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झटकाः हाईकोर्ट ने रद्द कर दिए पंजाब में माइनिंग के सभी ठेके, नए सिरे से नीलामी करने के निर्देश
Wed, 24 Apr 2019 02:16 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 24 Apr 2019 02:16 PM IST
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब में नई नीति के तहत आवंटित खनन के सभी ठेके रद्द कर दिए हैं। क्योंकि ये ठेके बगैर जमीन की निशानदेही के आवंटित किए गए थे। इसके साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार को तीन महीने में खनन स्थानों की निशानदेही कर नए सिरे से ऑक्शन करवाने के आदेश दिए हैं।
जस्टिस महेश ग्रोवर एवं जस्टिस ललित बत्रा की खंडपीठ ने माइनिंग के ठेकों की ऑक्शन और नई माइनिंग पॉलिसी के खिलाफ दायर कई याचिकाओं का निपटारा करते हुए यह फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार द्वारा बनाई गई माइनिंग पॉलिसी को सही करार देते हुए कहा कि जिस तरह से राज्य में माइनिंग को सात ब्लॉक में विभाजित किया गया है, वह बिलकुल सही है।
ऑक्शन के दौरान माइनिंग साइट्स की निशानदेही नहीं की गई, वह पूरी तरह से गलत है। क्योंकि जब निशानदेही ही नहीं की गई है तो ठेकेदार को पता ही नहीं होगा की कहां तक खनन किया जाना है। हाईकोर्ट ने कहा कि बिना निशानदेही बेतहाशा खनन का अंदेशा बना रहेगा और यह सीधे तौर पर केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय द्वारा तय किये गए दिशा-निर्देशों का भी उल्लंघन है।
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हाईकोर्ट ने निशानदेही के लिए सरकार को तीन महीने की मोहलत दी है और साइट्स की निशानदेही के बाद सरकार इनकी ऑक्शन करवा सकती है। इस दौरान विकास कार्य न रुकें, हाईकोर्ट ने इसके लिए पुराने ठेकेदारों को तब तक खनन की इजाजत भी दे दी है।
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जस्टिस महेश ग्रोवर एवं जस्टिस ललित बत्रा की खंडपीठ ने माइनिंग के ठेकों की ऑक्शन और नई माइनिंग पॉलिसी के खिलाफ दायर कई याचिकाओं का निपटारा करते हुए यह फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार द्वारा बनाई गई माइनिंग पॉलिसी को सही करार देते हुए कहा कि जिस तरह से राज्य में माइनिंग को सात ब्लॉक में विभाजित किया गया है, वह बिलकुल सही है।
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ऑक्शन के दौरान माइनिंग साइट्स की निशानदेही नहीं की गई, वह पूरी तरह से गलत है। क्योंकि जब निशानदेही ही नहीं की गई है तो ठेकेदार को पता ही नहीं होगा की कहां तक खनन किया जाना है। हाईकोर्ट ने कहा कि बिना निशानदेही बेतहाशा खनन का अंदेशा बना रहेगा और यह सीधे तौर पर केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय द्वारा तय किये गए दिशा-निर्देशों का भी उल्लंघन है।
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हाईकोर्ट ने निशानदेही के लिए सरकार को तीन महीने की मोहलत दी है और साइट्स की निशानदेही के बाद सरकार इनकी ऑक्शन करवा सकती है। इस दौरान विकास कार्य न रुकें, हाईकोर्ट ने इसके लिए पुराने ठेकेदारों को तब तक खनन की इजाजत भी दे दी है।