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Punjab: भगवंत मान बोले- अगले सीजन तक रोक लेंगे पराली जलाने की घटनाएं, यह पूरे उत्तर भारत की समस्या
Fri, 04 Nov 2022 09:34 PM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Fri, 04 Nov 2022 09:34 PM IST
सार
भगवंत मान ने कहा कि देश इस बात पर गर्व महसूस करता है कि धान की बंपर फसल हुई है लेकिन हम भूल जाते हैं कि इससे धान की पराली का भी उत्पादन बढ़ा है। पंजाब में किसान 75 लाख हेक्टेयर जमीन पर धान की खेती करते हैं, जिसमें से 40 लाख हेक्टेयर जमीन पर पराली जला दी जाती है।
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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान।
- फोटो : फाइल
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विस्तार
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा है कि पंजाब को पराली जलाने की समस्या से मुक्त करने के लिए राज्य सरकार कोई कसर नहीं छोड़ेगी। अगले साल तक पराली जलने की घटनाएं रोक ली जाएंगी। शुक्रवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के साथ एक संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार एक बहुआयामी रणनीति पर काम कर रही है।
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राज्य सरकार पराली के प्रबंधन के लिए 1.20 लाख मशीनें किसानों को दे चुकी है। यह पूरे उत्तर भारत की समस्या है। सभी प्रभावित राज्यों में इसके संयुक्त समाधान के लिए केंद्र सरकार को हस्तक्षेप करना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों को फसल विविधीकरण अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार को किसानों को इन फसलों के लिए लाभकारी एमएसपी देना चाहिए। इससे किसानों को वैकल्पिक फसलों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने और इस समस्या को हल करने में मदद मिलेगी।
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मुख्यमंत्री मान ने कहा कि धान की कटाई और गेहूं की बुवाई के बीच किसानों को 10-12 दिन का समय मिलता है। किसी व्यवहारिक विकल्प के अभाव में किसान समस्या के समाधान के लिए माचिस की तीली पर निर्भर हैं। अगर केंद्र इसका समाधान करता है तो किसान धान के पराली को कभी नहीं जलाएंगे।
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हजारों पंचायतों द्वारा धान की पराली न जलाने का प्रस्ताव पारित करने के बाद राज्य सरकार पहले ही किसानों को प्रोत्साहित कर चुकी है। उन्होंने धान की पराली न जलाने के बदले किसानों को संयुक्त रूप से 2500 रुपये की आर्थिक सहायता देने की पेशकश कर पराली जलाने का विस्तृत समाधान प्रस्तुत किया था लेकिन केंद्र ने किसानों को राहत देने से साफ इन्कार कर दिया। धान की पराली के प्रबंधन के लिए बड़ी संख्या में निवेशक राज्य में आना चाहते हैं। वह बायोगैस संयंत्र स्थापित करना चाहते हैं। केंद्र को उनके पास लंबित ऐसी परियोजनाओं को तुरंत मंजूरी देनी चाहिए।
धान की बंपर फसल तो पराली का उत्पादन भी बढ़ा
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश इस बात पर गर्व महसूस करता है कि धान की बंपर फसल हुई है लेकिन हम भूल जाते हैं कि इससे धान की पराली का भी उत्पादन बढ़ा है। पंजाब में किसान 75 लाख हेक्टेयर जमीन पर धान की खेती करते हैं, जिसमें से 40 लाख हेक्टेयर जमीन पर पराली जला दी जाती है। शेष किसान कभी भी ऐसी प्रथा में लिप्त नहीं होते हैं, जिससे पर्यावरण प्रदूषित होता है। राज्य सरकार ने संगरूर में बायो गैस उत्पादन का एक प्लांट स्थापित किया है और राज्य भर में इस तरह के और प्लांट लगाए जाएंगे।