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कैप्टन अमरिंदर ने दोहराया: पंजाब में किसानों का संघर्ष अनावश्यक, लोगों के लिए दिक्कतें खड़ी करना जायज नहीं

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Tue, 14 Sep 2021 09:23 PM IST

सार

मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब में निरंतर रोष प्रदर्शन से उद्योग राज्य से बाहर चले जाएंगे, जिनका अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। कैप्टन ने कहा कि पंजाब में किसानों के संघर्ष का सरकार पर प्रभाव नहीं पड़ रहा और न ही अडानियों या अंबानियों के हित प्रभावित हो रहे, बल्कि राज्य के आम लोगों और यहां की अर्थव्यवस्था पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है।
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मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह - फोटो : twitter.com/capt_amarinder
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विस्तार

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा है कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कृषि कानूनों के खिलाफ संघर्ष कर रहे किसानों ने अपने प्रदर्शनों से लोगों को पेश आ रही समस्याओं को समझने के बजाय उनके विचारों को राजनीतिक रंगत दे दी। उन्होंने कहा कि राज्य में किसानों के प्रदर्शन सरासर अनावश्यक है, क्योंकि उनकी सरकार किसानों को पहले ही निरंतर समर्थन देती आ रही है।
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कैप्टन के किसानों को पंजाब में विरोध प्रदर्शन नहीं करने संबंधी बयान की संयुक्त किसान मोर्चे द्वारा आलोचना करने पर मुख्यमंत्री ने दुख जाहिर किया। उन्होंने कहा कि इस मामले पर उनकी सरकार की स्पष्ट हिमायत के बावजूद किसानों ने उनकी अपील के गलत अर्थ निकाले हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि पंजाब और हरियाणा के किसानों में विभाजन कराने का सवाल ही पैदा नहीं होता। ये सभी किसान, केंद्र और पड़ोसी राज्य में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार के बुरे व्यवहार से एक ही तरह से पीड़ित हैं। 


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मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब में निरंतर रोष प्रदर्शन से उद्योग राज्य से बाहर चले जाएंगे, जिनका अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि एफसीआई अडाणी साइलो मोगा और एफसीआई साइलो कोटकपूरा से गेहूं के भंडार की निकासी किसानों के संघर्ष के कारण रुकी हुई है, जबकि एफसीआई द्वारा अडानी साइलो मोगा से 1,60,855 टन गेहूं के भंडार की निकासी जरूरी है। इन भंडारों के खराब होने से सरकारी खजाने को नुकसान हो सकता है। मोगा अडानी साइलो में रखे भंडारों की कीमत लगभग 480 करोड़ रुपये है।

किसानों की लड़ाई भाजपा के खिलाफ : कैप्टन
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों की लड़ाई भाजपा के खिलाफ है, जो पंजाब और अन्य राज्यों में किसान विरोधी कानून थोपने के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार है। इन हालात में पंजाब के लोगों के लिए कठिनाइयां पैदा करना जायज नहीं है। पंजाब में किसानों के संघर्ष का पंजाब सरकार पर प्रभाव नहीं पड़ रहा और पंजाब में अडानियों या अंबानियों के हित प्रभावित नहीं हो रहे, बल्कि राज्य के आम लोगों और यहां की अर्थव्यवस्था पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। पंजाब में अडानियों के कुल संपत्ति केवल 0.8 प्रतिशत है, जबकि रिलायंस ग्रुप की मौजूदगी सिर्फ 0.1 प्रतिशत बनती है।

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