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हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, आधार से ज्यादा प्रमाणिक जन्म प्रमाण पत्र और दसवीं का सर्टिफिकेट
Fri, 07 Feb 2020 10:46 AM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 07 Feb 2020 10:46 AM IST
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आधार कार्ड
- फोटो : सांकेतिक तस्वीर
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पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि जन्मतिथि विवाद में आधार से ज्यादा प्रमाणिक जन्म प्रमाण पत्र और दसवीं का सर्टिफिकेट है। मामला वैवाहिक विवाद से जुड़ा हुआ है, जिसमें पति-पत्नी ने आपसी सहमति से तलाक के लिए आवेदन किया था।
जब मामला लुधियाना की फैमिली कोर्ट पहुंचा तो बताया गया कि दोनों का विवाह 26 नवंबर 2004 को हुआ था। जज ने देखा कि पत्नी का जन्म 15 अगस्त 1987 को हुआ था। इसके अनुसार, विवाह के समय पत्नी 18 वर्ष की नहीं थी। कोर्ट ने इस आधार पर शादी को वैध न मानते हुए तलाक की अर्जी खारिज कर दी।
इसके बाद दोनों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए बताया कि आधार कार्ड पर जो तिथि लिखी गई है, उसके और असली तिथि में एक वर्ष का अंतर है।
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जब मामला लुधियाना की फैमिली कोर्ट पहुंचा तो बताया गया कि दोनों का विवाह 26 नवंबर 2004 को हुआ था। जज ने देखा कि पत्नी का जन्म 15 अगस्त 1987 को हुआ था। इसके अनुसार, विवाह के समय पत्नी 18 वर्ष की नहीं थी। कोर्ट ने इस आधार पर शादी को वैध न मानते हुए तलाक की अर्जी खारिज कर दी।
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इसके बाद दोनों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए बताया कि आधार कार्ड पर जो तिथि लिखी गई है, उसके और असली तिथि में एक वर्ष का अंतर है।
जन्म प्रमाण पत्र में कोई और निकली तारीख
याची ने अपने जन्म प्रमाण पत्र और दसवीं के सर्टिफिकेट को पेश करते हुए फैमिली कोर्ट को इनके अनुसार निर्णय लेने के निर्देश जारी करने की अपील की। कोर्ट ने पाया कि इन दोनों प्रमाण पत्रों के अनुसार, 15 अगस्त 1986 को याची का जन्म हुआ था।
हाईकोर्ट ने यह देखते हुए स्पष्ट कर दिया है कि जन्म तिथि की प्रमाणिकता के लिए आधार कार्ड से ज्यादा वरीयता जन्म प्रमाण पत्र और दसवीं के प्रमाण पत्र को दी जानी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि जन्म के समय जन्म प्रमाण पत्र जारी होता है, जबकि आधार कार्ड काफी बाद में बनता है।
ऐसे में जन्म प्रमाण पत्र ही आयु का सबसे सटीक प्रमाण पत्र है। इस टिप्पणी के साथ ही हाईकोर्ट ने केस को जन्म प्रमाण पत्र के आधार पर सुनने के आदेश जारी करते हुए लुधियाना फैमिली कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया।
हाईकोर्ट ने यह देखते हुए स्पष्ट कर दिया है कि जन्म तिथि की प्रमाणिकता के लिए आधार कार्ड से ज्यादा वरीयता जन्म प्रमाण पत्र और दसवीं के प्रमाण पत्र को दी जानी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि जन्म के समय जन्म प्रमाण पत्र जारी होता है, जबकि आधार कार्ड काफी बाद में बनता है।
ऐसे में जन्म प्रमाण पत्र ही आयु का सबसे सटीक प्रमाण पत्र है। इस टिप्पणी के साथ ही हाईकोर्ट ने केस को जन्म प्रमाण पत्र के आधार पर सुनने के आदेश जारी करते हुए लुधियाना फैमिली कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया।