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पंजाब में बढ़ाई गई सभी विश्वविद्यालयों की सुरक्षा, कैप्टन ने जेएनयू घटना को बताया बर्बर

Mon, 06 Jan 2020 10:08 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Mon, 06 Jan 2020 10:08 PM IST
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Punjab CM Captain Amarinder Singh Statement over JNU Violence
कैप्टन अमरिंदर सिंह (फाइल फोटो) - फोटो : एएनआई

देशभर में जेएनयू में छात्रों पर हुए हमले को लेकर सियासत गर्म हो गई है। वहीं इस घटना को लेकर कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन भी हुए। चंडीगढ़ स्थित पंजाब विश्वविद्यालय में छात्रों ने इस घटना का कड़ा विरोध किया और प्रदर्शन भी किया। वहीं जेएनयू के पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह छात्रों पर हुए हमले को बर्बर और अत्याचार कहा।

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उन्होंने मांग की कि इस मामले में दिल्ली पुलिस कड़ा एक्शन ले और हमलावरों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए। जूएनयू में हिंसा की घटना को देखते हुए मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पंजाब पुलिस को राज्य के विश्वविद्यालयों में सुरक्षा बढ़ाने को कहा है ताकि राज्य में विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। 
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मुख्यमंत्री ने कहा है कि राज्य में किसी को भी शांति भंग करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। कैप्टन ने सोमवार को अपने ट्वीटर हैंडल पर लिखा- जेएनयू में स्थिति स्पष्ट रूप से हाथ से बाहर हो गई है। दिल्ली पुलिस प्रमुख विश्वविद्यालय में मुट्ठी भर गुंडों द्वारा की गई इस तबाही के लिए मूकदर्शक बनी नहीं रह सकती। 
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यह बर्बर, अत्याचारपूर्ण है और मजबूती से निपटने की जरूरत है। जेएनयू में रविवार रात हिंसा हुई, जिसमें लाठी और डंडों से लैस नकाबपोश लोगों ने छात्रों और शिक्षकों पर हमला किया और परिसर में संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। बाद में पुलिस ने वहां फ्लैग मार्च किया। हिंसा में जेएनयू छात्र संगठन की अध्यक्ष आयशा घोष समेत कम से कम 28 लोग घायल हुए। जेएनयू में हिंसा का नंगा नाच करीब दो घंटे तक चलता रहा।

पंजाब यूथ कांग्रेस ने जेएनयू पर हमले की निंदा की

पंजाब यूथ कांग्रेस ने भी विद्यार्थियों पर हमले की निंदा की है। उन्होंने इस हमले के लिए एबीवीपी और उसके गुंडों को जिम्मेदार ठहराते हुए पंजाब यूथ कांग्रेस का पांच सदस्यीय डेलिगेशन जेएनयू भेजने का एलान किया, जो जेएनयू में प्रभावित छात्रों को वित्तीय और भावनात्मक मदद की पेशकश करेगा।

पंजाब यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष बिरेंद्र ढिल्लो, विधायक कुलबीर जीरा, मोहित मोहिंद्रा, उदयवीर ढिल्लो ने कहा-हम एबीवीपी और उसके गुंडों द्वारा छात्रों पर किए गए हमले की निंदा करते हैं। गृह मंत्री और प्रधानमंत्री के संरक्षण में एबीवीपी, आरएसएस द्वारा यह सरासर गुंडागर्दी है। इन छात्रों को सीएबी को स्वीकार करने और कानून के खिलाफ विरोध करने के लिए दंडित किया गया है। यह सब कुछ सीएए से ध्यान हटाने के लिए किया गया है।

जेएनयू के विद्यार्थियों पर हुए हमले का विरोध
हमले का सीटीयू के छात्रों ने कड़ा विरोध किया है। सोमवार को यूनिवर्सिटी में छात्रों ने बैनरों के माध्यम से विरोध जताया। छात्रों का कहना था कि शिक्षा हमें सवाल पूछने, अपने अधिकारों के लिए लड़ने का अधिकार देती है, मगर जब सवाल पूछने पर पत्थर और अधिकार मांगने पर लाठी मिले तब ऐसी शिक्षा का क्या फायदा। यूनिवर्सिटी के मैनेजिंग डायरेक्टर मनबीर सिंह ने कहा कि युवा हमारे देश का भविष्य है। उनपर हमला करना सही नहीं है, फिर चाहे बात कोई भी क्यों न हो। उन्होंने कहा कि अगर युवा सवाल पूछेगा तभी देश बदलेगा। उनकी संस्था इस तरह के हमलों की निंदा करती है, वहीं छात्रों से शांति बनाए रखने की अपील भी करती है।

दोषी किसी भी पार्टी के हों बख्शा नहीं जाए

जवाहर लाल नेहरु यूनिवर्सिटी (जेएनयू) में अशांति और हिंसा के लिए ज़िम्मेदार व्यक्तियों, चाहे वह किसी भी पार्टी से संबंधित हों, के ख़िलाफ़ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने सोमवार को केंद्र और दिल्ली सरकार को इस मामले पर एक-दूसरे पर दोष ना लगाने को कहा है। उन्होंने कहा कि दोनों सरकारें भारत की प्रमुख यूनिवर्सिटी में अमन और कानून की जल्द बहाली को यकीनी बनाने के लिए काम करें।

मुख्यमंत्री ने पिछले कुछ हफ़्तों के दौरान अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, जामिया मिल्लीया यूनिवर्सिटी और अब जेएनयू में लगातार हमलों और झड़पों पर दुख प्रकट करते हुए कहा कि इन वारदातों ने न सिफ़ॱर देश की अंतरराष्ट्रीय छवि को चोट पहुँचाई है बल्कि देश की तरक्की और विकास के अहम स्तम्भ शिक्षा ढांचे को भी नुकसान पहुंचाया है।

जेएनयू में बीती रात हुई हिंसा के लिए केंद्र और दिल्ली सरकार के साथ-साथ दिल्ली पुलिस को दोषी ठहराते हुए कैप्टन ने कहा कि आज़ाद देश में ऐसे दृश्य अचंभे वाली बात है। उन्होंने पूछा,‘‘जब यूनिवर्सिटी कैंपस में विद्यार्थियों, स्टाफ और अध्यापकों पर सरेआम बेरहमी से हमला किया जा रहा था तो दिल्ली पुलिस कहाँ थी?’’ उन्होंने साथ ही कहा,‘‘यही दिल्ली पुलिस कुछ दिन पहले जामिया  मिल्लीया यूनिवर्सिटी में विद्यार्थियों के रोष प्रदर्शन पर पूरी तरह एक्शन में आ गई थी और अब अचानक जेएनयू में क्यों पीछे हटने का फ़ैसला कर लिया? किस के कहने पर उन्होंने कोई पैरवी नहीं की?’’

कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने इस मामले पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल की आलोचना करते हुए कहा कि जब जेएनयू जल रही थी तो वह कहीं नजऱ नहीं आए। पंजाब के मुख्यमंत्री ने दिल्ली के मुख्यमंत्री को पूछा ,‘‘वह मौके पर क्यों नहीं गए? क्या इस मामले पर सिफ़ॱर ट्वीट करना काफ़ी था? एक मुख्यमंत्री जो अपने आप को दिल्ली के लोगों की भलाई का रक्षक बताता है, को क्या इस मामले में निजी दख़ल नहीं देना चाहिए था?’’

कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार, दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार और दिल्ली पुलिस को इस मामले पर पूरी तरह मूक दर्शक बने रहने के लिए आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जे.एन.यू. में बीती रात अमन-कानून की बिगड़ी हुई ऐसी हैरानीजनक घटना ने भारत की तरफ से परिपक्व लोकतंत्र देश होने के किये जा रहे दावों की खिल्ली उड़ाई है।
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