कैप्टन अमरिंदर सिंह बोले- केंद्र सरकार ने किसानों के विरोध प्रदर्शन का मजाक बनाया
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पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने संसद में नए कृषि विधेयकों के पास होने से न्यूनतम समर्थन मूल्य खत्म होने संबंधी किसानों में बढ़ रही शंकाओं के बीच गेहूं और रबी की पांच फसलों के मूल्य में की गई वृद्धि को भद्दा मजाक करार दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बेरहम कदम है। केंद्र ने कृषि बिलों पर किसानों के रोष प्रदर्शनों का मजाक उड़ाया है।
यह कृषि बिल आखिर में न्यूनतम समर्थन मूल्य का अंत करने और भारतीय खाद्य निगम के खात्मे का रास्ता प्रशस्त करेंगे। यदि भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार यह सोचती है कि वह इस तुच्छ वृद्धि के साथ सड़कों पर उतरे किसानों को शांत कर लेगी तो वह जमीनी हकीकत से पूरी तरह अनजान है। उन्होंने केंद्र सरकार पर हमला करते हुए कहा कि आप ऐसे व्यक्ति को खुश करने की चालबाजी नहीं चल सकते जो आपके शर्मनाक कदमों के नतीजे के तौर पर अपनी रोजी-रोटी खो जाने की कगार पर है।
किसान मांग रहे लिखित गारंटी
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान मांग कर रहे हैं कि उनको लिखित गारंटी दी जाए कि न्यूनतम समर्थन मूल्य के साथ छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। इससे एक बार फिर यह सिद्ध हो जाता है कि भाजपा और उसके अकाली दल जैसे सहयोगी किसानों और उनकी समस्याओं को कितनी अच्छी तरह जानते हैं। जब किसान और पूरे मुल्क को इस बात का यकीन नहीं कि एमएसपी की व्यवस्था कायम रहेगी और कितना समय रहेगी तो ऐसे मौके पर केंद्र की तरफ से कुछ फसलों के भाव में मामूली वृद्धि कर उनके जज़्बातों के साथ खेला जा रहा है।
जुबानी भरोसे बेमानी
जो सरकार अपने लिखित वादों और वचनबद्धता को लागू करने में नाकाम रही हो, उसके जुबानी भरोसे और वादे बेमानी हैं। केंद्र सरकार को कहा कि ऐसी नौटंकी करने की बजाय किसानों की चिंताओं की तरफ ध्यान देकर इनका सार्थक हल निकालने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं। मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार की तरफ से धान की पराली न जलाने वाले किसानों को धान की पराली के प्रबंधन के लिए 100 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने का एलान करने में एक बार फिर नाकाम रहने पर अफसोस जाहिर किया।
किसान हिमायती होने का सबूत दें अकाली: रंधावा
पंजाब के कैबिनेट मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा ने किसान विरोधी कृषि विधेयकों के मामले में हरसिमरत कौर बादल से पांच सवालों के जवाब मांगे हैं। रंधावा ने कहा कि हरसिमरत कौर यह बताएं कि जब केंद्रीय कैबिनेट में कृषि विधेयक पास हुए तो उन्होंने किसानों के हक में क्या स्टैंड लिया? उन्होंने कहा कि दूसरी बात यह स्पष्ट करें कि जब कैबिनेट की तरफ से अध्यादेशों को विधेयक बनाने के लिए संसद में पेश करने की मंजूरी दी तो उन्होंने क्या स्टैंड लिया?
कांग्रेसी नेता ने हरसिमरत से तीसरा सवाल पूछा कि संसद में विधेयक पेश करते समय वह अनुपस्थित क्यों रहीं? उन्होंने कहा कि हरसिमरत कौर यह भी स्पष्ट करें कि इस्तीफा उन्होंने अपनी मर्जी से दिया या किसी दबाव में, क्योंकि इस्तीफा देते समय भी वह संसद में अनुपस्थित रहीं। रंधावा ने पांचवां सवाल पूछा कि ‘हरसिमरत कौर बताएं कि क्या यह विधेयक किसान विरोधी है या नहीं।’ रंधावा ने कहा कि यदि किसी भी सवाल के जवाब में हरसिमरत कौर के पास किसानों के हक में स्टैंड लेने संबंधी कोई सबूत या दस्तावेज है तो वह किसी भी चैनल पर कांग्रेसी कार्यकर्ता के साथ बहस में बैठने की खुली चुनौती स्वीकार करें।
This is callous. They have made a mockery of the farmers’ protests over #FarmBills, which by all accounts will eventually pave the way for ending MSP system & abolish Food Corporation of India: Punjab CM Captain Amarinder Singh on the hike in MSP of wheat & 5 other Rabi crops pic.twitter.com/Xlspk6b7gG
— ANI (@ANI) September 21, 2020