केंद्रीय कानूनों से लड़ने के लिए राज्य के कानूनों में करेंगे संशोधन: कैप्टन अमरिंदर सिंह
- कहा- कानूनी विशेषज्ञों से सलाह के बाद राज्य सरकार बुलाएगी विधानसभा का विशेष सत्र
- कृषि कानूनों के संबंध में चंडीगढ़ में आंदोलनरत किसानों की 31 यूनियनों के नेताओं से रूबरू हुए कैप्टन
- दिया आश्वासन, किसानों की लड़ाई कई मोर्चों पर लड़ी जाएगी, सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती भी उसमें शामिल
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
31 किसान जत्थेबंदियों के नुमाइंदों से मुलाकात के दौरान पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य के संघीय और संविधानिक अधिकारों पर केंद्र सरकार के हमले का मुकाबला करने और किसानों के हितों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगी। केंद्र सरकार के कृषि कानूनों पर कैप्टन ने किसान प्रतिनिधियों को आश्वासन दिया कि यदि कानूनी विशेषज्ञ केंद्रीय कानूनों से लड़ने के लिए राज्य के कानूनों में संशोधन की सलाह देते हैं तो विधानसभा का एक विशेष सत्र बुलाया जाएगा।
पंजाब भवन में मुख्यमंत्री ने 31 किसान जत्थेबंदियों के नुमाइंदों के साथ बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि वह आज अपनी कानूनी विशेषज्ञों की टीम के साथ कृषि कानूनों पर गंभीरता से विचार करेंगे। इसके बाद आगामी कदमों को अंतिम रूप देंगे, जिनमें कृषि कानूनों को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देना भी शामिल होगा। उन्होंने कहा कि किसानों की यह लड़ाई कई मोर्चों पर लड़ी जाएगी।
सभी पंचायतें कृषि कानूनों के खिलाफ पास करें प्रस्ताव
कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव हरीश रावत द्वारा कृषि कानूनों के विषय में किए गए एलान के मुताबिक हस्ताक्षर मुहिम के अलावा राज्य की सभी पंचायतों से आग्रह किया जाएगा कि वे कृषि कानूनों के खिलाफ प्रस्ताव पास करें। उनको केंद्र सरकार के पास भेजा जाएगा। बैठक में कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत भी मौजूद रहे।
प्रधानमंत्री ने नहीं दिया पत्रों का जवाब
मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने विधेयक के पास होने से पहले ही प्रधानमंत्री को तीन बार पत्र लिखकर उनसे अपील की कि कृषि संशोधनों पर आगे न बढ़ा जाए, क्योंकि इससे समूचे मुल्क में बहुत सी समस्याएं पैदा होंगी। लेकिन प्रधानमंत्री ने कोई जवाब नहीं दिया। अमरिंदर ने कहा कि कोविड के कठिन समय के दौरान पराली जलाने को रोकने के लिए बोनस देने संबंधी उनकी विनती को केंद्र ने नहीं सुना। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा अपने स्तर पर किसानों की रक्षा करने संबंधी भरोसा नहीं किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि पिछले आठ महीने में केंद्र सरकार से जीएसटी का मुआवजा भी नहीं मिला है।
कानूनी प्रतिनिधियों से मांगे सुझाव
मुख्यमंत्री ने मंगलवार शाम को वरिष्ठ अधिकारियों की उच्च स्तरीय बैठक की। उन्होंने कृषि कानूनों के खिलाफ किसान यूनियनों के कानूनी प्रतिनिधियों और वकीलों से सुझाव मांगे हैं। उन्होंने एडवोकेट जनरल अतुल नंदा को निर्देश दिए हैं कि ऐसे सभी सुझाव एकत्र कर विचार विमर्श किया जाए। सुझाव लेने के लिए एडवोकेट जनरल की विशेष ई-मेल भी बनाई गई है। कांग्रेस प्रभारी हरीश रावत और पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रधान सुनील जाखड़ शामिल थे।
हमने पंजाब के मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान पंजाब और यहां के किसानों की रक्षा के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है। जिसमें प्रांतीय कानून पास किया जाए, जिससे किसानों के हितों की रक्षा हो सके। - बलबीर सिंह राजेवाल, प्रधान, भारतीय किसान यूनियन, राजेवाल
कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी के निर्देश पर कानून के जानकारों से साथ विचार विमर्श कर केंद्र के कानून से लड़ने की तैयारी की जाएगी। - डॉ. दर्शन पाल, प्रमुख, क्रांतिकारी किसान यूनियन, पंजाब