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पंजाब में पहली बार त्रिकोणीय मुकाबला, 'आप' ने बदले सियासी समीकरण

Mon, 23 Jan 2017 01:22 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 23 Jan 2017 01:22 AM IST
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Punjab assembly election 2017, punjab news
पंजाब विस चुनाव - फोटो : File Photo
पंजाब के सियासी इतिहास में पहली बार विधानसभा चुनाव में त्रिकोणीय मुकाबले की स्थिति साफ नजर आ रही है। परंपरागत प्रतिद्वंद्वियों कांग्रेस और शिअद-भाजपा के साथ इस बार मैदान में आम आदमी पार्टी भी है। आप ने दमदार मौजूदगी से चुनावी जंग को काफी दिलचस्प बना दिया है।
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पंजाब में अभी तक कांग्रेस और शिअद-भाजपा के बीच ही मुकाबला होता आया है। कभी गठबंधन जीतता था तो कभी कांग्रेस। हालांकि इस परंपरा को तोड़ते हुए गठबंधन ने पिछले दस वर्षों से सत्ता अपने हाथ में रखी हुई है। इसके विपरीत इस बार चुनाव मैदान में आप की मौजूदगी  से टक्कर और कड़ी हो गई है।
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आम आदमी पार्टी पंजाब की सभी 117 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। इससे पहले 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में आप ने पहली बार पंजाब में दस्तक दी थी। हालांकि तब सियासी माहिर भी अंदाज नहीं लगा सके थे कि पूरे देश में हारने वाली आप पंजाब में चार सीटें जीत जाएगी। उस अप्रत्याशित जीते के बाद ही आप नेतृत्व की निगाहें दिल्ली के बाद पंजाब पर टिक गई थीं। 
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'आप' की दमदार मौजूदगी ने बदले सियासी समीकरण

Punjab assembly election 2017, punjab news
पार्टी ने पंजाब पर पूरी तरह फोकस किया और निचले स्तर तक संगठन खड़ा किया। टिकट वितरण में भी बाजी मारते हुए सबसे पहले कैंडिडेट घोषित किए। हालांकि पार्टी विवादों में भी घिरी। पहले सूबा कनवीनर सुच्चा सिंह छोटेपुर ने पार्टी छोड़ी। फिर दिल्ली के नेताओं पर गंभीर आरोप लगे। कई बार टिकट बेचने के आरोप भी लगे। इससे आप का ग्राफ थोड़ा नीचे होता दिखा, पर राष्ट्रीय कन्वीनर अरविंद केजरीवाल के पंजाब दौरे के बाद एक बार फिर आप मजबूती से उभर रही है। 

खासतौर पर मालवा में केजरीवाल और भगवंत मान की रैलियों को अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। जलालाबाद और लंबी जैसे अकाली दिग्गजों के हलकों में भी आप को खूब रिस्पॉन्स मिल रहा है। इसके चलते इस बार मुकाबला त्रिकोणीय होने के आसार हैं। साल 2012 के विधानसभा चुनाव में मनप्रीत बादल की पीपुल्स पार्टी ऑफ पंजाब को भी काफी अच्छा रिस्पॉन्स मिला था, लेकिन वह वोटों में तब्दील नहीं हो सका। पीपीपी एक भी सीट नहीं जीत सकी थी, मनप्रीत खुद दोनों सीटों से हार गए थे। पर पीपीपी 5.16 प्रतिशत वोट ले गई। जिसका सीधा खामियाजा कांग्रेस को भुगतना पड़ा। 
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