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एमएस स्वामीनाथन: हरित क्रांति के जनक के सपनों को पंजाब ने किया था साकार, अब भी रिपोर्ट लागू होने का इंतजार

Sat, 10 Feb 2024 11:38 AM IST
निवेदिता वर्मा सुरिंदर पाल, अमर उजाला, चंडीगढ़
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sat, 10 Feb 2024 11:38 AM IST
सार

एमएस स्वामीनाथन ने धान की अधिक उपज देने वाली किस्मों को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिली कि भारत के कम आय वाले किसान अधिक उपज पैदा करें। आज पंजाब में सबसे अधिक धान की फसल होती है। पंजाब में धान की फसल का उत्पादन 205 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच चुका है।

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Punjab fulfilled dreams of father of Green Revolution MS Swaminathan
एमएस स्वामीनाथन - फोटो : Social Media

विस्तार

भारत में हरित क्रांति लाने वाले एमएस स्वामीनाथन को भारत रत्न देने का एलान किया गया है। हरित क्रांति का पुरोधा पंजाब बना था। आज भी पंजाब का किसान स्वामीनाथन को अपना भगवान मानता है, जिन्होंने पंजाब में हरित क्रांति की लहर को खड़ा किया। 

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1960 के दशक के मध्य में खाद्य सुरक्षा को लेकर भारत की स्थिति काफी बदतर हो गई थी और पूरे देश में अकाल पड़ने लगा। उन परिस्थितियों में भारत सरकार ने विदेशों से संकर प्रजाति के बीज आयात किए। संकर प्रजाति के बीज अपनी उपजाऊ क्षमता और गुणवत्ता के लिए जाना जाता है। हरित क्रांति का उद्देश्य देश में कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए नीति लागू करना था। इसके तहत अनाज उगाने के लिए इस्तेमाल होने वाले पारंपरिक बीजों की जगह उन्नत किस्म के बीजों के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया गया। हरित क्रांति का आगाज स्वामीनाथन ने किया था लेकिन पंजाब की धरती इसकी पुरोधा बनी। 1960 के दशक में हरित क्रांति के तहत सरकार ने पंजाब को चुना और यहां रसायनिक खेती शुरू हुई। पानी निकालने के लिए ट्यूबवेल लगने लगे। बैलों की जगह ट्रैक्टर ने ले ली। पंजाब ने देश का पेट पालना शुरू कर दिया।
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सरकार ने इनकी आपूर्ति के लिए सिंचाई योजनाओं का विस्तार किया तथा उर्वरकों आदि पर सब्सिडी देना प्रारम्भ किया। जिसकी मदद से धीरे-धीरे देश की स्थिति बेहतर होने लगी। हरित क्रांति से देश में खाद्यान्न उत्पादन में तेजी से वृद्धि हुई और भारत खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बन सका। वर्ष 1968 में गेहूं का उत्पादन 170 लाख टन तक पहुंच गया, जो उस समय एक रिकॉर्ड था और बाद के वर्षों में यह उत्पादन लगातार बढ़ता ही गया।

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सम्मान दिया है, सपना भी साकार करो- राजेवाल
वहीं पंजाब के किसानों का एक सुर में कहना है कि स्वामीनाथन को भारत रत्न दिया गया है, यह खुशी की बात है लेकिन 2004 में उनके द्वारा की गई सिफारिशों को लागू क्यों नहीं किया गया। बीकेयू राजेवाल के बलवीर सिंह राजेवाल का कहना है कि स्वामीनाथन को भारत रत्न देना एक बड़ा सम्मान है, जिसकी प्रशंसा की जानी चाहिए लेकिन उनके सपनों को साकार कौन करेगा । पिछले लोकसभा चुनावों में मोदी सरकार ने वादा किया था कि स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट को लागू किया जायेगा लेकिन आज तक लागू नहीं हुई है। सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी, जब उनकी रिपोर्ट को लागू किया जाएगा। 

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