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पति के काम नहीं आया राशन, बिजली, पानी का खर्च गिनाना, हाईकोर्ट ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला
Wed, 16 Oct 2019 10:38 AM IST
खुशबू गोयल
विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 16 Oct 2019 10:38 AM IST
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फाइल फोटो
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पत्नी को गुजारा भत्ता देने से बचने के लिए अदालत में बिजली, पानी, पेट्रोल, बीमा, टीवी इंटरनेट तक का खर्च गिनाना भी पति के काम नहीं आया।
हाईकोर्ट ने कहा कि यही जरूरतें पत्नी की भी हो सकती हैं, ऐसे में पति भुगतान की जिम्मेदारी से भाग नहीं सकता। पति धीरज कुमार की ओर से याचिका दाखिल करते हुए कहा गया था कि पटियाला की फैमिली कोर्ट ने पत्नी और बेटे को 3-3 हजार रुपये गुजारा भत्ता देने के आदेश जारी किए हैं, जो बहुत अधिक है।
याची का वेतन केवल 20,090 रुपये है जिसमें उसे राशन का 9000, बिजली का 2000, पेट्रोल का 2000, बीमा का 1200, टीवी का 300, मेाबाइल का 200, गैस का 700, पानी का 400, ईएमआई का 5300 तथा अपने अभिभावकों पर 1000 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। ऐसे में वह 6 हजार रुपये का भुगतान कैसे कर सकता है।
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हाईकोर्ट ने कहा कि यही जरूरतें पत्नी की भी हो सकती हैं, ऐसे में पति भुगतान की जिम्मेदारी से भाग नहीं सकता। पति धीरज कुमार की ओर से याचिका दाखिल करते हुए कहा गया था कि पटियाला की फैमिली कोर्ट ने पत्नी और बेटे को 3-3 हजार रुपये गुजारा भत्ता देने के आदेश जारी किए हैं, जो बहुत अधिक है।
याची का वेतन केवल 20,090 रुपये है जिसमें उसे राशन का 9000, बिजली का 2000, पेट्रोल का 2000, बीमा का 1200, टीवी का 300, मेाबाइल का 200, गैस का 700, पानी का 400, ईएमआई का 5300 तथा अपने अभिभावकों पर 1000 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। ऐसे में वह 6 हजार रुपये का भुगतान कैसे कर सकता है।
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जज बोले- दलीलें देकर जिम्मेदारी से नहीं बच सकते
हाईकोर्ट ने इस पर कहा कि पत्नी और बच्चों की भी खाने, रहने और सुविधाओं की आवश्यकताएं हैं। यदि याची की दोनों ईएमआई की कटौती कर दी जाती है तो भी उसके पास वेतन के रूप में प्रतिमाह 12,901 रुपये बचते हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि इस प्रकार की दलीलें देकर पत्नी के प्रति अपनी जिम्मेदारी से पति नहीं भाग सकता।
ऐसे में हर हाल में उसे पत्नी को इस राशि का भुगतान करना ही होगा। कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले के खिलाफ याचिका को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि इस मामले में की गई टिप्पणी किसी भी प्रकार से निचली अदालत में लंबित मामलों पर कोई प्रभाव नहीं डालेंगी।
ऐसे में हर हाल में उसे पत्नी को इस राशि का भुगतान करना ही होगा। कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले के खिलाफ याचिका को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि इस मामले में की गई टिप्पणी किसी भी प्रकार से निचली अदालत में लंबित मामलों पर कोई प्रभाव नहीं डालेंगी।