अमरिंदर सिंह की अपील- किसानों की शंकाओं को दूर कर आंदोलन के मसले को जल्द हल करे केंद्र
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि आंदोलनकारी किसानों की शंकाओं को दूर करते हुए केंद्र सरकार मौजूदा किसान आंदोलन का मसला जल्द हल करे। कैप्टन ने पंजाब के बकाया जीएसटी के भुगतान और कोविड वैक्सीन संबंधी प्राथमिकताएं तय करने के लिए राज्यों से परामर्श की भी अपील की।
मुख्यमंत्री ने नीति आयोग की वर्चुअल मीटिंग में पेश किए अपने भाषण में राज्य सरकार का यह रुख दोहराया कि कृषि राज्यों का विषय है और इस संबंध में कोई भी कानून बनाने का अधिकार संविधान में दर्ज सहकारी संघवाद की सच्ची भावना के अनुसार राज्यों पर छोड़ देना चाहिए।
कैप्टन सेहत ठीक न होने के कारण नीति आयोग की बैठक में हिस्सा नहीं ले सके। अपने लिखित भाषण में मुख्यमंत्री ने कहा कि एक ऐसा सुधार जो ऐसे क्षेत्र में लागू किया जाना हो, जिसका संबंध देश के कामगारों के 60 प्रतिशत हिस्से से हो, उसे सभी संबंधित पक्षों के साथ विस्तृत बातचीत के जरिये ही पूरा किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पंजाब इसमें अहम पक्ष है और देश की खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित बनाने में हमेशा अग्रणी भूमिका निभाता रहा है। राज्य के किसानों की यह आशंका है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य की व्यवस्था खत्म कर दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने जोर दिया कि राज्य के किसानों में विश्वास पैदा करने और शंकाओं को दूर करने के लिए भारत सरकार कदम उठाए।
कैप्टन ने दोहराई पंजाब की मांगें
- पराली प्रबंधन मुआवजे के तौर पर खरीदे गए धान पर प्रति क्विंटल 100 रुपये का बोनस दिया जाए।
- राज्य को वायबिलिटी गैप फंड (वीजीएफ) के तौर पर बायो मास बिजली प्रोजेक्टों के लिए वित्तीय सहायता के तौर पर प्रति मेगावाट पांच करोड़ रुपये और बायो मास सोलर हाइब्रिड प्रोजेक्टों के लिए प्रति मेगावाट 3.5 करोड़ रुपये दिए जाएं।
- ऐसी एजेंसियां नामित की जाएं जो गेहूं और धान से होने वाली आय से मेल खाती एमएसपी पर खरीद करें, ताकि किसानों को वैकल्पिक फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहन मिल सके।
- न्यूटरी /सिरियल, दाल, बागबानी, मछली पालन और पशुपालन जैसे क्षेत्रों को अपनाने के लिए राज्य सरकार की स्कीमों में केंद्र सरकार खुले दिल से वित्तीय मदद करे।
- मक्का के लिए कम कीमत समर्थन का एलान किया जाए, ताकि किसानों को अधिक पानी की लागत वाली धान की फसलों के चक्र से निकलने में मदद मिल सके।