दुविधा में कांग्रेस: पंजाब में अगले सीएम चेहरे के लिए दो नाम चुने, दोनों ही बड़े विवादों में फंसे
पंजाब कांग्रेस में सीएम पद उम्मीदवार के लिए जोर लगा रहे चरणजीत चन्नी और नवजोत सिद्धू में अभी तक चन्नी का पलड़ा भारी है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि छह फरवरी को कांग्रेस उन्हें ही अगला सीएम प्रोजेक्ट कर सकती है।
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पंजाब विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटी कांग्रेस छह फरवरी को अपना अगला सीएम चेहरा घोषित करेगी। रेस में दो दावेदार हैं, सीएम चरणजीत चन्नी और नवजोत सिद्धू। मजे की बात ये है कि पिछले कुछ दिनों में दोनों ही उम्मीदवार बड़े विवादों में घिर गए हैं। जहां सीएम चन्नी पर अवैध खनन में संलिप्तता के आरोप लग रहे हैं, वहीं नवजोत सिद्धू के खिलाफ 34 साल पुराना एक गैर इरादतन हत्या का केस दोबारा चर्चा में है। इसके अलावा सिद्धू पर एनआरआई बहन ने भी कई सनसनीखेज आरोप लगाए हैं।
वहीं चन्नी के भतीजे की गिरफ्तारी पर कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि यह एक राजनीतिक गिरफ्तारी है, दबाव बनाने के लिए की जा रही है। अगर किसी के खिलाफ कार्रवाई करनी होती तो यह एक दिन में नहीं बल्कि 4-5 महीने में की जानी चाहिए थी। यह जानबूझकर किया जा रहा है। चन्नी अनुसूचित जाति के मुख्यमंत्री हैं, वे उन्हें परेशान करना और उनका मनोबल गिराना चाहते हैं।
कैप्टन के शासनकाल में दर्ज हुआ केस चन्नी के लिए बना दर्द
साल 2018 में जब कैप्टन अमरिंदर सिंह पंजाब के मुख्यमंत्री थे, उस समय अवैध खनन का मामला सामने आया था। पंजाब पुलिस ने केस दर्ज कर इस मामले में चालान पेश कर दिया था। हालांकि तब उसमें भूपिंदर सिंह का नाम नहीं था। एफआईआर के मुताबिक इस मामले में 26 आरोपी हैं। इसमें शामिल छह ठेकेदारों के खिलाफ ईडी जांच कर रही है। पंजाब पुलिस की ओर से दर्ज प्राथमिकी के आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की है। ईडी के अधिकारियों के मुताबिक इस मामले में मुख्य आरोपी कुदरतदीप सिंह ने दो निदेशकों संदीप सिंह और भूपिंदर सिंह के साथ नई कंपनियां बनाई थीं। पूछताछ के बाद ईडी के हाथ भूपिंदर हनी तक पहुंचे और 18 जनवरी को ईडी ने हनी के चंडीगढ़, लुधियाना, मोहाली और फतेहगढ़ के दस अलग-अलग ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापे मारे। प्रवर्तन निदेशालय को इनके ठिकानों से 10.7 करोड़ रुपये की नकदी बरामद हुई।
1988 में सिद्धू पर दर्ज मामला फिर उठा
दिसंबर 1988 में नवजोत सिद्धू पटियाला में कार से जाते समय बुजुर्ग गुरनाम सिंह से भिड़ गए थे। गुस्से में सिद्धू ने उन्हें मुक्का मारा जिसके बाद गुरनाम सिंह की मौत हो गई थी। पटियाला पुलिस ने सिद्धू और उनके दोस्त रुपिंदर सिंह के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया था। निचली अदालत ने 1999 में सिद्धू को बरी कर दिया था लेकिन पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने 2006 में सिद्धू को इस मामले में तीन साल की सजा सुनाई थी। सिद्धू तब भाजपा के अमृतसर से सांसद थे। सजा के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद सिद्धू ने सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के फैसले कोचुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में सिद्धू को मात्र एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई थी। इसके बाद पीड़ित पक्ष ने इस पर पुनर्विचार याचिका दायर की थी। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई 25 फरवरी तक टाल दी है।
सिद्धू पर एनआरआई बहन ने लगाए थे मां को घर से निकालने के आरोप
नवजोत सिंह सिद्धू पर अमेरिका में रहने वाली उनकी बड़ी बहन सुमन तूर ने आरोप लगाया था कि 1986 में पिता भगवंत सिंह की मौत के बाद नवजोत सिद्धू ने मेरी मां और बड़ी बहन को घर से निकाल दिया और 1989 में रेलवे स्टेशन पर लावारिस हालत में मां की मौत हो गई, जबकि वह लावारिस नहीं थी। सुमन ने सिद्धू पर आरोप लगाया कि उन्होंने उनके परिवार के साथ ज्यादतियां कीं। उन्होंने रोते हुए अपनी मां के लिए इंसाफ की अपील करते हुए कहा कि सिद्धू ने संपत्ति के लिए हमारी मां को मार डाला। आज सिद्धू जिस पैसे से ऐश कर रहे हैं, वह मेरी मां के खून से रंगे हैं। उन्होंने पंजाब की सभी माताओं-बहनों से अपील की है कि उनकी मां को इंसाफ दिलाएं। वहीं सिद्धू ने इस बयान को विरोधियों की ओछी हरकत बताया और कहा कि कुछ लोग घटिया राजनीति करने के लिए उनकी मां को कब्र से बाहर निकाल लाए हैं। सिद्धू कभी इतना नहीं गिर सकता और न ही अपनी मां को कीचड़ में गिराएगा। अब सुमन के आरोपों का विरोधियों को जवाब देने के लिए 40 साल पहले गुजर चुकी अपनी मां को दोबारा नहीं ला सकते।