प्रतिबंधित है। हरियाणा सरकार की ओर से निकोटीन को जहर की सूची में शामिल करने के चलते प्रदेश में सिगरेट छुड़वाने वाले च्विंगगम पर भी प्रतिबंध लग गया है।
याची ने कहा कि उसे इस दवा को बेचने के लिए लाइसेंस दिया गया है और हरियाणा सरकार की ओर से इसे प्रतिबंधित करना सीधे तौर पर अधिकारों का दुरुपयोग करना है। याची ने बताया कि इस च्विंगगम को वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन ने एसेंशियल ड्रग की सूची में शामिल किया है। ऐसी किसी भी दवा को प्रतिबंधित करना गलत है, जिसे एसेंशियल दवा की सूची में शामिल किया गया हो।
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मामले में याचिका दाखिल कर सिपला कंपनी ने कहा कि हरियाणा सरकार की ओर से निकोटीन को जहर की सूची में शामिल किया गया है। इससे पूर्व हरियाणा में 19 जहर घोषित हैं, जिनका इस्तेमाल और बिक्री पूरी तरह से प्रतिबंधित है। हरियाणा सरकार की ओर से निकोटीन को जहर की सूची में शामिल करने के चलते प्रदेश में सिगरेट छुड़वाने वाले च्विंगगम पर भी प्रतिबंध लग गया है।
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याची ने कहा कि उसे इस दवा को बेचने के लिए लाइसेंस दिया गया है और हरियाणा सरकार की ओर से इसे प्रतिबंधित करना सीधे तौर पर अधिकारों का दुरुपयोग करना है। याची ने बताया कि इस च्विंगगम को वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन ने एसेंशियल ड्रग की सूची में शामिल किया है। ऐसी किसी भी दवा को प्रतिबंधित करना गलत है, जिसे एसेंशियल दवा की सूची में शामिल किया गया हो।
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : File Photo
साथ ही चंडीगढ़ और पंजाब का हवाला देते हुए कहा गया कि इन दोनों स्थानों पर इस दवा पर कोई पाबंदी नहीं है, लेकिन हरियाणा सरकार ने इस पर पाबंदी लगा दी। याची ने कहा कि इस दवा का इस्तेमाल एंटी निकोटीन थेरेपी के रूप में किया जाता है, जो लोगों को सिगरेट छोड़ने में मदद करती है। एक ओर तो इस प्रकार की दवाओं पर पाबंदी लगाई जा रही है तो दूसरी ओर सिगरेट की बिक्री पर कोई पाबंदी नहीं है। हरियाणा सरकार का यह दोहरा रवैया समझ के परे है।
सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार ने कोर्ट को बताया कि हाईकोर्ट की पीआईएल बेंच के एक निर्देश पर हरियाणा, पंजाब और यूटी में हुक्का बार, ई सिगरेट और केमिकल निकोटीन पर अथॉरिटी ने पाबंदी लगा दी गई थी। वैसे भी इस दवा को प्रतिबंधित नहीं किया गया है बल्कि रेगुलेट किया गया है और केवल मेडिकल स्टोर पर रखा जा सकता है। कंपनी ने कहा कि यह छूट वाली दवा है, जिसे कोई भी रख सकता है।
सिपला कंपनी की सिगरेट छुड़ाने वाले च्विंगगम में 2 से 4 मिलीग्राम निकोटीन होता है। इसके चलते तो सिगरेट व अन्य तंबाकू उत्पादों पर भी पाबंदी होनी चाहिए। इन पर पाबंदी लगाने के स्थान पर दवाओं पर ही पाबंदी लगा दी गई। हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसा तो आप हमसे यह अनुमति मांग रहे हैं कि दवा को पनवाड़ियों के पास बेचने की भी अनुमति दे दें। याची ने कहा कि चंडीगढ़ में ऐसा होता है और यह उनके पास बिकती है। हाईकोर्ट ने इस पर कोई तत्काल राहत नहीं दी और सुनवाई 18 सितंबर तक टाल दी।
सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार ने कोर्ट को बताया कि हाईकोर्ट की पीआईएल बेंच के एक निर्देश पर हरियाणा, पंजाब और यूटी में हुक्का बार, ई सिगरेट और केमिकल निकोटीन पर अथॉरिटी ने पाबंदी लगा दी गई थी। वैसे भी इस दवा को प्रतिबंधित नहीं किया गया है बल्कि रेगुलेट किया गया है और केवल मेडिकल स्टोर पर रखा जा सकता है। कंपनी ने कहा कि यह छूट वाली दवा है, जिसे कोई भी रख सकता है।
सिपला कंपनी की सिगरेट छुड़ाने वाले च्विंगगम में 2 से 4 मिलीग्राम निकोटीन होता है। इसके चलते तो सिगरेट व अन्य तंबाकू उत्पादों पर भी पाबंदी होनी चाहिए। इन पर पाबंदी लगाने के स्थान पर दवाओं पर ही पाबंदी लगा दी गई। हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसा तो आप हमसे यह अनुमति मांग रहे हैं कि दवा को पनवाड़ियों के पास बेचने की भी अनुमति दे दें। याची ने कहा कि चंडीगढ़ में ऐसा होता है और यह उनके पास बिकती है। हाईकोर्ट ने इस पर कोई तत्काल राहत नहीं दी और सुनवाई 18 सितंबर तक टाल दी।