{"_id":"594953e44f1c1bd8128b45a0","slug":"punjab-farmers-demanded-to-forgive-all-the-debts","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"'जमीन की हदबंदी ठीक नहीं, किसानों का सारा कर्ज माफ करें सीएम साहब'","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
'जमीन की हदबंदी ठीक नहीं, किसानों का सारा कर्ज माफ करें सीएम साहब'
जगतार सिंह/अमर उजाला, मानसा(पंजाब)
Updated Wed, 21 Jun 2017 09:16 AM IST
विज्ञापन
Punjab farmer
- फोटो : File Photo
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पंजाब सरकार की ओर से पांच एकड़ जमीन वाले किसानों का कर्ज माफ करने को लेकर किसान जत्थेबंदियां नाखुश हैं। उन्होंने सरकार के इस एलान को किसानों के साथ मजाक करार दिया है। जत्थेबंदियों का कहना है कि इसमें जमीन की हदबंदी नहीं होनी चाहिए और सरकार को किसानों का सारा कर्ज माफ करना चाहिए था।
90 हजार करोड़ के कर्ज में से सिर्फ 1500 करोड़ का कर्ज माफ क्यों
भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां के जिलाध्यक्ष राम सिंह भैणीवाघा, इंद्रजीत सिंह, डकौंदा गुट के गोरा सिंह भैणीवाघा, महेंद्र सिंह भैणीवाघा, पंजाब किसान यूनियन के रूलदू सिंह कहना है कि सत्ता में आने से पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह ने किसानों का सारा कर्ज माफ करने का वादा किया था, लेकिन अब किसानों पर चढ़े 90 हजार करोड़ के कर्ज में से सिर्फ 1500 करोड़ का कर्ज माफ कर इसको वादा पूरा करने का नाम दिया जा रहा है।
सबूत न होने के कारण रद्द हो जाते हैं केस
किसान यूनियनों के मुताबिक मानसा में अब तक 262, बठिंडा में 471, संगरूर में 287 और बरनाला में 173 किसान खुदकुशी कर चुके हैं। इसमें से बठिंडा से 209, मानसा से 228, संगरूर से 220 और बरनाला से किसान खुदकुशी के 147 केस रद्द किए जा चुके हैं। इसमें उनकी खुदकुशी के सबूत नाकाफी होना एक कारण बताया जा रहा है। जत्थेबंदियों का कहना है कि किसानों ने आढ़तियों, कारपोरेट बैंकों से कर्ज, ट्रैक्टर आदि के लिए जो भी पैसे लिए वे भी खेती से ही जुड़े हुए हैं। इसलिए सारे कर्ज पर लीक मारनी चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन
90 हजार करोड़ के कर्ज में से सिर्फ 1500 करोड़ का कर्ज माफ क्यों
भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां के जिलाध्यक्ष राम सिंह भैणीवाघा, इंद्रजीत सिंह, डकौंदा गुट के गोरा सिंह भैणीवाघा, महेंद्र सिंह भैणीवाघा, पंजाब किसान यूनियन के रूलदू सिंह कहना है कि सत्ता में आने से पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह ने किसानों का सारा कर्ज माफ करने का वादा किया था, लेकिन अब किसानों पर चढ़े 90 हजार करोड़ के कर्ज में से सिर्फ 1500 करोड़ का कर्ज माफ कर इसको वादा पूरा करने का नाम दिया जा रहा है।
विज्ञापन
सबूत न होने के कारण रद्द हो जाते हैं केस
किसान यूनियनों के मुताबिक मानसा में अब तक 262, बठिंडा में 471, संगरूर में 287 और बरनाला में 173 किसान खुदकुशी कर चुके हैं। इसमें से बठिंडा से 209, मानसा से 228, संगरूर से 220 और बरनाला से किसान खुदकुशी के 147 केस रद्द किए जा चुके हैं। इसमें उनकी खुदकुशी के सबूत नाकाफी होना एक कारण बताया जा रहा है। जत्थेबंदियों का कहना है कि किसानों ने आढ़तियों, कारपोरेट बैंकों से कर्ज, ट्रैक्टर आदि के लिए जो भी पैसे लिए वे भी खेती से ही जुड़े हुए हैं। इसलिए सारे कर्ज पर लीक मारनी चाहिए।
विज्ञापन
43 केसों में दिया 3-3 लाख का मुआवजा
punjab assembly session
43 केसों में दिया 3-3 लाख का मुआवजा
मुख्य जिला कृषि अफसर डॉ. गुरदित्ता सिंह सिद्धू का कहना है कि अब तक खुदकुशी करने वाले 43 केसों को पास कर उन्हें सरकार की ओर से 3-3 लाख रुपये मुआवजा दिया जा चुका है। बाकी रहते करीब 50 केसों को भी आने वाले दिनों में पास कर दिया जाएगा।
डीसी धर्मपाल गुप्ता का कहना है कि 20 जुलाई तक किसान खुदकुशी के सभी केस पास करके उन्हें मुआवजा दे दिया जाएगा और कोई भी केस अधूरा नहीं रखा जाएगा।
आज तक नहीं मिला मुआवजा
गांव भैणीवाघा की मनजीत कौर का कहना है कि कर्ज से आहत होकर उनके पति बलदेव सिंह ने 21 नवंबर 2016 को खुदकुशी कर ली थी। उनको अब तक कोई मुआवजा नहीं मिला। पति पर चार लाख का कर्ज था। उनके दो बच्चे हैं। उनके पास पांच किल्ले जमीन है। अब खुद खेती कर परिवार को पाल रही हैं।
इसी गांव की हरप्रीत कौर ने बताया कि उनके पति मनप्रीत सिंह ने सात लाख रुपये के कर्ज से परेशान होकर खुदकुशी कर ली थी, लेकिन अब तक उन्हें सरकार की ओर से कोई मुआवजा और कोई सहायता नहीं मिली है। साढ़े चार किल्ले जमीन पर खुद खेती कर छोटे बच्चों को पाल रही हैं।
गांव भैणीवाघा की बुजुर्ग सुखदेव कौर बताती हैं, उनके बेटे गुरप्रीत सिंह ने 29 जुलाई 2014 को चार लाख के कर्ज के चलते खुदकुशी कर ली थी, लेकिन अब तक उनकी किसी ने कोई बात तक नहीं सुनी।
मुआवजे के लिए सिर्फ आत्महत्या नहीं कई शर्तें पूरी करनी पड़ती हैं
जब कोई किसान आत्महत्या करता है तो उसका एसडीएम की ओर से केस तैयार किया जाता है। इसमें धारा 174 की कार्रवाई के अलावा किसान की ओर से लिए गए सारे कर्ज का रिकॉर्ड और उसकी पोस्टमार्टम की रिपोर्ट होनी जरूरी है। इसके अलावा अन्य शर्तें भी हैं। कई किसान परिवार यह सबूत न होने से मुआवजे के लिए अपना केस तैयार ही नहीं कर पाते और मुआवजे से वंचित रह जाते हैं।
मुख्य जिला कृषि अफसर डॉ. गुरदित्ता सिंह सिद्धू का कहना है कि अब तक खुदकुशी करने वाले 43 केसों को पास कर उन्हें सरकार की ओर से 3-3 लाख रुपये मुआवजा दिया जा चुका है। बाकी रहते करीब 50 केसों को भी आने वाले दिनों में पास कर दिया जाएगा।
डीसी धर्मपाल गुप्ता का कहना है कि 20 जुलाई तक किसान खुदकुशी के सभी केस पास करके उन्हें मुआवजा दे दिया जाएगा और कोई भी केस अधूरा नहीं रखा जाएगा।
आज तक नहीं मिला मुआवजा
गांव भैणीवाघा की मनजीत कौर का कहना है कि कर्ज से आहत होकर उनके पति बलदेव सिंह ने 21 नवंबर 2016 को खुदकुशी कर ली थी। उनको अब तक कोई मुआवजा नहीं मिला। पति पर चार लाख का कर्ज था। उनके दो बच्चे हैं। उनके पास पांच किल्ले जमीन है। अब खुद खेती कर परिवार को पाल रही हैं।
इसी गांव की हरप्रीत कौर ने बताया कि उनके पति मनप्रीत सिंह ने सात लाख रुपये के कर्ज से परेशान होकर खुदकुशी कर ली थी, लेकिन अब तक उन्हें सरकार की ओर से कोई मुआवजा और कोई सहायता नहीं मिली है। साढ़े चार किल्ले जमीन पर खुद खेती कर छोटे बच्चों को पाल रही हैं।
गांव भैणीवाघा की बुजुर्ग सुखदेव कौर बताती हैं, उनके बेटे गुरप्रीत सिंह ने 29 जुलाई 2014 को चार लाख के कर्ज के चलते खुदकुशी कर ली थी, लेकिन अब तक उनकी किसी ने कोई बात तक नहीं सुनी।
मुआवजे के लिए सिर्फ आत्महत्या नहीं कई शर्तें पूरी करनी पड़ती हैं
जब कोई किसान आत्महत्या करता है तो उसका एसडीएम की ओर से केस तैयार किया जाता है। इसमें धारा 174 की कार्रवाई के अलावा किसान की ओर से लिए गए सारे कर्ज का रिकॉर्ड और उसकी पोस्टमार्टम की रिपोर्ट होनी जरूरी है। इसके अलावा अन्य शर्तें भी हैं। कई किसान परिवार यह सबूत न होने से मुआवजे के लिए अपना केस तैयार ही नहीं कर पाते और मुआवजे से वंचित रह जाते हैं।