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हाईकोर्ट का आदेश- घातक रोग से ग्रस्त है भ्रूण, महिला का जल्दी से गर्भपात करवाए पीजीआई
Thu, 14 May 2020 11:14 AM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 14 May 2020 11:14 AM IST
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गर्भवती महिला
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गर्भ में पल रहे बच्चे के घातक रोग से पीड़ित होने के बाद पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने महिला को गर्भपात कराने की इजाजत दे दी है। साथ ही पीजीआई को निर्देश दिए हैं कि वह जल्द से जल्द महिला का सुरक्षित गर्भपात करवाएं।
हाईकोर्ट ने परिवार की आर्थिक हालत देखते हुए पीजीआई को यह आदेश भी दिया है कि वह पुअर पेशेंट रिलीफ फंड से यह गर्भपात करवाए। जस्टिस निर्मलजीत कौर ने यह आदेश बुधवार को पीजीआई के मेडिकल बोर्ड द्वारा महिला के गर्भ की जांच करके सौंपी गई मेडिकल रिपोर्ट को देखने के बाद दिया।
बता दें कि चंडीगढ़ निवासी महिला ने हाईकोर्ट में याचिका दायर करके बताया था कि पीजीआई में उसके गर्भ की जांच में सामने आया था कि उसके गर्भ में पल रहा शिशु अर्नाल्ड चिआरी मेलफॉर्मेंशन नामक बीमारी से ग्रसित है। इस बीमारी में भ्रूण की रीढ़ की हड्डी विकसित नहीं हो पाती है। ऐसे में अगर यह बच्चा पैदा हुआ तो तो वह शारीरिक और मानसिक तौर पर अक्षम रह जाएगा। इसलिए महिला को गर्भपात करवाने का सुझाव दिया गया था।
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लेकिन मेडिकल टर्मिनेशन एंड प्रेग्नेंसी एक्ट के तहत अगर गर्भ 20 सप्ताह से ज्यादा समय का हो गया हो तो मेडिकल बोर्ड गठित किया जाना जरूरी है और गर्भपात के लिए हाईकोर्ट की इजाजत अनिवार्य है। याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने पीजीआई को आदेश दिए थे कि वह मेडिकल बोर्ड का गठन करे और महिला के गर्भ की जांच करके उसकी रिपोर्ट हाईकोर्ट को सौंपे।
पीजीआई से बुधवार को मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट सौंपकर स्वीकार किया कि गर्भ में पल रहा शिशु अर्नाल्ड चिआरी मेलफॉर्मेंशन नामक बीमारी से ग्रसित है। अगर वह पैदा हुआ तो सामान्य जीवन नहीं जी पाएगा और वह शारीरिक और मानसिक रूप से अक्षम रह जाएगा। पीजीआई की रिपोर्ट देखने के बाद हाईकोर्ट ने पीजीआई को तत्काल महिला के गर्भपात करने के आदेश देते हुए याचिका का निपटारा कर दिया।
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हाईकोर्ट ने परिवार की आर्थिक हालत देखते हुए पीजीआई को यह आदेश भी दिया है कि वह पुअर पेशेंट रिलीफ फंड से यह गर्भपात करवाए। जस्टिस निर्मलजीत कौर ने यह आदेश बुधवार को पीजीआई के मेडिकल बोर्ड द्वारा महिला के गर्भ की जांच करके सौंपी गई मेडिकल रिपोर्ट को देखने के बाद दिया।
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बता दें कि चंडीगढ़ निवासी महिला ने हाईकोर्ट में याचिका दायर करके बताया था कि पीजीआई में उसके गर्भ की जांच में सामने आया था कि उसके गर्भ में पल रहा शिशु अर्नाल्ड चिआरी मेलफॉर्मेंशन नामक बीमारी से ग्रसित है। इस बीमारी में भ्रूण की रीढ़ की हड्डी विकसित नहीं हो पाती है। ऐसे में अगर यह बच्चा पैदा हुआ तो तो वह शारीरिक और मानसिक तौर पर अक्षम रह जाएगा। इसलिए महिला को गर्भपात करवाने का सुझाव दिया गया था।
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लेकिन मेडिकल टर्मिनेशन एंड प्रेग्नेंसी एक्ट के तहत अगर गर्भ 20 सप्ताह से ज्यादा समय का हो गया हो तो मेडिकल बोर्ड गठित किया जाना जरूरी है और गर्भपात के लिए हाईकोर्ट की इजाजत अनिवार्य है। याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने पीजीआई को आदेश दिए थे कि वह मेडिकल बोर्ड का गठन करे और महिला के गर्भ की जांच करके उसकी रिपोर्ट हाईकोर्ट को सौंपे।
पीजीआई से बुधवार को मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट सौंपकर स्वीकार किया कि गर्भ में पल रहा शिशु अर्नाल्ड चिआरी मेलफॉर्मेंशन नामक बीमारी से ग्रसित है। अगर वह पैदा हुआ तो सामान्य जीवन नहीं जी पाएगा और वह शारीरिक और मानसिक रूप से अक्षम रह जाएगा। पीजीआई की रिपोर्ट देखने के बाद हाईकोर्ट ने पीजीआई को तत्काल महिला के गर्भपात करने के आदेश देते हुए याचिका का निपटारा कर दिया।