पंजाब कांग्रेस में सबकुछ ठीक नहीं: सिद्धू के खिलाफ चार मंत्री पहुंचे दिल्ली, क्या प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने की शुरू हुई मुहिम
पंजाब कांग्रेस में अभी सबकुछ ठीक नहीं है। नेताओं के बीच मतभेद जारी है। नवजोत सिंह सिद्धू को लेकर पार्टी में मतभेद और बढ़ता जा रहा है। मंगलवार को पंजाब के चार मंत्रियों ने संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल से मुलाकात की।
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चुनावी तैयारियों के बीच पंजाब कांग्रेस के बड़े नेताओं के बीच तालमेल नहीं बन रहा है। मंगलवार को संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल के साथ पंजाब के चार मंत्रियों की बैठक हुई लेकिन राज्य में संगठन के मुखिया नवजोत सिंह सिद्धू नहीं थे। उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा का कहना है कि चुनाव तैयारियों को लेकर बैठक थी और भविष्य में ऐसी बैठक जारी रहेंगी।
वेणुगोपाल से मिलने वालों में रंधावा के साथ कैबिनेट मंत्री परगट सिंह, अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और भारत भूषण आशु शामिल थे। सूत्रों ने बताया कि इन मंत्रियों ने नवजोत सिंह सिद्धू के लगातार किए जा रहे हस्तक्षेप और टिप्पणियों पर अपनी शिकायत संगठन मंत्री से दर्ज कराई है। इन नेताओं ने राहुल गांधी से मुलाकात की भी इच्छा जताई है।
बताया जा रहा है कि अब मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी सीधे न आकर इन मंत्रियों के माध्यम से अपनी बात केंद्रीय नेतृत्व तक पंहुचाना चाहते हैं। चूंकि इस बार सिद्धू के करीबी माने जाने वाले मंत्री परगट सिंह भी मंत्रियों के साथ शामिल हैं इसलिए उनकी बात को गंभीरता से लिया जा रहा है। राहुल गांधी के विदेश से लौटने के बाद ये नेता उनसे भी बात करेंगे।
सिद्धू अभी अपनी सरकार के कामकाज पर सवाल उठा रहे हैं और मजीठिया को लेकर भी उनके तेवर नरम नहीं पड़ रहे। रंधावा ने मीडिया से भले ही वेणुगोपाल के साथ बैठक को चुनावी तैयारी से जुड़ा बताया है लेकिन मजीठिया विवाद में वे सिद्धू को यहां तक कह दिया है कि वह अपनी जुबान बंद रखें।
भारत भूषण आशु भी सिद्धू की टिप्पणियों पर नाराजगी जता चुके हैं। सरकार से जुड़े लोग परगट सिंह के साथ में आने पर खुश हैं उन्हें लगता है कि सिद्धू को लेकर जो बातें वे लंबे समय से कहते आ रहे हैं, उस पर मुहर लग गई है। सूत्रों के मुताबिक सुखजिंदर सिंह रंधावा प्रदेश प्रधान पद की कमान अपने हाथ में चाहते हैं।
सिद्धू को प्रदेश प्रधान पद से हटवाने की मुहिम
पार्टी सूत्रों के अनुसार, शिकायतें लेकर हाईकमान के पास पहुंचे नेताओं में रंधावा की ओर से मुख्य तौर पर सिद्धू को प्रदेश प्रधान पद से हटाने की मांग रखी है। सिद्धू के कामकाज के तरीके के चलते सीनियर नेताओं के प्रयासों के बावजूद पंजाब कांग्रेस को एकजुट करना मुश्किल हो रहा है। पार्टी नेताओं का मानना है कि सिद्धू न तो चन्नी को ही काम करने दे रहे हैं और न ही पार्टी संभालने में किसी की सलाह जरूरी समझ रहे हैं।
विधानसभा चुनाव निकट नहीं बैठ रहा तालमेल
पंजाब कांग्रेस में चल रही अंदरूनी कलह को खत्म करने के सारे प्रयास विफल हो गए हैं। विधानसभा चुनाव निकट आते देखकर भी पार्टी के नेताओं के बीच तालमेल नहीं बन पा रहा और ताजा घटनाक्रम में तो प्रदेश प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू और मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी सूबे में अपनी-अपनी कांग्रेस चलाते दिखाई दे रहे हैं।
चन्नी जहां पार्टी और विधानसभा चुनाव को लेकर हाईकमान के निर्देशों की बाट जोह रहे हैं। वहीं, सिद्धू हाईकमान के निर्देश को भी दरकिनार कर जगह-जगह रैलियों में अपने पसंदीदा नेताओं को टिकट का भरोसा दे रहे हैं। वे चुनाव मेनिफेस्टो तैयार होने से पहले ही कई तरह की लोक लुभावनी घोषणाएं भी कर रहे हैं।