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Hindi News ›   Chandigarh ›   Punjab Haryana High Court Judgement in Case of Video Against Indian Army

विचारों की अभिव्यक्ति का मतलब किसी को जानवर बनने की इजाजत देना नहीं है: हाईकोर्ट

Wed, 14 Oct 2020 10:04 AM IST
खुशबू गोयल अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Wed, 14 Oct 2020 10:04 AM IST
सार

  • सोशल मीडिया पर सेना के खिलाफ वीडियो अपलोड करने की शिकायत
  • हाईकोर्ट ने खारिज की आरोपी की जमानत याचिका, हाईकोर्ट की टिप्पणी
  • कहा- किसी के अधिकारों के हनन और सम्मान को ठेस पहुंचाने की अनुमति नहीं

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Punjab Haryana High Court Judgement in Case of Video Against Indian Army
पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट

विस्तार

विचारों की अभिव्यक्ति का मतलब यह नहीं होता कि किसी को जानवर बनकर दुर्भावनापूर्ण आरोप लगाने की सीमा लांघने की अनुमति दी जाए। यह भी नहीं कि आप दूसरों के अधिकारों व मान-सम्मान को ठेस पंहुचा सकते हैं। भारत के हर नागरिक को विचार व्यक्त करने का अधिकार मिला हुआ है, लेकिन इसके चलते दूसरे के अधिकारों का हनन करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
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पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी फेसबुक, यूट्यूब और ट्विटर अकाउंट पर सेना की एक यूनिट के खिलाफ आपत्तिजनक सामग्री अपलोड करने के आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए की। सेना के एक कमांडिंग अफसर की पत्नी व पूर्व सैन्य महिला अधिकारी ने अंबाला कैंट पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई कि साबका सैनिक संघर्ष कमेटी नामक यूट्यूब चैनल का एडमिन कपिल देव अपने चैनल पर सेना के खिलाफ आपत्तिजनक सामग्री अपलोड कर रहा है।
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चैनल ने सेना की एक यूनिट के खिलाफ कुछ वीडियो अपलोड किए, जिसमें कहा गया कि जवानों को यूनिट के कमांडिंग अफसर की पत्नी को सलाम न करने पर सजा दी गई। उसने सेना व अधिकारियों के खिलाफ गलत टिप्पणियां भी की हैं।
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याचिकाकर्ता का आरोप
याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में आरोपी की अग्रिम जमानत का विरोध करते हुए कहा कि उन्होंने सेना में मेजर के पद पर काम किया और उनके पति अभी कमांडिंग अफसर हैं। आरोपी कपिल देव ने उनके खिलाफ दुष्प्रचार किया और सेना के कई महत्वपूर्ण व गोपनीय दस्तावेज अपलोड किए। इससे उनके सम्मान, प्रतिष्ठा और सामाजिक स्थिति को गहरी ठेस लगी है।

वीडियो अपलोड करने का वास्तविक मकसद क्या

जस्टिस एचएस मदान ने कहा कि मामले की शिकायतकर्ता सेना की सम्मानित अधिकारी रही हैं और उनके पति अभी देश की सेवा कर रहे हैं। इनके अतिरिक्त भी किसी आम आदमी की प्रतिष्ठा और सम्मान को ठेस पहुंचाने का किसी को कोई हक नहीं है। ऐसे आरोपों को हलके में नहीं लिया जा सकता।

बेंच ने कहा कि विचारों की अभिव्यक्ति का मतलब यह कतई नहीं कि आप किसी के मान सम्मान को चोट पहुंचाएं। आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ करना जरूरी है। इस बात की जांच जरूरी है कि आरोपी सेना की यूनिट व अधिकारियों के खिलाफ यूट्यूब चैनल पर वीडियो अपलोड क्यों कर रहा है? इसके पीछे उसका वास्तविक मकसद क्या है और उसके साथी कौन हैं? 

नफरत भरे भाषणों से सेना के खिलाफ असंतोष पैदा करने का प्रयास
हाईकोर्ट ने कहा कि केवल इस आधार पर कि वह जांच में शामिल हो गया है और पुलिस ने उसका मोबाइल अपने कब्जे में ले लिया है, वह अग्रिम जमानत का अधिकारी नहीं बनता। आरोपी ने नफरत भरे भाषणों के माध्यम से सेना के खिलाफ असंतोष और दरार पैदा करने का प्रयास किया।

इसके अलावा, उसने आधिकारिक दस्तावेजों और सैन्य प्रतिष्ठानों की गतिविधियों के प्रतिबंधित वीडियो अपलोड कर देश की सुरक्षा व राष्ट्रीय हितों को नुकसान करने का गंभीर कृत्य किया है। इससे पहले मई में अंबाला जिला अदालत ने भी उसको अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था।
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