बैकफुट पर कैप्टन: पंजाब में बदली टीकाकरण नीति, विपक्ष के विरोध के बाद निजी अस्पतालों से वापस मांगी वैक्सीन
पंजाब में निजी अस्पतालों में कोरोना वैक्सीन महंगे दामों पर बेचने के मामले में अकाली दल ने स्वास्थ्य मंत्री के खिलाफ केस दर्ज करने और मामले की जांच हाईकोर्ट की निगरानी में करवाने की मांग की थी।
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पंजाब में टीकाकरण नीति में परिवर्तन कर दिया गया है। निजी अस्पतालों में दोगुने दाम पर कोरोना वैक्सीन बेचने के मामले में विपक्ष के जबरदस्त विरोध का सामना कर रही पंजाब सरकार शुक्रवार को बैकफुट पर आ गई। कोविड-वैक्सीन के राज्य प्रभारी आईएएस विकास गर्ग की ओर से आदेश जारी कर कहा गया है कि निजी अस्पताल बची हुए वैक्सीन को तत्काल वापस करें। वैक्सीन फंड में जमा पैसा सरकार की ओर से अस्पतालों को जल्द जारी किया जाएगा।
The order of providing one time limited vaccine doses to 18-44 years age group population through private hospitals is withdrawn. Private hospitals should return all vaccine doses available with them: Punjab Government pic.twitter.com/BXnNVgiB8o
— ANI (@ANI) June 4, 2021विज्ञापन
हाल ही में पंजाब सरकार द्वारा कोवाक्सिन की 1 लाख शीशियों में से 20 हजार राज्य के निजी अस्पतालों को 1,060 रुपये प्रति खुराक की दर से बेचे जाने का खुलासा हुआ था। सरकार ने इन कोरोना वैक्सीन को 400 रुपये में खरीदा था। सरकार से खरीदी गई वैक्सीन के लिए राज्य के निजी अस्पताल 1560 रुपये वसूल कर मोटा मुनाफा कमा रहे थे।
इस खुलासे पर विपक्ष भी सरकार पर हमलावर हो गया था। मामले को बढ़ता देख शुक्रवार को सरकार की ओर से फैसला वापस लेने का आदेश जारी कर दिया गया। कोविड वैक्सीन टीकाकरण अभियान के राज्य प्रभारी आईएएस विकास गर्ग ने आदेश जारी कर कहा है कि निजी अस्पतालों की ओर से टीकाकरण को लेकर गंभीर लापरवाही बरती गई है। जिसके कारण सरकार निजी अस्पतालों को अब वैक्सीन नहीं बेचेगी। सरकार की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि बची हुई वैक्सीन भी वापस ली जाएंगी। सरकार भी अस्पतालों का जल्द वैक्सीन फंड में जमा पैसा रिलीज करेगी।
सरकार का यह था तर्क
वैक्सीन बेचे जाने के पीछे टीकाकरण अभियान में शामिल कुछ अधिकारियों ने बताया कि वैक्सीन बेचकर आने वाले पैसे को सुरक्षित रखने के लिए सीएसआर फंड में एक अलग से बैंक खाता बनाया गया है। जिसमें निजी अस्पताल वैक्सीन का पैसा जमा करते हैं। अधिकारियों के अनुसार अब इस पैसे से वैक्सीन खरीदी जाएगी।
गुरुवार को शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल ने पंजाब सरकार पर निजी अस्पतालों को वैक्सीन बेचने का आरोप लगाया था। मामले को गंभीर बताते हुए सुखबीर ने हाईकोर्ट की निगरानी में जांच कराने की मांग की थी। शिअद प्रधान ने पंजाब के लोगों की जान से खिलवाड़ करने पर स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की थी।
इसके बाद स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिद्धू ने सफाई दी कि उनका टीकों पर नियंत्रण नहीं है। वे सिर्फ उपचार, परीक्षण, कोरोना के नमूने और टीकाकरण शिविरों को देखते हैं। इन आरोपों की जांच करवाई जाएगी। वे खुद भी मामले की जांच कर सकते हैं।
केंद्रीय राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर ने भी पंजाब सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा था कि कैप्टन टीकाकरण को लेकर गंभीर नहीं हैं। यही वजह है कि पंजाब में टीकों की कालाबाजारी जोरों पर है। पंजाब सरकार भी केंद्र से मिलने वाले मुफ्त टीकों की खुराक को 1060 रुपये में निजी अस्पतालों को बेच रही है। उन्होंने कहा कि एक तरफ केंद्र सरकार के प्रयासों से देशभर में 22.10 करोड़ लोगों का टीकाकरण किया जा चुका है। वहीं कांग्रेस शासित राज्यों द्वारा कोरोना वैक्सीन की कालाबाजारी व वैक्सीन की बर्बादी कर टीकाकरण अभियान को धीमा करने का प्रयास किया जा रहा है।
वहीं केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि राहुल गांधी को दूसरों को नसीहत देने से पहले कांग्रेस शासित पंजाब को देखना चाहिए। जावड़ेकर ने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार को कोवाक्सिन की 1.40 लाख डोज 400 रुपये की दर पर उपलब्ध करवाई गई थी। पंजाब में इसे बीस निजी अस्पतालों को एक हजार रुपये की दर से दे दिया।
सरकार पर लगे ये आरोप
पंजाब में सरकार द्वारा एक लाख कोवाक्सिन की शीशियों में से 20 हजार वैक्सीन राज्य के निजी अस्पतालों को 1,060 रुपये प्रति खुराक की दर से बेचे जाने का खुलासा हुआ था। सरकार ने इन कोरोना वैक्सीन को 400 रुपये में खरीदा था। सरकार से खरीदी गई वैक्सीन पर निजी अस्पताल 1560 रुपए वसूल कर मोटा मुनाफा कमा रहे थे।
अमर उजाला ने की पड़ताल
बता दें कि अमर उजाला ने कोविन वेबसाइट पर देश के 455 निजी केद्रों को लेकर पड़ताल की थी। जब जिलेवार निजी केंद्रों की सूची निकाली गई तो वहां पर प्रति खुराक वैक्सीन की कीमत भी लिखी थी। पड़ताल में खुलासा हुआ कि देश के लगभग 50 केंद्रों पर कोविशील्ड की एक खुराक न्यूनतम एक हजार रुपये में दी जा रही है। जबकि 30 केंद्रों पर कीमत 1200 से 1400 रुपये के बीच थी।