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अनुशासनहीन पुलिस अफसरों को हटाने में नहीं होगा संकोच, संभल जाएं: कैप्टन
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 12 Apr 2018 10:06 AM IST
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अमरिंदर सिंह
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पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पुलिस के आला अधिकारियों को अदालतों और मीडिया में जारी उनकी निजी और पेशेवर जंग को तुरंत खत्म करने के आदेश दिए। उन्होंने चेतावनी दी कि पंजाब पुलिस का नाम बदनाम करने और अनुशासनहीनता के दोषी अफसरों को हटाने में उन्हें संकोच नहीं होगा। मुख्यमंत्री ने आला पुलिस अधिकारियों को साफ कर दिया कि अगर जरूरत पड़ी तो वह अनुशासनहीन पुलिस अफसरों को बर्खास्त करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री तक पहुंच जाएंगे।
कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बुधवार दोपहर पुलिस के डीजीपी और एडीजीपी रैंक के अफसरों की बंद कमरे में बैठक की। मुख्यमंत्री ने बैठक से पहले सभी अफसरों से एक-एक कर विवादों की जानकारी हासिल कर ली थी। इसके बाद हुई बैठक आधा घंटा ही चली। बैठक के बाद सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री ने पंजाब पुलिस के सीनियर अधिकारियों के आपसी लड़ाई पर नाराजगी जताई है। मुख्य सचिव करन अवतार सिंह और गृह सचिव एनएस कलसी ने भी इस मौके पर अधिकारियों को ऐसे विवादों में शामिल न होने की अपील की।
विवाद सुलझाने का सीएम ने यह बताया तरीका
मुख्यमंत्री ने बैठक के दौरान आला पुलिस अफसरों से कहा कि सामने आए पेशेवर मुद्दों संबंधी कोई भी सीनियर अधिकारी सबसे पहले राज्य के डीजीपी, उसके बाद गृह सचिव और मुख्य सचिव के पास जा सकता है। अगर फिर भी वह संतुष्ट नहीं होता तो वह उनके पास आ सकता है।
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डीजीपी सुरेश अरोड़ा ही पुलिस फोर्स के लीडर : कैप्टन
मुख्यमंत्री ने सभी पुलिस अफसरों को स्पष्ट कर दिया कि पुलिस फोर्स के हर अधिकारी के लिए डीजीपी सुरेश अरोड़ा की लीडरशिप स्वीकार करना अनिवार्य है। कैप्टन ने कहा कि सुरेश अरोड़ा को केंद्रीय मंत्री केंद्र में ले जाना चाहते थे। उन्होंने अरोड़ा की महारत और पेशेवर योग्यता के मद्देनजर उन्हें राज्य में रखने की विनती की थी।
अफसरों के झगड़े सामने आए तो बहुत बुरा लगा : सीएम
मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने कभी पंजाब पुलिस में ऐसी बातें होते नहीं देखी थी। जब से यह विवाद सामने आया है, उन्हें बहुत ज्यादा बुरा महसूस हुआ है। जो भी हुआ, वह बहुत घटिया ही नहीं है बल्कि पंजाब के हितों के लिए भी घातक है।
पूरे घटनाक्रम ने मुश्किल स्थिति में डाला : डीजीपी
डीजीपी सुरेश अरोड़ा ने कहा कि पूरे घटनाक्रम ने उनको मुश्किल स्थिति में डाल दिया है। परंतु उन्होंने अधिकारियों को भरोसा दिलाया है कि वे फोर्स के पेशेवर मापदंडों को बनाए रखेंगे।
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कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बुधवार दोपहर पुलिस के डीजीपी और एडीजीपी रैंक के अफसरों की बंद कमरे में बैठक की। मुख्यमंत्री ने बैठक से पहले सभी अफसरों से एक-एक कर विवादों की जानकारी हासिल कर ली थी। इसके बाद हुई बैठक आधा घंटा ही चली। बैठक के बाद सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री ने पंजाब पुलिस के सीनियर अधिकारियों के आपसी लड़ाई पर नाराजगी जताई है। मुख्य सचिव करन अवतार सिंह और गृह सचिव एनएस कलसी ने भी इस मौके पर अधिकारियों को ऐसे विवादों में शामिल न होने की अपील की।
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विवाद सुलझाने का सीएम ने यह बताया तरीका
मुख्यमंत्री ने बैठक के दौरान आला पुलिस अफसरों से कहा कि सामने आए पेशेवर मुद्दों संबंधी कोई भी सीनियर अधिकारी सबसे पहले राज्य के डीजीपी, उसके बाद गृह सचिव और मुख्य सचिव के पास जा सकता है। अगर फिर भी वह संतुष्ट नहीं होता तो वह उनके पास आ सकता है।
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डीजीपी सुरेश अरोड़ा ही पुलिस फोर्स के लीडर : कैप्टन
मुख्यमंत्री ने सभी पुलिस अफसरों को स्पष्ट कर दिया कि पुलिस फोर्स के हर अधिकारी के लिए डीजीपी सुरेश अरोड़ा की लीडरशिप स्वीकार करना अनिवार्य है। कैप्टन ने कहा कि सुरेश अरोड़ा को केंद्रीय मंत्री केंद्र में ले जाना चाहते थे। उन्होंने अरोड़ा की महारत और पेशेवर योग्यता के मद्देनजर उन्हें राज्य में रखने की विनती की थी।
अफसरों के झगड़े सामने आए तो बहुत बुरा लगा : सीएम
मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने कभी पंजाब पुलिस में ऐसी बातें होते नहीं देखी थी। जब से यह विवाद सामने आया है, उन्हें बहुत ज्यादा बुरा महसूस हुआ है। जो भी हुआ, वह बहुत घटिया ही नहीं है बल्कि पंजाब के हितों के लिए भी घातक है।
पूरे घटनाक्रम ने मुश्किल स्थिति में डाला : डीजीपी
डीजीपी सुरेश अरोड़ा ने कहा कि पूरे घटनाक्रम ने उनको मुश्किल स्थिति में डाल दिया है। परंतु उन्होंने अधिकारियों को भरोसा दिलाया है कि वे फोर्स के पेशेवर मापदंडों को बनाए रखेंगे।