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नहीं मान रहे सिद्धू: अब नौकरियों पर चन्नी सरकार को घेरा, कहा-क्यों नहीं भरे एक लाख खाली पद

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Tue, 16 Nov 2021 11:28 AM IST

सार

हाईकमान की सभी कोशिशों के बावजूद नवजोत सिद्धू अपनी ही सरकार को कटघरे में खड़ा करने से बाज नहीं आ रहे। बेअदबी, नशे के कारोबार, शराब, रेत और ट्रांसपोर्ट माफिया के बाद अब वे प्रदेश के खजाने और बेरोजगारी पर सरकार को घेर रहे हैं। 
नवजोत सिद्धू ने फिर चन्नी सरकार पर साधा निशाना।
नवजोत सिद्धू ने फिर चन्नी सरकार पर साधा निशाना। - फोटो : twitter @sherryontopp
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विस्तार

पंजाब में एजी के इस्तीफे को स्वीकार करने के बाद लगने लगा था कि पंजाब कांग्रेस प्रधान नवजोत सिद्धू शांत हो जाएंगे लेकिन ऐसा कुछ नहीं हो रहा। सिद्धू लगातार चन्नी सरकार को घेर रहे हैं। सोमवार को उन्होंने प्रदेश की वित्त व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए चन्नी सरकार को सलाह दी थी। वहीं अब उन्होंने नौकरियों के मामले में सरकार पर निशाना साधा है।  

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उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल पर एक वीडियो शेयर कर लिखा...
जब भी बोला है सच बोला सिद्धू ने,
सोच समझ कर ही मुंह खोला सिद्धू ने।
सच से देखें कितने घायल होते हैं,
छोड़ दिया है तोप का गोला सिद्धू ने।

 

इसमें उन्होंने कहा कि जो लोग 26 लाख नौकरी देने की बात कर रहे हैं, उनसे पूछो कि जो एक लाख पद अब भी खाली पड़े हैं उन्हें क्यों नहीं भरा गया। उन्होंने कहा कि एक घर में पांच लोग होते हैं। एक लाख को नौकरी दे दोगे तो पांच लाख परिवारों तक पहुंच जाओगे। वहीं सीएम चरणजीत चन्नी ने सोशल मीडिया पर ही बिना सिद्धू का नाम लिए कहा कि पंजाबियों के मसले सुलझाने के लिए हमारी सरकार ने 52 दिन में 104 फैसले लिए।

ट्वीट कर योजनाओं के फंड की जानकारी देने की दी थी सलाह

सोमवार को सिद्धू ने लगातार तीन ट्वीट कर राज्य पर चढ़े हजारों करोड़ के कर्ज का हवाला देते हुए चन्नी सरकार को न सिर्फ कई सुझाव दिए थे, बल्कि प्रदेश की मौजूदा वित्त व्यवस्था की खामियां भी गिना डालीं थी। सिद्धू ने लिखा कि आज पंजाब भारत का सबसे अधिक कर्जदार राज्य है। राज्य के सकल घरेलू उत्पाद में ऋण का हिस्सा 50 फीसदी है। हमारे खर्च का आधा हिस्सा महंगे कर्ज से आता है। उन वास्तविक मुद्दों से न हटें, जिनका प्रत्येक पंजाबी और पार्टी कार्यकर्ता समाधान की मांग करता है। वित्तीय जवाबदेही और पारदर्शिता पंजाब मॉडल के स्तंभ हैं। जवाबदेही, प्रत्येक योजना की घोषणा के साथ उसके धन के स्रोतों का खुलासा करने की मांग करती है, भले ही वह अधिक कर्ज से होने वाली आय से लिया गया हो। इसी तरह पारदर्शिता हर महीने राज्य के वित्तीय स्वास्थ्य को सार्वजनिक करने की मांग करती है। उधार लेना आगे बढ़ने का रास्ता नहीं है। टैक्स का पैसा कर्ज चुकाने के लिए नहीं बल्कि विकास के रूप में लोगों तक वापस जाना चाहिए। समाधान उन्मुख मॉडल वही होगा, जिसमें राज्य के संसाधनों की चोरी को रोकना, सरकारी खजाने को भरना और आय सृजन के माध्यम से एक कल्याणकारी राज्य का सृजन किया जाए।
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