{"_id":"5e621e528ebc3eeb560a8a79","slug":"punjab-cm-captain-amrinder-singh-wrote-letter-to-pm-narendra-modi","type":"story","status":"publish","title_hn":"कैप्टन ने लिखा पत्र- साहिबजादा फतेह सिंह के नाम पर राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार शुरु करने की मांग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कैप्टन ने लिखा पत्र- साहिबजादा फतेह सिंह के नाम पर राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार शुरु करने की मांग
Fri, 06 Mar 2020 09:37 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 06 Mar 2020 09:37 PM IST
विज्ञापन
फाइल फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को साहिबजादा फतेह सिंह जी के नाम पर राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार देने और दीवान टोडरमल के सम्मान में सोने का यादगारी सिक्का जारी करने की अपील की है। मोदी को लिखे पत्र में मुख्यमंत्री ने कहा कि दीवान टोडरमल ने न्याय और मानवता की खातिर सब कुछ त्याग दिया जबकि सिखों के दशमेश पिता श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के छोटे साहिबजादे की बेमिसाल बहादुरी के समक्ष दुनिया भर के पंजाबी बहुत ही श्रद्धा और सत्कार से सिर झुकाते हैं।
विज्ञापन
कैप्टन ने कहा कि पंजाब से बाहर खासकर विश्व भर के लोगों को हमारे इतिहास के पन्नों में दर्ज इस महान अध्याय से प्रेरणा लेनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने महान सिख गुरु साहिबान के बेमिसाल बलिदान और शहादत का जिक्र किया, जिसने हमारी पीढ़ियों को सदा प्रेरित किया है और हमारे मुल्क के इतिहास के गौरवमयी हिस्से में दर्ज है। मुख्यमंत्री ने कहा कि श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने मुगलों के अन्याय और दमन के खिलाफ लड़ाई लड़ते हुए समूचे परिवार का बलिदान दे दिया था, जिस कारण इतिहास में गुरु साहिब जी को ‘सरबंस दानी’ के तौर पर सत्कार दिया जाता है।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि दशमेश पिता जी के दो बड़े सुपुत्र साहिबजादा अजीत सिंह जी और साहिबजादा जुझार सिंह जी ने चमकौर साहिब की जंग में शहादत दी। मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में लिखा कि गुरु साहिब जी के दो छोटे सुपुत्र साहिबजादा जोरावर सिंह और साहिबजादा फतेह सिंह को अमानवीय और बेरहम ढंग से सरहिंद में जीवित नींव में चिनवा दिया गया था। उन्होंने कहा कि छोटी उम्र के बावजूद छोटे साहिबजादे ने सरहिंद के मुगल हुक्मरान की ताकत के विरुद्ध बेमिसाल बहादुरी और वीरता दिखाई थी।
विज्ञापन