अवैध खनन पर लगेगी लगाम: पंजाब में क्रशरों के पंजीकरण व खनन का हिसाब रखेगी सरकार, नियमों में होगा संशोधन
पंजाब सरकार प्रदेश में अवैध खनन और बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए नियमों में संशोधन करेगी। नए नियमों को कड़ा किया जाएगा। खनन का पूरा लेखा-जोखा सरकार अपने पास रखेगी। खनन में इस्तेमाल होने वाले वाहनों की रियल टाइम ट्रैकिंग होगी। इसके लिए सभी वाहनों पर जीपीएस लगा होना अनिवार्य किया जाएगा।
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प्रदेश में अवैध खनन और पर्यावरण प्रदूषण पर रोक लगाने के लिए पंजाब मंत्रिमंडल ने विभिन्न संशोधनों द्वारा और अधिक कड़े दिशानिर्देशों और नियमों को मंजूरी दे दी। पंजाब माइनर मिनरल रूल्ज, 2013 और पंजाब में स्टोन क्रशरों की रजिस्ट्रेशन और कार्य के लिए नीतिगत दिशानिर्देश, 2015 में संशोधन किया जाएगा। यह फैसला मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की वर्चुअल मीटिंग में लिया गया।
ये चार अहम संशोधन किए जाएंगे
- चार अहम संशोधनों के साथ गैर-कानूनी स्टोन क्रशरों पर सख्ती से रोक लगाने का रास्ता साफ होगा। इन संशोधनों के तहत:
- किसी भी रूप में खनिजों की ढुलाई में इस्तेमाल होने वाले वाहनों का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है।
- खनिज ट्रांसपोर्ट के लिए परमिट की जरूरत और वाहनों की रियल टाइम ट्रैकिंग के लिए जीपीएस भी लगाना होगा।
- राज्य में खनिजों की खुदाई में शामिल व्हील माउंटेड/चेन माउंटेड एक्सक्वेटर्स/पोकलैंड की रजिस्ट्रेशन और ऐसी सभी मशीनों की रजिस्ट्रेशन और इनकी रीयल टाइम निगरानी के लिए जीपीएस लगाया जाएगा।
- अगर कोई व्यक्ति गैर-कानूनी रॉयल्टी वसूलने या स्लिपों की जांच के लिए चेक-पोस्ट/नाका स्थापित करने की कोशिश करता है तो इन संशोधनों के तहत सरकार को एमएमडीआर एक्ट, 1957 और आईपीसी के तहत भारी जुर्माना लगाने का अधिकार होगा।
- यह जल स्रोत विभाग को स्टोन क्रशरों पर नजर रखने के भी योग्य बनाएगा क्योंकि विभाग की तरफ से विकसित ऑनलाइन पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना अनिवार्य कर दिया गया है।
- प्रोसेस्ड मैटीरियल का सही तरीके से हिसाब लिया जाएगा।
- अवैध यातायात रोकने के लिए खनिजों की ढुलाई करने वाले वाहनों को ट्रांसपोर्ट परमिट जारी करने के नियमों में भी उचित संशोधन किया जा रहा है।
एनजीटी के निर्देश पर काम कर रही सरकार
उल्लेखनीय है कि सूबे में पंजाब रेत और बजरी खनन नीति, 2018 के अंतर्गत रेत व बजरी की खदानों संबंधी ठेका ई-ऑक्शन द्वारा विभिन्न ठेकेदारों को दिया गया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेश के अनुसार, अलग-अलग मामलों में कच्चे माल का प्रयोग करने और स्टोन क्रशरों की तरफ से कच्चे माल का हिसाब देने में बड़ा अंतर पाया गया है।
इससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि गैर-कानूनी माइनिंग से कच्चा माल निकाला गया, जिसका कोई रिकार्ड नहीं था। इसलिए एनजीटी की तरफ से तीन महीनों के अंदर स्टोन क्रशरों के संबंध में एक उपयुक्त विधि अपनाने के निर्देश जारी किए गए ताकि स्टोन क्रशरों को गैर-कानूनी कच्चा माल निकालने से रोका जा सके। इसके बाद पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को स्टोन क्रशर नीति में संशोधन करने के लिए निर्देश भी जारी किए गए।