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शिक्षा विभाग का बड़ा फैसला, पंजाब में 800 प्राइमरी स्कूल हुए बंद, जानिए क्यों?
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 21 Oct 2017 08:42 PM IST
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Punjab Primary Schools
पंजाब शिक्षा विभाग ने प्रदेश के 800 सरकारी प्राइमरी स्कूलों को बंद करने का फैसला ले लिया है। प्रदेशभर के 20 से कम विद्यार्थियों वाले इन 800 सरकारी प्राइमरी स्कूलों को एक किलोमीटर दायरे में बने अन्य सरकारी प्राइमरी स्कूलों में मर्ज किया जाएगा। यह जानकारी देते हुए शनिवार को शिक्षा विभाग के प्रवक्ता ने बताया कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा के अच्छे माहौल और मौजूदा स्टॉफ की बेहतर व आवश्यक जगह पर सेवाएं लेने के उद्देश्य से ऐसा किया गया है।
विभाग के इस फैसले के साथ ही मर्ज किए जाने वाले स्कूलों में कार्यरत अध्यापकों को आवश्यकता वाले स्थानों पर तैनात करने का फैसला किया गया है। हालांकि, शिक्षा विभाग के इस फैसले का राजनीतिक दलों और अध्यापक संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया है।
प्रवक्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और शिक्षा मंत्री अरुणा चौधरी के दिशा-निर्देशों के तहत सरकारी स्कूलों का स्तर ऊंचा उठाने और प्राथमिक शिक्षा ढांचे को और मजबूत करने के लिए पहले ही प्री-प्राइमरी कक्षाएं शुरू करने का फैसला किया जा चुका है। इसके अलावा सरकारी प्राइमरी स्कूलों का बुनियादी ढांचा मजबूत करने के लिए विशेष बजट का प्रावधान भी किया जा रहा है। विभाग ने 400 स्कूलों में पहली कक्षा से ही ऑप्शनल अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई शुरू करने का भी फैसला किया जा चुका है।
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विभाग के इस फैसले के साथ ही मर्ज किए जाने वाले स्कूलों में कार्यरत अध्यापकों को आवश्यकता वाले स्थानों पर तैनात करने का फैसला किया गया है। हालांकि, शिक्षा विभाग के इस फैसले का राजनीतिक दलों और अध्यापक संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया है।
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प्रवक्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और शिक्षा मंत्री अरुणा चौधरी के दिशा-निर्देशों के तहत सरकारी स्कूलों का स्तर ऊंचा उठाने और प्राथमिक शिक्षा ढांचे को और मजबूत करने के लिए पहले ही प्री-प्राइमरी कक्षाएं शुरू करने का फैसला किया जा चुका है। इसके अलावा सरकारी प्राइमरी स्कूलों का बुनियादी ढांचा मजबूत करने के लिए विशेष बजट का प्रावधान भी किया जा रहा है। विभाग ने 400 स्कूलों में पहली कक्षा से ही ऑप्शनल अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई शुरू करने का भी फैसला किया जा चुका है।
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Punjab Primary Schools
एक किमी से दूर स्कूल नहीं होंगे मर्ज
प्रवक्ता ने कहा कि शिक्षा सुधारों की इसी कड़ी के अंतर्गत अब केवल उन सरकारी प्राथमिक स्कूलों को करीबी सरकारी प्राइमरी स्कूलों में मर्ज करने का फैसला किया गया है, जिनमें विद्यार्थियों की संख्या 20 से कम है। इसके अलावा केवल उसी स्कूल को नजदीकी स्कूल में मर्ज करने का फैसला किया गया है, जो दूसरे स्कूल के एक किलोमीटर के दायरे में आते हैं। जिस स्कूल से दूसरा स्कूल एक किलोमीटर से अधिक दूरी पर है, उसे मर्ज नहीं किया जा रहा, भले ही वहां विद्यार्थियों की संख्या 20 से कम है।
प्रवक्ता ने बताया कि मर्ज किए जाने वाले कई स्कूलों की तो दीवार भी दूसरे स्कूल के साथ लगती है। प्रवक्ता ने बताया कि बच्चों के मुफ्त और लाजिमी शिक्षा के अधिकार का पूरी तरह पालन किया जा रहा है और किसी भी विद्यार्थी को अपनी रिहायश से एक किलोमीटर से अधिक दूरी पर पढ़ने नहीं जाना पड़ेगा। विद्यार्थियों की सुविधा का भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रवक्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि मर्ज किए जाने वाले स्कूलों के अध्यापकों को निष्पक्षता और सीनियारिटी के अनुसार उसी संबंधित जिले में आवश्यकता वाली खाली जगह वाले स्कूल में तैनात किया जाएगा।
47 स्कूलों में सिर्फ 5 विद्यार्थी
शिक्षा विभाग के प्रवक्ता ने बताया कि मर्ज किए जाने वाले 800 स्कूलों में से 47 ऐसे हैं, जहां विद्यार्थियों की संख्या सिर्फ 5 या इससे भी कम है। इनमें से 15 स्कूलों में तो विद्यार्थियों की संख्या 3 से भी कम है। प्रवक्ता ने दावा किया कि मर्जर का फैसला विद्यार्थियों और अध्यापकों के हित में लिया गया है।
प्रवक्ता ने कहा कि शिक्षा सुधारों की इसी कड़ी के अंतर्गत अब केवल उन सरकारी प्राथमिक स्कूलों को करीबी सरकारी प्राइमरी स्कूलों में मर्ज करने का फैसला किया गया है, जिनमें विद्यार्थियों की संख्या 20 से कम है। इसके अलावा केवल उसी स्कूल को नजदीकी स्कूल में मर्ज करने का फैसला किया गया है, जो दूसरे स्कूल के एक किलोमीटर के दायरे में आते हैं। जिस स्कूल से दूसरा स्कूल एक किलोमीटर से अधिक दूरी पर है, उसे मर्ज नहीं किया जा रहा, भले ही वहां विद्यार्थियों की संख्या 20 से कम है।
प्रवक्ता ने बताया कि मर्ज किए जाने वाले कई स्कूलों की तो दीवार भी दूसरे स्कूल के साथ लगती है। प्रवक्ता ने बताया कि बच्चों के मुफ्त और लाजिमी शिक्षा के अधिकार का पूरी तरह पालन किया जा रहा है और किसी भी विद्यार्थी को अपनी रिहायश से एक किलोमीटर से अधिक दूरी पर पढ़ने नहीं जाना पड़ेगा। विद्यार्थियों की सुविधा का भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रवक्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि मर्ज किए जाने वाले स्कूलों के अध्यापकों को निष्पक्षता और सीनियारिटी के अनुसार उसी संबंधित जिले में आवश्यकता वाली खाली जगह वाले स्कूल में तैनात किया जाएगा।
47 स्कूलों में सिर्फ 5 विद्यार्थी
शिक्षा विभाग के प्रवक्ता ने बताया कि मर्ज किए जाने वाले 800 स्कूलों में से 47 ऐसे हैं, जहां विद्यार्थियों की संख्या सिर्फ 5 या इससे भी कम है। इनमें से 15 स्कूलों में तो विद्यार्थियों की संख्या 3 से भी कम है। प्रवक्ता ने दावा किया कि मर्जर का फैसला विद्यार्थियों और अध्यापकों के हित में लिया गया है।