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Punjab Congress Crisis: सिद्धू को तरजीह देकर हाईकमान ने आग में डाला घी, पुराने नेताओं को दरकिनार करना पड़ेगा महंगा
Mon, 19 Jul 2021 07:48 AM IST
निवेदिता वर्मा
हर्ष कुमार सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़
हर्ष कुमार सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Mon, 19 Jul 2021 07:48 AM IST
सार
पंजाब कांग्रेस में जान फूंकने वाले और 2017 में मोदी लहर के बीच पंजाब में अपने बूते पर कांग्रेस की बहुमत वाली सरकार बनाने वाले कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ पार्टी हाईकमान ने मौजूदा मामले में जैसा सलूक किया है, कैप्टन उससे बुरी तरह आहत हुए हैं। ऐसे में पार्टी विवाद खत्म नहीं हुआ है, बल्कि एक नया विवाद खड़ा होने के पूरे आसार बन गए हैं।
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पंजाब कांग्रेस संकट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पंजाब कांग्रेस में मचे घमासान में नवजोत सिद्धू को प्रदेश पार्टी प्रधान बनाने का पार्टी हाईकमान का फैसला आग में घी का काम कर गया है। रविवार को विधायक नवजोत सिंह सिद्धू को पंजाब प्रदेश कांग्रेस का प्रधान नियुक्त किए जाने की घोषणा के साथ ही पंजाब कांग्रेस दो-फाड़ हो गई। कुछ चुनिंदा विधायकों ने जहां सिद्धू की नियुक्ति का समर्थन किया है, वहीं ज्यादातर विधायक और पंजाब कांग्रेस के सभी सीनियर नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह के पक्ष में खड़े हो गए हैं।
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हालांकि कैप्टन और उनके समर्थक नेताओं की तरफ से अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन यह साफ हो गया है कि हाईकमान ने न सिर्फ सिद्धू को बहुत ज्यादा तरजीह दे दी है, बल्कि अब तक प्रदेश कांग्रेस की बागडोर संभाल रहे नेताओं को सिरे से दरकिनार कर दिया है। हाईकमान ने सिद्धू के साथ जिन नेताओं को कार्यकारी प्रधान बनाया है, वह भी सिद्धू के पक्षधर रहे हैं। इस तरह प्रदेश कांग्रेस में अब कैप्टन और पुराने कांग्रेसियों का दबदबा खत्म हो गया है।
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नवजोत सिद्धू के साथ नहीं है पंजाब कांग्रेस का समर्थन
पार्टी हाईकमान ने कैप्टन अमरिंदर सिंह की दलीलों को नकारते हुए भले ही नवजोत सिद्धू को प्रदेश प्रधान बना दिया है लेकिन प्रदेश के कांग्रेस नेता उनके साथ नहीं हैं। इसका एक उदाहरण यह है कि जब हाईकमान की तीन सदस्यीय कमेटी ने विवाद सुलझाने के लिए सभी विधायकों और मंत्रियों को बारी-बारी से दिल्ली बुलाकर बातचीत की थी, तब नवजोत सिद्धू ने बातचीत के दौरान दावा किया था कि प्रदेश के 80 विधायकों में से ज्यादातर उनके साथ हैं।
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इस पर सिद्धू से पूछा गया कि अपने समर्थक 40 विधायकों के नाम बताएं, तो सिद्धू यह नाम नहीं बता सके। इस पर तीन सदस्यीय कमेटी ने सिद्धू से कहा कि हमारी जानकारी के मुताबिक केवल 2 विधायक ही आपके साथ हैं, उनके ही नाम बता दें। इस पर भी सिद्धू केवल परगट सिंह का ही नाम बता सके। दूसरे विधायक का नहीं। लगभग यही स्थिति इस समय भी बनी हुई है और सिद्धू द्वारा घर-घर जाकर समर्थन मांगने के बावजूद ज्यादातर विधायक कैप्टन के साथ खड़े हैं।