आज 'एक' होंगे हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़, जानिए कैसे?
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1966 में हरियाणा गठन के बाद पहली बार पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ एक होने जा रहे हैं। मौका है पंजाब के नए राज्यपाल और चंडीगढ़ के नए प्रशासक के पदग्रहण समारोह का। यह समारोह होने जा रहा है पंजाब राज भवन में। शपथ लेने वाले होंगे हरियाणा के राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी।
वे नए प्रशासक की नियुक्ति होने तक चंडीगढ़ के प्रशासक एवं पंजाब के राज्यपाल का अतिरिक्त कार्यभार संभालेंगे। 5 साल तक शहर के प्रशासक एवं पंजाब के राज्यपाल के तौर पर सेवा दे चुके शिवराज पाटिल वीरवार दोपहर बाद करीब 4 बजे राजभवन से विदाई लेंगे। पंजाब के राज्यपाल शिवराज पाटिल का कार्यकाल 21 जनवरी बुधवार को पूरा हो गया है।
चूंकि पंजाब के राज्यपाल ही चंडीगढ़ के प्रशासक हैं, लिहाजा हरियाणा के राज्यपाल की जिम्मेदारी में चंडीगढ़ भी जुड़ गया है। लोकहित और जनहित से जुड़े फैसलों को लेकर भी राज्यपाल की व्यस्तता बढ़ गई है, इसलिए 26 जनवरी को करनाल में होने वाला एट होम अब पंजाब राजभवन में होगा।
यह समारोह मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर और हरियाणा के राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी की मौजूदगी में होगा। कार्यक्रम में यह बदलाव राज्यपाल की व्यस्तता के कारण किया गया है। 1966 से हरियाणा गठन के बाद से दोनों राज्य चंडीगढ़ पर अपना दावा ठोक रहे हैं लेकिन ऐसा पहली बार हो रहा है जब 26 जनवरी को हरियाणा का एट होम चंडीगढ़ में होगा और वह भी पंजाब राजभवन में।
यूटी गेस्ट हाउस में दी गई फेयरवेल पार्टी
पंजाब के राज्यपाल शिवराज पाटिल का कार्यकाल बीते दिन 21 जनवरी बुधवार को पूरा हो गया है। वे आज राजभवन से विदाई लेंगे। विदाई से पहले बुधवार को चंडीगढ़ प्रशासन के अधिकारियों ने पाटिल को फेयरवेल पार्टी दी।
करीब 4 बजे शिवराज पाटिल यूटी गेस्ट हाउस पहुंचे और करीब एक घंटे तक प्रशासन के अफसरों से बात-मुलाकात की। प्रशासन के अधिकारियों की ओर से पाटिल को गुलदस्ता भेंट किया गया।
सूत्रों के अनुसार, शिवराज पाटिल को बुधवार शाम पंजाब भवन में विशेष तौर पर डिनर पार्टी भी दी गई। फेयरवेल पार्टी के दौरान प्रशासक के सलाहकार विजय कुमार देव, गृहसचिव अनुराग अग्रवाल, उपायुक्त मोहम्मद शाइन, स्पेशल सेक्रेटरी फाइनेंस भावना गर्ग, आईजी पुलिस आरपी उपाध्याय और एसएसपी डा. सुखचैन सिंह गिल भी मौजूद रहे।
चंडीगढ़ को लेकर होती है राजनीति
1966 से हरियाणा गठन के बाद से ही पंजाब और हरियाणा चंडीगढ़ पर अपना-अपना हक जता रहे हैं। अलग हाईकोर्ट की मांग को लेकर भी दोनों राज्यों के नेताओं के बयान एक दूसरे के खिलाफ रहते हैं जबकि एसवाईएल के पानी को लेकर भी तकरार कायम है। ऐसे में यह एट होम एक नई इबारत लिखेगा।
चीफ कमिश्नर संभालते थे बागडोर
पहले आईएएस अधिकारी चीफ कमिश्नर के तौर पर चंडीगढ़ की बागडोर संभालते थे। पंजाब में आतंकवाद के दौर के बाद यह निर्णय हुआ कि पंजाब का राज्यपाल ही चंडीगढ़ का प्रशासक होगा। उसी समय से यह सिस्टम चला आ रहा है।