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वर्चस्व की जंग में अकेले पड़ गए नवजोत सिद्धू, परगट सिंह ने बनाई दूरी और कैप्टन को बताई मंशा
Wed, 10 Jul 2019 09:54 AM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालंधर(पंजाब)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालंधर(पंजाब)
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 10 Jul 2019 09:54 AM IST
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नवजोत सिद्धू
- फोटो : फाइल फोटो
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वर्चस्व की जंग में नवजोत सिंह सिद्धू अकेले पड़ गए हैं। उनके साथ चोली दामन का साथ रखने वाले पद्मश्री परगट सिंह भी अब नाराज चल रहे हैं। उन्होंने सिद्धू से दूरी बना रखी है। परगट सिंह अब सिद्धू के साथ किसी भी मंच पर या उनकी गाड़ी में नजर नहीं आते। राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, परगट सिंह ने कैप्टन से मुलाकात करके अपनी मंशा जाहिर भी कर दी है।
नवजोत सिंह सिद्धू और परगट सिंह की दोस्ती काफी पुरानी है। सिद्धू क्रिकेटर, तो परगट सिंह हॉकी के बेहतरीन खिलाड़ी रहे हैं। सिद्धू भाजपा में थे तो परगट सिंह अकाली दल में। सिद्धू अमृतसर से भाजपा सांसद थे तो परगट सिंह जालंधर कैंट से शिअद विधायक।
दोनों ने अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल और बिक्रम मजीठिया के खिलाफ एक साथ मोर्चा खोला। 2017 में विधानसभा चुनाव से पहले दोनों ने अपनी-अपनी पार्टी को अलविदा कह दिया। दोनों एक साथ आवाज बुलंद करने लगे। दोनों की आम आदमी पार्टी से एक साथ मीटिंग हुई और फिर दोनों ने कांग्रेस ज्वॉइन की।
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जालंधर कैंट से विधायक परगट सिंह की टिकट को लेकर पंगा पड़ा, लेकिन सिद्धू ने राहुल गांधी के दरबार में पूरा दमखम लगाकर कैंट से कांग्रेस की टिकट पद्मश्री को ही दिलाई। इस चक्कर में कैप्टन के करीबी माने जाने वाले पूर्व विधायक जगबीर सिंह बराड़ का टिकट कट गया। सिद्धू निकाय मंत्री बने तो उन्होंने परगट सिंह को अपना सारथी बनाकर रखा।
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नवजोत सिंह सिद्धू और परगट सिंह की दोस्ती काफी पुरानी है। सिद्धू क्रिकेटर, तो परगट सिंह हॉकी के बेहतरीन खिलाड़ी रहे हैं। सिद्धू भाजपा में थे तो परगट सिंह अकाली दल में। सिद्धू अमृतसर से भाजपा सांसद थे तो परगट सिंह जालंधर कैंट से शिअद विधायक।
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दोनों ने अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल और बिक्रम मजीठिया के खिलाफ एक साथ मोर्चा खोला। 2017 में विधानसभा चुनाव से पहले दोनों ने अपनी-अपनी पार्टी को अलविदा कह दिया। दोनों एक साथ आवाज बुलंद करने लगे। दोनों की आम आदमी पार्टी से एक साथ मीटिंग हुई और फिर दोनों ने कांग्रेस ज्वॉइन की।
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जालंधर कैंट से विधायक परगट सिंह की टिकट को लेकर पंगा पड़ा, लेकिन सिद्धू ने राहुल गांधी के दरबार में पूरा दमखम लगाकर कैंट से कांग्रेस की टिकट पद्मश्री को ही दिलाई। इस चक्कर में कैप्टन के करीबी माने जाने वाले पूर्व विधायक जगबीर सिंह बराड़ का टिकट कट गया। सिद्धू निकाय मंत्री बने तो उन्होंने परगट सिंह को अपना सारथी बनाकर रखा।
सिद्धू के पाकिस्तान दौरे के बाद सियासत में काफी बदलाव हुआ। सिद्धू और आईएसआई चीफ बाजवा की जफ्फी ने पंजाब से लेकर दिल्ली तक भूचाल ला दिया। सिद्धू की इस जफ्फी के बाद उनकी काफी किरकिरी हुई और सिद्धू एक के बाद एक कारनामों के कारण चर्चा का विषय बन गए।
कैप्टन और सिद्धू की जंग लोकसभा चुनाव में खुलकर सामने आ गई। लोकसभा चुनाव के प्रचार के दौरान परगट सिंह नवजोत सिद्धू के साथ दिखाई देते रहे, लेकिन इसके बाद कैप्टन ने जैसे ही सिद्धू के खिलाफ मोर्चा खोला, परगट सिंह ने भी खुद को इस जंग से अलग कर लिया।
परगट सिंह और सुरेश कुमार के बीच हैं दोस्ताना संबंध
कैप्टन अमरिंदर सिंह के मुख्य प्रिंसिपल सचिव सुरेश कुमार और परगट सिंह के बीच काफी अच्छे संबंध हैं। इसी कारण परगट सिंह कैप्टन वर्सेज नवजोत सिंह सिद्धू की जंग में बिल्कुल अलग चल रहे हैं।
कैप्टन और सिद्धू की जंग लोकसभा चुनाव में खुलकर सामने आ गई। लोकसभा चुनाव के प्रचार के दौरान परगट सिंह नवजोत सिद्धू के साथ दिखाई देते रहे, लेकिन इसके बाद कैप्टन ने जैसे ही सिद्धू के खिलाफ मोर्चा खोला, परगट सिंह ने भी खुद को इस जंग से अलग कर लिया।
परगट सिंह और सुरेश कुमार के बीच हैं दोस्ताना संबंध
कैप्टन अमरिंदर सिंह के मुख्य प्रिंसिपल सचिव सुरेश कुमार और परगट सिंह के बीच काफी अच्छे संबंध हैं। इसी कारण परगट सिंह कैप्टन वर्सेज नवजोत सिंह सिद्धू की जंग में बिल्कुल अलग चल रहे हैं।