बाजवा की कुर्सी पर 'लाल' लकीर क्यों? 2 कारण
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पंजाब प्रदेश कांग्रेस प्रधान प्रताप सिंह बाजवा की कुर्सी डगमगा रही है। इसके मुख्य 2 कारण सामने आ रहे हैं। प्रताप सिंह बाजवा को साल 2013 में प्रदेश की प्रधानगी सौंपी गई थी। उसके बाद से वह लगातार विवादों में घिरे हैं।
प्रदेश कार्यकारिणी घोषित करते ही बाजवा के खिलाफ जमकर बगावत हुई। बड़ी संख्या में नेताओं ने इस्तीफे दिए। इस बीच हाईकमान को जांच के लिए कमेटी गठित करनी पड़ी। उनकी अगुवाई में पार्टी तीन चुनाव लगातार हारी। लोकसभा, दो उपचुनाव और अब निकाय चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन बेहद खराब रहा।
बाजवा गुट और कैप्टन गुट में बंटी कांग्रेस
निकाय चुनाव में भी पार्टी का टिकट बंटने को लेकर उनका जमकर विरोध हुआ। पिछले दिनों राहुल गांधी की मीटिंग में ज्यादातर विधायकों ने खुलकर कह दिया था कि बाजवा की अगुवाई में अगला विधानसभा चुनाव नहीं जीता जा सकता। उनकी मांग थी कि इसकेलिए कैप्टन अमरिंदर सिंह को आगे लाना होगा।
बाजवा को जीवनदान की उम्मीद
बाजवा के हिमायती राष्ट्रीय सचिव हरीश चौधरी समेत कुछ नेता यह ऐलान फिलहाल टालने में लगे हैं। उनकी कोशिश है कि किसी तरह पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी के लौटने तक घोषणा टाल दी जाए।
उन्हें इस बात की आस है कि राहुल स्थिति संभाल लें और बाजवा को जीवनदान मिल जाए। वहीं कैप्टन अमरिंदर सिंह गुट इस कोशिश में लगा है कि प्रधानगी उन्हें मिल जाए।
अगर ऐसा नहीं होता है तो कम से कम लाल सिंह की नियुक्ति के साथ ही कैप्टन को कैंपेन कमेटी का चेयरमैन घोषित कर दिया जाए।
लाल सिंह को बुलाया दिल्ली
लाल सिंह को बाजवा की जगह पंजाब कांग्रेस की प्रधानगी सौंपा जाना लगभग तय है। चर्चा है कि जल्द ही इसका औपचारिक ऐलान कर दिया जाएगा।
सूत्रों के मुताबिक हाईकमान ने शुक्रवार को लाल सिंह को दिल्ली बुलाया था, जहां पार्टी प्रधान सोनिया गांधी के सियासी सलाहकार अहमद पटेल और राष्ट्रीय महासचिव शकील अहमद ने लाल सिंह से बातचीत की।
सूत्रों के मुताबिक उन्होंने लाल सिंह से पूछा है कि क्या वह प्रधानगी की जिम्मेदारी संभाल सकते हैं या फिर क्या वह सभी गुटों को साथ लेकर चल सकेंगे। इस पर लाल सिंह ने हामी भर दी है। ऐसे में अब मामले की फाइल सोनिया गांधी के पास भेज दी गई है।
हालांकि लाल सिंह की नियुक्ति पर कैप्टन धड़े को आपत्ति नहीं होगी। लाल सिंह पहले भी 2009 में कुछ समय के लिए कार्यकारी प्रधान रह चुके हैं।