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Highcourt: अपने दो बच्चों की हत्या करने वाली महिला पति के प्रति क्रूर, हाईकोर्ट ने माना तलाक का हकदार

Tue, 18 Feb 2025 02:04 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Tue, 18 Feb 2025 02:04 PM IST
सार

दंपती का विवाह 2003 में हुआ था और उनके एक बेटा व एक बेटी थे। लेकिन 2010 में पत्नी ने दोनों बच्चों की हत्या कर दी। इसके बाद जुलाई 2011 में अदालत ने उसे हत्या का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

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Punjab Haryana High Court permit divorce order in favour of petitioner husband
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

2010 में अपने बेटे और बेटी की हत्या करने वाली सोनीपत निवासी महिला को पति के प्रति क्रूर मानते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने याची पति के पक्ष में तलाक का आदेश जारी किया है। अदालत ने माना कि पत्नी द्वारा अपने ही बच्चों की हत्या की घटना पति के मन में मानसिक पीड़ा, यातना और भय उत्पन्न करने वाली थी, जिससे यह प्रतीत होता है कि उसके साथ रहना सुरक्षित नहीं था।
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इस मामले में दंपती का विवाह 2003 में हुआ था और उनके एक बेटा व एक बेटी थे। लेकिन 2010 में पत्नी ने दोनों बच्चों की हत्या कर दी। इसके बाद जुलाई 2011 में अदालत ने उसे हत्या का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके बाद पति ने तलाक के लिए सोनीपत की पारिवारिक अदालत का दरवाजा खटखटाया, लेकिन जुलाई 2013 में अदालत ने उसकी याचिका खारिज कर दी। इस फैसले के खिलाफ पति ने हाई कोर्ट में अपील दायर की।
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कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यदि तलाक नहीं दिया गया तो पति को समाज में अपमान और तिरस्कार भी झेलना पड़ा होगा। यह क्रूरता तब तक जारी रहेगी जब तक इस रिश्ते को खत्म नहीं किया जाता। इसलिए, न्याय के हित में विवाह को तलाक की डिक्री के माध्यम से भंग किया जाना आवश्यक है, ताकि अपीलकर्ता को उसके दुख और पीड़ा से मुक्ति मिल सके और वह अपनी नई जिंदगी शुरू कर सके। अदालत ने इसे पति के प्रति क्रूरता करार दिया और यह भी माना कि पत्नी की नौ साल की लंबी कैद ने पति को वैवाहिक संबंधों के अधिकार से वंचित कर दिया। इसी आधार पर हाई कोर्ट ने पति की अपील को स्वीकार कर लिया और तलाक की डिक्री जारी कर दी।
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