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20 वर्षीय युवती की जिंदगी बर्बाद हो गई, मुआवजे की जिम्मेदारी से नहीं भाग सकता प्रशासन: हाईकोर्ट

Sat, 11 May 2019 01:23 PM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Sat, 11 May 2019 01:23 PM IST
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Punjab Haryana High court Decision on compansation to kajal, who lost a leg in accident
फाइल फोटो
सूखे पेड़ की टहनी गिरने से 70 प्रतिशत दिव्यांग हुई काजल को 15 से 60 लाख रुपये के बीच मुआवजा देने के हाईकोर्ट के सिंगल बेंच के आदेश को चुनौती देना यूटी प्रशासन को भारी पड़ गया। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यूटी प्रशासन को फटकार लगाते हुए कहा कि 20 साल की युवती की जिंदगी बर्बाद हो गई और आप मुआवजा देने की जिम्मदारी से भाग रहे हो। हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसी फालतू याचिका के लिए दो लाख रुपये जुर्माना लगाया जाएगा। हालांकि, सीनियर स्टैंडिंग काउंसिल पंकज जैन की अपील पर हाईकोर्ट ने जुर्माना लगाने के आदेश नहीं लिखवाए।
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इससे पहले हाईकोर्ट ने कहा कि चंडीगढ़ प्रशासन और नगर निगम नागरिकों के प्रति अपने कर्तव्य को लेकर गंभीर नही हैं। अधिकारियों की अपनी ड्यूटी के प्रति लापरवाही का खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ता है। 20 वर्षीय काजल भी ऐसे ही नागरिकों में से एक है, जिसे अधिकारियों की लापरवाही से अपनी एक टांग गंवानी पड़ी। चंडीगढ़ प्रशासन की लापरवाही से सेक्टर 17 में एक सूखा पेड़ समय पर नहीं काटा गया। 15 सितंबर 2013 को काजल पर पेड़ की एक टहनी गिरने से वह गंभीर घायल हो गई थी। बाद में उसे अपना एक पैर गंवाना पड़ा था।
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इस मामले में सिंगल बेंच ने याचिका का निपटारा करते हुए प्रशासन को आदेश दिए थे कि युवती की भविष्य की आय, उसकी पीड़ा, जीवन का जो सुख वह सही रहते ले सकती थी, उसे खोने का नुकसान और जीवन व आय के हर पहलू के लिए मुआवजे का आंकलन किया जाए। आंकलन करने के बाद उसे इस मुआवजा राशि का भुगतान किया जाए। इसी फैसले के खिलाफ प्रशासन और नगर निगम ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में अपील की थी। हाईकोर्ट ने प्रशासन को फटकार लगाते हुए कहा कि प्रतिदिन ऐसी आधारहीन याचिकाओं की लाइन लगी रहती है।
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इससे कोर्ट का कीमती समय बर्बाद होता है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में प्रशासन को उदार होना चाहिए और खुद आगे आकर कहना चाहिए था कि हम मुआवजा देंगे। इसके बजाय मुआवजा देने की जिम्मेदारी से भागते हुए ऐसी आधारहीन याचिका दाखिल कर दी गई। कोर्ट ने कहा कि अब प्रशासन यह समझ ले कि यदि ऐसी याचिकाएं दाखिल की गईं तो जुर्माने केलिए तैयार रहना होगा।
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