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पंजाब सरकार झुकी, सीएम कैप्टन बोले- धीरे धीरे सारे किसानों का होगा कर्ज माफ
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 21 Jan 2018 09:32 AM IST
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Captain Amarinder's Farmer rally in Mansa
- फोटो : File Photo
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किसानों के लिए कर्ज माफी योजना लागू करने के बाद भी विपक्षी दलों और किसान संगठनों की आलोचना झेल रही पंजाब सरकार के रवैये में नरमी आई है। सूबे मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कृषि कर्ज पूरी तरह माफ करने के लिए किसानों से और समय की मांग करते हुए कहा है कि उनकी सरकार इस समय सूबे की आर्थिकता को पैरों पर खड़ा करने में जुटी है ताकि समाज के सभी तबकों को दोबारा विकास और तरक्की की ओर लाया जा सके।
शनिवार को जारी बयान में मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार इस समय भारी मुश्किलों का सामना कर रहे छोटे और सीमांत किसानों की मदद करने को तरजीह दे रही है। उन्होंने कहा कि जब सूबे की आर्थिकता स्थिर होनी शुरू हो जाएगी तो धीरे-धीरे सारे किसानों को कर्ज माफी स्कीम के दायरे में लाया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि सूबे की वित्तीय स्थिति सुधर जाने पर खेत मजदूरों के हितों पर भी ध्यान दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने सूबे के किसानों को संघर्ष का रास्ता त्यागने की अपील करते हुए कहा है कि मौजूदा परिस्थितियों के अनुसार उनकी सरकार किसानों के सारे कर्ज माफ करने का बोझ नहीं उठा सकती लेकिन किसानों की समस्याओं का जल्द से जल्द हल निकालने के लिए सरकार पूरी तरह वचनबद्ध है। संघर्ष के रास्ते पर चल रहे किसानों को सरकार के प्रयत्नों की प्रशंसा करने की अपील करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सूबा सरकार की ओर से गहरे आर्थिक संकट का सामना किए जाने के बावजूद पंजाब के किसानों को दूसरे राज्यों से अधिक कर्ज राहत दी है।
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कैप्टन ने उदाहरण देते हुए कहा कि महाराष्ट्र ने किसानों का डेढ़ लाख रुपये तक का कर्ज माफ किया है। इसी तरह यूपी ने एक लाख रुपये तक, राजस्थान ने 50 हजार रुपये तक, मध्य प्रदेश ने एक लाख रुपये तक और कर्नाटक ने 50 हजार रुपये तक का कर्ज माफ करने का एलान किया है जबकि पंजाब सरकार ने कांग्रेस पार्टी द्वारा किसान समुदाय से किए वादे को पूरा करने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी है।
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शनिवार को जारी बयान में मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार इस समय भारी मुश्किलों का सामना कर रहे छोटे और सीमांत किसानों की मदद करने को तरजीह दे रही है। उन्होंने कहा कि जब सूबे की आर्थिकता स्थिर होनी शुरू हो जाएगी तो धीरे-धीरे सारे किसानों को कर्ज माफी स्कीम के दायरे में लाया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि सूबे की वित्तीय स्थिति सुधर जाने पर खेत मजदूरों के हितों पर भी ध्यान दिया जाएगा।
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मुख्यमंत्री ने सूबे के किसानों को संघर्ष का रास्ता त्यागने की अपील करते हुए कहा है कि मौजूदा परिस्थितियों के अनुसार उनकी सरकार किसानों के सारे कर्ज माफ करने का बोझ नहीं उठा सकती लेकिन किसानों की समस्याओं का जल्द से जल्द हल निकालने के लिए सरकार पूरी तरह वचनबद्ध है। संघर्ष के रास्ते पर चल रहे किसानों को सरकार के प्रयत्नों की प्रशंसा करने की अपील करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सूबा सरकार की ओर से गहरे आर्थिक संकट का सामना किए जाने के बावजूद पंजाब के किसानों को दूसरे राज्यों से अधिक कर्ज राहत दी है।
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कैप्टन ने उदाहरण देते हुए कहा कि महाराष्ट्र ने किसानों का डेढ़ लाख रुपये तक का कर्ज माफ किया है। इसी तरह यूपी ने एक लाख रुपये तक, राजस्थान ने 50 हजार रुपये तक, मध्य प्रदेश ने एक लाख रुपये तक और कर्नाटक ने 50 हजार रुपये तक का कर्ज माफ करने का एलान किया है जबकि पंजाब सरकार ने कांग्रेस पार्टी द्वारा किसान समुदाय से किए वादे को पूरा करने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी है।
सरकार ने जैसे-तैसे 2700 करोड़ रुपये का प्रबंध किया : सीएम
Captain Amarinder's Farmer rally in Mansa
- फोटो : File Photo
मुख्यमंत्री ने किसानों को विरोधी पार्टियों और कुछ किसान यूनियनों के जरिए गुमराह किए जाने से बचने की अपील करते हुए कहा कि यह पार्टियां और कुछ किसान यूनियनें अपने सियासी हित साधने के लिए किसानों की कर्जा माफी के मुद्दे पर दुष्प्रचार कर रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार को अकालियों की ओर से खाली खजाने विरासत में मिली थी और दूसरी तरफ केंद्र सरकार ने भी किसानों की मदद से हाथ खींच लिए, जिस कारण इन परिस्थितियों में कर्ज माफी की स्कीम में और किसानों को शामिल करने या दो लाख रुपये से अधिक रकम का कर्ज माफ करना संभव नहीं है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि जब उन्होंने वर्ष 2007 में मुख्यमंत्री पद छोड़ा था तो उस समय सरकारी खजाने पर 46 हजार करोड़ रुपये का कर्ज था और अब जब साल 2017 में उन्होंने अकाली-भाजपा सरकार से शासन हाथ में लिया तो उनकी सरकार दो लाख करोड़ रुपये के कर्ज तले दबी थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यही कारण है कि किसानों का कर्जा एक बार में ही माफ करने के लिए आर्थिक हालात उनकी सरकार की राह में रोड़ा बन गए।
सरकार ने जैसे-तैसे 2700 करोड़ रुपये का प्रबंध किया : सीएम
मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके बावजूद भी उनकी सरकार द्वारा अपने पहले बजट में कर्जा माफी स्कीम के तहत 10.25 लाख किसानों को शामिल किया जाना है और पहले चरण में 5.63 लाख किसानों को इसका लाभ होना है। उन्होंने कहा कि इस चरण के लिए उनकी सरकार ने जैसे-तैसे 2700 करोड़ रुपये का प्रबंध किया है।
उन्होंने कहा कि बदकिस्मती से उनकी सरकार मौजूदा हालात में और फंड जुटाने की स्थिति में नहीं है, जिस कारण पूरे कर्ज माफ करने की किसानों की मांग नहीं मानी जा सकती। मुख्यमंत्री ने कहा कि सूबे में 17.5 लाख किसान परिवारों में से सिर्फ बड़े जमींदार ही अब तक कर्ज माफी स्कीम से बाहर हैं और वह अपने स्तर पर ही अपना प्रबंध करने में पूरी तरह समर्थ हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार को अकालियों की ओर से खाली खजाने विरासत में मिली थी और दूसरी तरफ केंद्र सरकार ने भी किसानों की मदद से हाथ खींच लिए, जिस कारण इन परिस्थितियों में कर्ज माफी की स्कीम में और किसानों को शामिल करने या दो लाख रुपये से अधिक रकम का कर्ज माफ करना संभव नहीं है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि जब उन्होंने वर्ष 2007 में मुख्यमंत्री पद छोड़ा था तो उस समय सरकारी खजाने पर 46 हजार करोड़ रुपये का कर्ज था और अब जब साल 2017 में उन्होंने अकाली-भाजपा सरकार से शासन हाथ में लिया तो उनकी सरकार दो लाख करोड़ रुपये के कर्ज तले दबी थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यही कारण है कि किसानों का कर्जा एक बार में ही माफ करने के लिए आर्थिक हालात उनकी सरकार की राह में रोड़ा बन गए।
सरकार ने जैसे-तैसे 2700 करोड़ रुपये का प्रबंध किया : सीएम
मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके बावजूद भी उनकी सरकार द्वारा अपने पहले बजट में कर्जा माफी स्कीम के तहत 10.25 लाख किसानों को शामिल किया जाना है और पहले चरण में 5.63 लाख किसानों को इसका लाभ होना है। उन्होंने कहा कि इस चरण के लिए उनकी सरकार ने जैसे-तैसे 2700 करोड़ रुपये का प्रबंध किया है।
उन्होंने कहा कि बदकिस्मती से उनकी सरकार मौजूदा हालात में और फंड जुटाने की स्थिति में नहीं है, जिस कारण पूरे कर्ज माफ करने की किसानों की मांग नहीं मानी जा सकती। मुख्यमंत्री ने कहा कि सूबे में 17.5 लाख किसान परिवारों में से सिर्फ बड़े जमींदार ही अब तक कर्ज माफी स्कीम से बाहर हैं और वह अपने स्तर पर ही अपना प्रबंध करने में पूरी तरह समर्थ हैं।