तस्वीरों में देखें पंजाब बंद, बाजारों में सन्नाटा, सड़कों पर अन्नदाता, चप्पे-चप्पे पर दिखी पुलिस
कृषि विधेयकों के विरोध में किसान संगठनों द्वारा दी गई पंजाब बंद की कॉल का असर पूरे प्रदेश में देखने को मिला। कई शहरों में बाजार और चौक-चौराहे बिल्कुल सुनसान दिखे। बसों के पहिए थमे रहे। रेलवे स्टेशनों पर सन्नाटा पसरा रहा। प्रदेश के विभिन्न जगहों में रेलवे ट्रैक और सड़कों पर किसान-मजदूर और विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता डटे रहे। प्रदेश भर में बंद का असर देखने को मिला है।
अमृतसर: बसों का पहिया जाम, रेलवे स्टेशन पर छाया सन्नाटा, चप्पे-चप्पे पर दिखी पुलिस
कृषि विधेयकों के विरोध में किसान-मजदूर संगठनों द्वारा दी गई पंजाब बंद की कॉल का गुरुनगरी में पूरा असर दिखा। गुरुनगरी की जीवन रेखा हॉल गेट, लारेंस रोड सहित ड्राई फ्रूट और करियाना मार्केट पूर्णतया बंद रही। बसों का पहिया जाम रहा।
रेलवे द्वारा 24 से 26 सितंबर तक अमृतसर से चलने वाली सभी गाड़ियों को रद्द करने से रेलवे स्टेशन पर सन्नाटा छाया रहा। बंद के दौरान किसी भी संभावित घटना को रोकने के लिए शहर के चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात थी।
कस्बा जंडियाला गुरु के गांव देवीदासपुर के रेल ट्रैक पर दूसरे दिन भी सैकड़ों किसान-मजदूर डटे रहे। ट्रैक पर शामियाना लगा कर बैठे इन किसानों-मजदूरों के लिए संत बाबा कश्मीर सिंह भूरीवालों ने लंगर की सेवा की। यह धरना 26 सितंबर तक जारी रहेगा। किसानों के अनुसार, उसके बाद नए संघर्ष की घोषणा की जाएगी।
शिअद (बादल) के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया सहित कई शिअद विधायकों ने अपने-अपने हलके में प्रदर्शन किया। इनमें अमृतसर के सभी बादल समर्थक एसजीपीसी सदस्यों ने भी हिस्सा लिया। सीमावर्ती कस्बे अटारी, लोपोके, चुगावा, अजनाला और राजासांसी में अकाली कार्यकर्ता मोदी सरकार के खिलाफ खूब गरजे।
शहरी हलकों में साउथ विधानसभा के इंचार्ज तलबीर सिंह गिल ने गोल्डन गेट ने नजदीक प्रदर्शन किया। जिला अध्यक्ष गुरुप्रताप सिंह टिक्का ने पुतलीघर चौक पर मोदी का पुतला फूंका। इस दौरान अकाली नेता मास्क बांधे हुए थे, लेकिन सामाजिक दूरी का ध्यान नहीं रखा गया था। कांग्रेस के विधायक डॉ. राज कुमार ने अपने समर्थकों के साथ इंडिया गेट के नजदीक मोदी का पुतला फूंक कर प्रदर्शन किया। वहीं किसानों के प्रदर्शन में शामिल होने आए कई किसानों ने अपने ट्रैक्टर के बोनट पर मोदी का पुतला बांधा हुआ था।
श्री हरमंदिर साहिब में कम रही श्रद्धालुओं की संख्या
किसान संगठनों की पंजाब बंद की कॉल का प्रभाव श्री हरमंदिर साहिब में भी देखने को मिला। दरबार साहिब में शुक्रवार को श्रद्धालुओं की संख्या बहुत कम थी। आवाजाही के सभी मार्ग बंद होने के कारण श्रद्धालु सचखंड नहीं पहुंच सके। वहीं जहां शहर की सभी मार्केट और दुकानें बंद थीं, वहीं सचखंड की तरफ जाने वाले विरासती मार्ग के आसपास स्थित दुकानें खुलीं रहीं।
लुधियाना: राजमार्गों पर चक्काजाम, शहर में मुख्य बाजार खुले
कृषि विधेयकों के खिलाफ शुक्रवार को बंद को लेकर किसान यूनियन व राजनीतिक पार्टियां ने दिन भर चक्का जाम रखा। अगर लुधियाना की बात करे तो शहरी एरिया में बंद का कोई खास असर देखने को नहीं मिला। दिन भर शहरी इलाकों के मुख्य बाजार खुले रहे। कुछ दुकानें बंद भी रहीं। ग्रामीण इलाकों में बंद पूरी तरह से सफल रहा। लुधियाना शहर गुजरने वाले हर स्टेट हाईवे और नेशनल हाईवे पर यातायात पूरी तरह से ठप रहा। किसान यूनियनों ने हाईवे को सुबह से जाम कर दिया था।

केंद्र सरकार के कृषि विधेयकों के खिलाफ प्रदेश की 31 किसान यूनियन लामबंद हो चुकी हैं। सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी सहित अकाली दल, आम आदमी पार्टी भी विधेयकों के खिलाफ मैदान में उतर चुकी है। शुक्रवार को बंद का एलान किया गया था। शुक्रवार सुबह से ही किसान यूनियन के नेताओं ने मेन रोड पर चक्का जाम करना शुरू कर दिया। हाईवे पर ट्रैक्टर लगाकर किसी वाहन को गुजरने नहीं दिया गया। लाडोवाल टोल प्लाजा, फिरोजपुर रोड, गिल रोड, चंडीगढ़ रोड, दिल्ली रोड पर किसान यूनियन ने ट्रैफिक व्यवस्था को ठप कर दिया।
प्रदेश में 5 हजार करोड़ का कारोबार रहा ठप: जिंदल
फेडरेशन ऑफ पंजाब स्माल इंडस्ट्रीज एसोसिएशंस के प्रधान बदीश जिंदल ने बताया कि हर रोज पंजाब में लगभग पांच हजार करोड़ का कारोबार होता है। शुक्रवार के बंद के कारण सब कुछ लगभग ठप ही रहा है। बंद के चलते बैंकिंग कारोबार भी नहीं सका है। लुधियाना में हर रोज 1200 करोड़ का ट्रांजेक्शन होता है। कोविड 19 के चलते इंडस्ट्री पूरी तरह से प्रभावित हो चुकी है। अब ऐसे बंद हमारे ऊपर एक और बोझ डाल रहे है। पंजाब सरकार को चाहिए कि इंडस्ट्री को बचाने के लिए ऐसे बंद से दूर रखना चाहिए।
बंद होजरी कारोबार की हालत पतली करेंगे: थापर
निटवेयर क्लब लुधियाना के चेयरमैन विनोद थापर बताते हैं कि कोरोना के कारण होजरी का कारोबार पहले ही 45 फीसदी रह गया है। अब कृषि विधेयक को लेकर ऐसे बंद इंडस्ट्री की आर्थिक हालत को और पतला करेंगे। हमें तो डर है कि अगर यह बंद कहीं लंबा चला तो इंडस्ट्री को तबाह होने से फिर कोई नहीं बचा सकता है। लुधियाना होजरी का गढ़ है, पहले ही हमें सरकार ने अन्य इंडस्ट्री के मुकाबले एक माह लेट खोलने के आदेश दिए थे। सर्दी के उत्पादों को तैयार करने का काम 50 फीसदी रह गया है। अब होजरी कारोबार थोड़ा रफ्तार लेने लगा है कि ऐसे बंद उसकी रफ्तार को ब्रेक लगा रहे है।
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पटियाला में कृषि विधेयकों को लेकर किसानों में उबाल
पटियाला में शुक्रवार को कृषि विधेयकों के विरोध में किए बंद के आह्वान का व्यापक असर देखने को मिला। सभी बाजार व दुकानें बंद रहीं। उधर, केंद्र सरकार के खिलाफ किसानों का गुस्सा भी चरम पर रहा। नाभा में भारतीय किसान यूनियन एकता (उगराहां) के बैनर तले किसानों ने बौडां गेट पुल नीचे शुक्रवार को दूसरे दिन भी रेलवे ट्रैक पर बैठकर प्रदर्शन किया। इस दौरान पंजाबी कलाकार हरभजन मान, रणजीत बावा, तरसमे जस्सड़, हरजीत हरमन आदि भी किसानों के समर्थन को पहुंचे।
किसान नेता जोगिंदर सिंह उगराहां, करनैल सिंह लंग, जसविंदर सिंह सोमा ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए कृषि विधेयक किसानों व मजदूरों को तबाह कर देंगे। वहीं किसान जत्थेबंदियों ने पातड़ां में न्याल बाईपास चौक, समाना में गाजेवास गांव के नजदीक भवानीगढ़ रोड और पटियाला-सरहिंद रोड पर गांव फग्गनमाजरा नजदीक सड़क पर जाम लगाकर प्रदर्शन किया। मुलाजिमों, मजदूरों ने बाजारों से रोष मार्च भी निकाला।
पटियाला: किसानों के समर्थन में आए बिजली मुलाजिम
किसान हमारे भाई हैं, इसलिए किसी भी कीमत पर इन खेती कानूनों को लागू नहीं होने दिया जाएगा क्योंकि अगर काले कानून आ गए, तो किसान व खेती सेक्टर पूरी तरह से बर्बाद हो जाएगा। यह कहना था विभिन्न बिजली मुलाजिम जत्थेबंदियों के नुमाइंदों का। पीएसईबी इंप्लाइज ज्वाइंट फोरम के बैनर तले शुक्रवार को विभिन्न बिजली मुलाजिम जत्थेबंदियों ने किसानों के समर्थन में प्रदेश भर में बिजली निगमों के उप मंडल व मंडल दफ्तरों के आगे रोष रैलियां कीं। पटियाला में भी बिजली मुलाजिमों ने प्रदर्शन किया।
ज्वाइंट फोरम के प्रदेश स्तर के नेताओं कर्मचंद भारद्वाज, कुलदीप सिंह खन्ना, जगरूप सिंह महिमदपुर, हरपाल सिंह ने कहा कि इन विधेयकों से गांवों के विकास रुक जाएंगे। इसलिए किसानों के समर्थन में सभी मजदूरों व मुलाजिम जत्थेबंदियों को आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि बिजली संशोधन बिल 2020 के लागू होने से भी पंजाब के किसानों को मिलती मुफ्त बिजली की सुविधा छीन ली जाएगी। इसलिए वह इस बिल का भी विरोध करते हैं।
राजपुरा : बंद के समर्थन में धरने पर बैठे किसान
पंजाब बंद की कॉल पर राजपुरा पूरी तरह से बंद रहा। किसान जत्थेबंदियों ने शम्भू बार्डर पर टोल बैरियर के नजदीक और राजपुरा अमृतसर नेशनल हाईवे पर सरहिंद बाईपास के नजदीक धरना देकर मोदी सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

प्रदर्शन के मौके पर कांग्रेस विधायक राजपुरा हरदियाल सिंह कम्बोज, जिला कांग्रेस प्रधान जिला यूथ प्रधान निर्भय सिंह मिल्टी, उप प्रधान गगनदीप सिंह जलालपुर सहित अन्य कई कांग्रेसी नेताओं ने किसानों के हक में खड़े होने का वादा किया वहीं आम आदमी पार्टी की पंजाब कोषाध्यक्ष नीना मित्तल, सीनियर नेता आशुतोष जोशी, दिनेश मेहता, बंत सिंह ने किसानों को समर्थन देने का भरोसा दिलाया।
वहीं अकाली दल बादल की ओर से गगन चौक पर धरना दिया गया। इसमें जत्थेदार सुरजीत सिंह गढ़ी, अकाली दल व्यापार विंग पंजाब के महासचिव महिंदर पप्पू, शहरी अकालीदल सर्कल प्रधान रणजीत राणा, महासचिव जसविन्द्र जैलदार समेत सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने मोदी सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
पंजाब बंद के कारण जरूरी चीजों की सप्लाई प्रभावित, लोग परेशान
खेती विधेयकों के विरोध में पंजाब बंद के कारण सूबे में जरूरी चीजों की सप्लाई पूरी तरह प्रभावित हुई। सब्जी और फल मार्केट बंद होने के कारण बाहर से कोई सप्लाई नहीं हो सकी। दोधी यूनियन की तरफ से भी बंद का समर्थन करते हुए काम बंद रखा गया, जिस कारण दूध की सप्लाई भी प्रभावित हुई, जबकि हाईवे जाम होने के कारण बाहर से भी दूध नहीं पहुंचा।
अबोहर: अकालियों ने दिया बाईपास पर धरना
मलोट रोड बाईपास पर शुक्रवार को अकाली दल बादल ने कृषि अध्यादेशों के खिलाफ धरना दिया। हल्का बल्लूआना के पूर्व विधायक प्रकाश सिंह भट्टी ने कहा कि पूरे देश के लोगों का पेट भरने की क्षमता रखने वाले पंजाब के किसानों का अस्तित्व खतरे में है। अध्यादेशों के विरोध में सांसद हरसिमरत कौर बादल केंद्रीय मंत्री पद से त्यागपत्र देकर किसानों की लड़ाई में शामिल हुई हैं।

भट्टी ने कहा कि केंद्र सरकार का दावा है कि अब किसान अपनी उपज को खेत-खलिहान या देश के किसी भी शहर में बेच सकेगा। लेकिन ऐसा करके सरकार मंडी की व्यवस्था को खत्म कर रही है। बड़ा व्यापारी वर्ग किसानों को दोनों हाथों लूटने के लिए स्वतंत्र होगा। उन्होंने कहा केंद्र सरकार मोदी का यह कदम देश को फिर से गुलामी की ओर धकेलना वाला साबित होगा।
किसान संगठनों ने किया चक्का जाम, बंद रहे बाजार
कृषि विधेयकों के खिलाफ शुक्रवार को भारत बंद का शहर में पूरा असर देखने को मिला, जिसके चलते शहर के सभी प्रतिष्ठान पूर्ण रूप से बंद रहे। सभी वर्गों ने अपनी-अपनी दुकानें व कारोबार बंद रख किसानों के हक में आवाज बुलंद की। शहर में केवल पेट्रोल पंप, शराब के ठेके व बैंक और सरकारी कार्यालय ही खुले रहे, जबकि अन्य सभी प्रकार के प्रतिष्ठान पूर्ण रूप से बंद रहे। इधर कृषि विधेयकों का विरोध करने वाले किसान संगठनों ने शहर के चारों ओर मुख्य मार्गों पर धरना लगाया। जिससे वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
मोगा में सूना पड़ा बाजार।
हनुमानगढ़ रोड राजपुरा के पास लगाए धरने में भारतीय किसान यूनियन लक्खोवाल के प्रधान सुभाष गोदारा, भारतीय किसान एकता उगराहां के विनोद डूडी तथा भाकियू सिद्धपुर के प्रगट सिंह ने कृषि विधेयकों को किसान विरोधी बताते हुए इसे तुरंत रद्द करने की मांग की। इस मौके पर किसान नेताओं ने मोदी सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। सुबह 11 से दोपहर 2 बजे तक चले इस धरने में सड़क पर दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं।
किसान जत्थेबंदियों के समर्थन में मोगा बंद
पंजाब बंद के समर्थन में हजारों की संख्या में किसानों समेत राजनीतिक पार्टियों के कार्यकर्ताओं ने नेशनल हाईवे समेत प्रमुख चौराहों पर धरने लगाकर रोष प्रदर्शन किया। मुख्य जोगिंदर सिंह चौक में पैरा मेडिकल स्टाफ समेत विभिन्न किसान जत्थेबंदियों के लोग धरने पर बैठे, वहीं नेशनल हाईवे पर विंडसर पैलेस के पास पूर्व मेयर अक्षित जैन और जत्थेदार तोता सिंह के बेटे बरजिंदर सिंह बराड़ के नेतृत्व में धरना लगाया गया।
डगरू रेलवे फाटक पर विधायक डॉ. हरजोत कमल अपने कार्यकर्ताओं के साथ धरने पर डटे रहे। शहर के प्रमुख प्रवेश द्वार बुघीपुरा चौक, लोहारा चौक समेत कई जगहों पर करीब 31 किसान जत्थेबंदियो ने प्रदर्शन किया। इस दौरान पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कड़े प्रबंध कर रखे थे।
मुकम्मल बंद रहा बटाला
कृषि विधेयकों के विरोध में पंजाब बंद के आह्वान पर शुक्रवार को बटाला पूरी तरह बंद रहा। दुकानदारों ने अपनी दुकानों को बंद करके किसानों का साथ दिया। शुक्रवार को किसान संगठनों और उनके समर्थन में आए अन्य संगठनों ने जीटी रोड पर गांधी चौक पर टेंट लगाकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी किसानों के लिए लंगर की व्यवस्था भी की गई थी। किसानों का कहना था कि अगर मोदी सरकार इस विधेयकों को रद्द नहीं करती तो आने वाले दिनों में किसानों का प्रदर्शन उग्र होगा और वह दिल्ली की तरफ कूच करना शुरू कर देंगे।

संगरूर: किसान संगठनों के साथ सड़कों पर उतरे मजदूर, आढ़ती, व्यापारी
कृषि विधेयकों के खिलाफ किसान संगठनों के पंजाब बंद के आह्वान का संगरूर में पूरा असर दिखा। कारोबार बंद रखकर सभी वर्गों ने इस संघर्ष का समर्थन किया। किसान संगठनों के नेतृत्व में पहले स्थानीय अनाज मंडी में किसान, मजदूर, आढ़ती और व्यापारी इकट्ठा हुए और बाजारों में रोष मार्च करते हुए महावीर चौक में यातायात बाधित करके धरना लगा दिया।
प्रदर्शन में शामिल भाकियू राजेवाल के ब्लाक अध्यक्ष हरजीत सिंह मंगवाल, भाकियू डकौदा के ब्लाक नेता गुरमेल सिंह, किरती किसान यूनियन के यूथ विंग के जिला कन्वीनर जसदीप सिंह बहादरपुर, कुल हिंद किसान सभा के जिला नेता निर्मल सिंह, भाकियू लक्खोवाल के बलाक अध्यक्ष गुरदेव सिंह तुंगा, जम्हूरी किसानसभा के नेता भरपूर सिंह दुग्गा ने कहा कि कृषि विधेयक किसानों की मौत के वारंट हैं। आढ़ती एसोसिएशन संगरूर के अध्यक्ष सोमनाथ बांसल, व्यापार मंडल ने इस संघर्ष का समर्थन किया।
सुनाम में अकाली दल और किसानों में बहस
अकाली दल बादल की तरफ से सुनाम में शहीद भगत सिंह चौक में धरना दिया गया। वहीं किसान यूनियन के महासचिव रण सिंह के नेतृत्व में किसानों का विशाल काफिला आईटीआई चौक में पहुंचने के लिए वहां से गुजर रहा था। अकालियों के धरने के कारण किसानों को रास्ता बदलने के लिए कहा गया तो किसान भड़क गए और अकाली नेताओं और किसानों में बहस हो गई। किसान उसी रास्ते से जाने पर अडे़ रहे। उन्होंने अकाली दल के धरने पर भी सवाल उठाए। सूचना मिलते ही एसएचओ जतिंदरपाल सिंह मौके पर पहुंचे और दोनों पक्षों को शांत करके किसानों के जाने के लिए धरना पर स्थल पर जगह खाली करवाई।
पठानकोट: 15 जगह लगे धरने, 20 से अधिक यूनियन समर्थन में आईं
पठानकोट में बाजार आम दिनों की तरह खुले रहे लेकिन, जगह-जगह धरने-प्रदर्शनों से सड़क, रेल परिवहन और आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित रहा। पठानकोट में शुक्रवार को 15 जगहों पर किसान, आढ़तियों, कांग्रेस, अकाली दल बादल, आम आदमी पार्टी की ओर से रोष धरने दिए गए। पठानकोट-अमृतसर नेशनल हाईवे पर 4 जगह सरना, बारठ साहिब, तारागढ़ और लदपालवां टोल बैरियर पर ट्रैफिक बाधित रहा।
किसानों को कांग्रेस, आम आदमी पार्टी के अलावा आढ़ती एसोसिएशन, पनबस वर्कर यूनियन, पठानकोट व्यापार मंडल, पावरकॉम टीएसयू, बेरोजगार ईटीटी और टेट पास शिक्षक यूनियन, भारतीय इंकलाब मार्क्सवादी पार्टी, पंजाब स्टेट वेटरिनरी इंस्पेक्टर एसोसिएशन, यूथ कांग्रेस, राष्ट्रीय युवा किसान संगठन, इंटक यूनियन समेत 20 से अधिक यूनियनों का समर्थन मिला।
शिरोमणि अकाली दल (ब) की ओर से शहरी जिलाध्यक्ष सुरिन्द्र सिंह कनवर मिंटू की अध्यक्षता में मलिकपुर में पठानकोट-जम्मू नेशनल हाईवे अवरुद्ध किया गया। पठानकोट-अमृतसर नेशनल हाईवे पर अड्डा कानवां में लोक इंसाफ वेलफेयर सोसाइटी पंजाब के अध्यक्ष जसवंत सिंह व आढ़ती एसोसिएशन पठानकोट के अध्यक्ष गुरनाम सिंह छीना की अध्यक्षता में किसानों ने कृषि विधेयकों के विरोध में नारेबाजी की।
नरोट जैमल सिंह में कांग्रेसी वर्करों ने नगर पंचायत अध्यक्ष दीक्षा ठाकुर की अध्यक्षता में प्रदर्शन किया। पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व सचिव एडवोकेट अमरजीत समार्टी की अध्यक्षता में कथलौर पुल पर धरना देकर प्रधानमंत्री मोदी व सांसद सनी देओल के खिलाफ नारेबाजी की। इसमें विशेष रूप से हलका भोआ के विधायक जोगिन्द्र पाल पहुंचे।
इसके अलावा, पठानकोट-अमृतसर नेशनल हाईवे पर आढ़ती यूनियन सरना, आम आदमी पार्टी व विभिन्न किसान जत्थेबंदियों की ओर से कृषि विधेयकों के विरोध में धरना लगाया गया। कांग्रेस और किसान जत्थेबंदियों की ओर से बमियाल, रानीपुर, सुजानपुर, मामून, घरोटा, शाहपुरकंडी, दुनेरा, पठानकोट कैंट, वाल्मीकि चौक और सरना चौक में भी रोष प्रदर्शन किया गया।
शंभू बैरियर पर सड़क यातायात ठप, पंजाबी अभिनेता और कलाकारों ने गानों से साधा केंद्र पर निशाना
शंभू बैरियर पर कृषि विधेयकों के विरोध में दिए गए धरने में अभिनेता दीप सिद्धू, गायक कंवर ग्रेवाल, प्रीत हरपाल, जस बाजवा, हर्फ चीमा, सिप्पी गिल, लखा संधाना ने शिरकत की। सभी ने कहा कि जब तक केंद्र कृषि विधेयकों को वापस नहीं लेती, संघर्ष जारी रखा जाए। इस धरने में नेता बाबा स्वर्ण सिंह सैदखेड़ी, कांग्रेस समिति जिला प्रधान गुरदीप सिंह ऊंटसर, जिला यूथ कांग्रेस प्रधान निरभय सिंह मिलटी कंबोज, उप प्रधान गगनदीप जलालपुर, अमनदीप सिंह नागी, मार्केट समिति के वाइस चेयरमैन जगरूप सिंह हैपी, यूथ कांग्रेस घनोर प्रधान इंद्रजीत गिफ्टी, गुरप्रीत सिंह बाजवा, प्रधान अनु प्रिया यूनिवर्सिटी, उपकार शर्मा, बलविंदर सिंह चमारू मौजूद रहे।
फिरोजपुर: दिल्ली, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर राजमार्ग जाम
किसानों ने कृषि विधेयकों के विरोध में शुक्रवार को चुंगी नंबर सात व अन्य स्थानों पर धरना देकर दिल्ली, राजस्थान व जम्मू-कश्मीर राजमार्ग जाम किया। किसानों ने बाजारों व गलियों में जाकर दुकानें बंद करवाईं। इसके अलावा ट्रैक पर टेंट लगाकर पूरा दिन किसान धरने पर बैठे रहे। धरने पर बैठके किसानों को लंगर-पानी सब कुछ ट्रैक पर ही पहुंच रहा था। उधर, किसान जत्थेबंदियों के नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार ने कृषि विधेयक रद्द नहीं किए तो एक अक्तूबर से रेल रोको आंदोलन अनिश्चितकालीन जारी रहेगा।
फिरोजपुर छावनी की सात नंबर चुंगी पर किसान धरने में किसान जत्थेबंदियों के नेताओं ने कहा कि सियासी पार्टियों और फुकरे कलाकारों के भड़काऊ व गुमराह प्रचार से किसान सतर्क रहें। किसानों ने दिल्ली, राजस्थान व जम्मू-कश्मीर राजमार्ग पूरी तरह ठप रखा। धरने के दौरान किसान सिर्फ मरीजों की एंबुलेंस और बारात को जाने दे रहे थे। किसान नेता अवतार सिंह महिमा ने कहा कि धरने दौरान कभी भी एंबुलेंस व बारात को नहीं रोका है, उन्हें स्पेशल रास्ता दिया है।
उधर, जलालाबाद में क्रांतिकारी किसान यूनियन (पंजाब) के प्रांतीय उपाध्यक्ष रेशम मिड्ढा, कुल हिंद किसान सभा के जिला प्रधान कामरेड सुरिंदर ढंडिया, भारतीय किसान यूनियन एकता (सिद्धूपुर) अमनजोत ब्लाक प्रधान, भारतीय किसान यूनियन एकता (कादियां) के प्रांतीय उपाध्यक्ष मनप्रीत सिंह संधू, भारतीय किसान यूनियन एकता (लक्खोवाल) ने की रैली को संबोधित करते हुए कहा कि मोदी सरकार ने भारत में कोरोना की आड़ में किसानों और अन्य वर्ग को उजाड़ने के लिए कृषि विधेयक बनाया है।
नवांशहर में हजारों किसानों ने की एतिहासिक रैली
केंद्र सरकार की ओर से लाए गए नए कृषि विधेयकों के खिलाफ शुक्रवार को किसानों का प्रदर्शन जबर्दस्त रहा। जालंधर-चंडीगढ़ मुख्य मार्ग पर किसानों की यह रैली एक इतिहास बन गया। कई दशकों से किसानों की मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे नेताओं ने भी इस बात को माना कि उम्मीद अधिक लोग प्रदर्शन में शामिल हुए और रैली एतिहासिक रही।
रैली की मुख्य बात यह रही कि किसी भी पार्टी के नेता को न तो मंच पर बिठाया और न ही किसी नेता को बोलने का मौका दिया। किसान नेताओं ने कहा कि पंजाब का किसान अब जाग चुका है। केंद्र की मोदी सरकार को यह विधेयक वापस लेना ही पड़ेगा। उन्होंने कहा कि सभी राजनीतिक पार्टियां किसानों को वोट बैंक के तौर पर इस्तेमाल करती रहीं हैं, लेकिन अब किसान अपनी आवाज उठाने के लिए घरों से बाहर आ चुके हैं।
इस दौरान किसी भी नेता को मंच पर नहीं आने दिया गया। किसान संगठनों की ओर से दिए गए पहुंचे विधायक अंगद सिंह आम जनता के बीच बैठे और कुछ देर बाद चले गए। इसके अलावा अकाली दल की ओर से चंडीगढ़ चौक पर 2 घंटे का धरना दिया गया। अकाली दल के नेताओं ने संबोधन में मोदी सरकार पर हमला बोला।
मुक्तसर: कृषि विधेयकों के खिलाफ हर वर्ग किसानों के साथ
कृषि विधेयकों के विरोध में किसान जत्थेबंदियों का हर वर्ग ने साथ दिया। गांवों से लेकर शहर पूरी तरह बंद रहे। शुक्रवार को गांव उदेकरण के नजदीक मुक्तसर-कोटकपूरा रोड पर अलग-अलग जत्थेबंदियों ने धरना दिया। इस धरने में गांवों, शहरों और कस्बों से बड़ी संख्या में किसान, मजदूर, मुलाजिम, नौजवान, दुकानदार, आढ़ती और शैलर मालिकों ने हिस्सा लिया।
उधर, शिअद ने विधायक कंवरजीत सिंह रोजी बरकंदी के नेतृत्व में गांव झबेलवाली के बस अड्डे पर धरना लगाया गया। विधायक रोजी बरकंदी ने कहा कि उन्हें किसान प्यारा है और वह किसानों को हल दिलवाने के लिए वह संघर्ष करते रहेंगे। वहीं व्यापार मंडल के नेतृत्व में मार्केट पूरी तरह से बंद रही। व्यापार मंडल के प्रधान इंद्रजीत सिंह ने बताया कि वह किसानों द्वारा खेती बिल को रद्द करवाने के लिए किए जा रहे विरोध में उनके साथ हैं।
गुरदासपुर में बंद रहा सफल, चक्का जाम कर मोदी सरकार पर बरसे किसान
केंद्र सरकार के कृषि विधेयकों के खिलाफ शुक्रवार को किसानों की ओर से किया गया बंद सफल रहा। बंद के दौरान विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के लोग बतौर किसान, विभिन्न संगठन एक मंच पर एकत्र हुए। वहीं अकाली दल ने जिला प्रधान गुरबचन सिंह बब्बेहाली की अगुवाई में अलग रणनीति तैयार कर बाईपास रोड पर चक्का जाम कर रोष जताया।
दुकानदारों ने भी बंद का समर्थन करते हुए दुकानें बंद रखीं। बंद के दौरान सबसे अधिक जोश युवाओं में दिखा और बढ़कर हिस्सा लिया। एक तरफ युवाओं में केंद्र सरकार के खिलाफ आक्रोश था, वहीं गुरदासपुर के सांसद एवं अभिनेता सनी देओल को लेकर काफी गुस्सा और निराशा थी।
शुक्रवार को सुबह 10 बजे विभिन्न किसान संगठन गुरु नानक पार्क में बड़ी संख्या में एकत्रित हुए। इसमें आम आदमी पार्टी के वर्कर भी आप नेता सूबेदार कुलवंत सिंह के नेतृत्व में किसानों के संघर्ष में शामिल हुए। परशुराम चौक पर किसानों ने चक्का जाम कर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। परशुराम चौक पर किसान नेता सतबीर सिंह सुल्तानी की अगुवाई में चल रहे धरने में आम आदमी पार्टी के नेता सूबेदार कुलवंत सिंह, यूथ कांग्रेसी नेता केपी सिंह पाहड़ा बतौर किसान समर्थन देने पहुंचे।
युवाओं ने सनी देओल को बताया कागजी शेर
प्रदर्शन में पहुंचे भारी संख्या में युवाओं ने सांसद सनी देओल के खिलाफ रोष जताया। युवाओं का कहना था कि सनी देओल को बतौर सांसद चुनना उनकी बड़ी भूल थी। युवा शिंदर सिंह, रविइंद्र सिंह, रंजीत सिंह व अन्य ने बताया कि सनी देओल का अक्स उनके दिमाग में एक शेर की भांति फिल्मों के जरिये बना था। अब साबित हो गया है कि वह महज कागजी शेर हैं। उन्होंने कहा कि गुरदासपुर की जनता का नुमाइंदा होने के कारण सनी देओल को किसानों का साथ देना चाहिए था, लेकिन वह अपने आका के हक में किसानों को अनदेखा कर रहे हैं।