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'रोज़ गार्डन में गंदगी, पेड़ों को दीमक खा रहा, विभाग क्या सो रहा है?'
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 28 Apr 2017 09:33 AM IST
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हाईकोर्ट ने यूटी प्रशासन को कई मुद्दों पर लगाई कड़ी फटकार
- फोटो : File Photo
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यूटी में ग्रीन बेल्ट पर अतिक्रमण, रोज़ गार्डन में गंदगी, कचरे का सही निपटारा न होने और खास तौर पर पेड़ों पर लगी दीमक को लेकर प्रशासन को तगड़ी फटकार लगाई। हाईकोर्ट ने कहा कि हार्टिकल्चर डिपार्टमेंट क्या सो रहा है? हरे-भरे पेड़ों पर दीमक लग रही है, क्यों नहीं इसके लिए कोई ठोस कदम उठाया जाता।
हाईकोर्ट ने इन सभी विषयों पर अगली सुनवाई के दौरान प्रशासन को जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट ने इन सभी समस्याओं के हल के लिए अब चंडीगढ़ प्रशासन को एक कमेटी के गठन के आदेश दिए हैं। रोडमैप तैयार करने की जिम्मेदारी टीम को होगी जिसमें वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा। हरियाणा के एडिशनल एडवोकेट जनरल रणधीर सिंह, पंजाब के एडिशनल एडवोकेट जनरल एचएस थेटि और एडवोकेट अलका सरीन को हाईकोर्ट ने एमिकस क्यूरी नियुक्त किया है, जो इस मामले में हाईकोर्ट को सहयोग करेंगे।
मामला रोज़ फेस्टिवल से जुड़ा है, जब इसके बाद की गंदगी की तस्वीरों के साथ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। याचिका में कहा गया कि रोज़ फेस्टिवल लोगों को गुलाबों की सुंदरता दिखाने के लिए नहीं बल्कि इसे कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स बनाकर मुनाफा कमाने के लिए मनाया जा रहा है। हाईकोर्ट ने कहा की रोज गार्डन को रोज गार्डन ही रहने दो, अगर रोज फेस्टिवल के दौरान अन्य गतिविधियां करनी भी हैं तो उन्हें शहर के अन्य जगहों जैसे की परेड ग्राउंड, लेज़र वेली आदि में शिफ्ट किया जा सकता है। इससे रोज गार्डन को गंदगी से निजात मिल सकती है।
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हाईकोर्ट ने इन सभी विषयों पर अगली सुनवाई के दौरान प्रशासन को जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट ने इन सभी समस्याओं के हल के लिए अब चंडीगढ़ प्रशासन को एक कमेटी के गठन के आदेश दिए हैं। रोडमैप तैयार करने की जिम्मेदारी टीम को होगी जिसमें वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा। हरियाणा के एडिशनल एडवोकेट जनरल रणधीर सिंह, पंजाब के एडिशनल एडवोकेट जनरल एचएस थेटि और एडवोकेट अलका सरीन को हाईकोर्ट ने एमिकस क्यूरी नियुक्त किया है, जो इस मामले में हाईकोर्ट को सहयोग करेंगे।
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मामला रोज़ फेस्टिवल से जुड़ा है, जब इसके बाद की गंदगी की तस्वीरों के साथ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। याचिका में कहा गया कि रोज़ फेस्टिवल लोगों को गुलाबों की सुंदरता दिखाने के लिए नहीं बल्कि इसे कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स बनाकर मुनाफा कमाने के लिए मनाया जा रहा है। हाईकोर्ट ने कहा की रोज गार्डन को रोज गार्डन ही रहने दो, अगर रोज फेस्टिवल के दौरान अन्य गतिविधियां करनी भी हैं तो उन्हें शहर के अन्य जगहों जैसे की परेड ग्राउंड, लेज़र वेली आदि में शिफ्ट किया जा सकता है। इससे रोज गार्डन को गंदगी से निजात मिल सकती है।
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पार्कों के मेंटेनेंस के लिए कुछ नहीं किया
Punjab And Haryana Highcourt Chandigarh
- फोटो : File Photo
पार्कों के मेंटेनेंस के लिए कुछ नहीं किया
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि, प्रशासन ने रोज गार्डन तो क्या शहर कि अन्य ग्रीन बेल्ट्स और पार्कों के मेंटेनेंस के लिए कुछ नहीं किया है। योजना के तहत ग्रीन बेल्ट्स बनाई गई थी अब भी वही हैं अन्य ग्रीन बेल्ट्स को विकसित करने की कोई योजना तक नहीं बनाई गई। सुनवाई के दौरान मौजूद वकीलों के भी कई मुद्दे उठाए। कोर्ट ने कहा कि ग्रीन बेल्ट पर लगातार कब्जे हो रहे हैं और प्रशासन सो रहा है। जब कब्जे हटाने के लिए नींद टूटती है तो उसके लिए मोटी राशि खर्च करनी पड़ती है। एक ओर जहां शहर की हरियाली समाप्त हो रही है वहीं दूसरी ओर प्रशासन के लिए मुश्किलें पैदा हो रही हैं। इस दौरान कोर्ट ने कहा कि शहर के अधिकतर पेड दीमक की चपेट में हैं खोखले होते जा रहे हैं इसके लिए प्रशासन के हॉर्टिकल्चर विभाग ने अब तक कुछ नहीं किया है। दीमक हटाया जाना तो दूर प्रशासन ने शहर में नए पेड़ तक नहीं लगाए हैं।
हाईकोर्ट परिसर में क्यों नहीं बनवाते मल्टीलेवल पार्किंग
पार्किंग के मुद्दे पर भी हाई कोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन को आड़े हाथों लिया। कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट में दूरदराज के क्षेत्रों से लोग अपने केस के लिए आते हैं। हाईकोर्ट में उनके लिए ही पार्किंग्स तक नहीं हैं। हरियाणा के एडिशनल एडवोकेट जनरल रणधीर सिंह ने यह मुद्दा उठाया था कि रॉक गार्डन के पास ग्रीन बेल्ट में सैंकड़ों वाहन कच्चे में खड़े करने पर लिटिगेंट्स मजबूर हैं। हाईकोर्ट में जहाँ वकीलों के वाहन खड़े होते हैं क्यों नहीं उस जगह को मल्टी-लेवल पार्किंग के तौर पर विकसित करते।
विदेशों की तर्ज पर क्यों नहीं होता कचरे का निपटारा
हाईकोर्ट ने कहा की शहर में गारबेज डिस्पोजल के मामले में भी प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है सुनवाई के दौरान एडवोकेट अलका सरीन ने कहा की विदेशों में जैविक और अजैविक कचरे को अलग से एकत्रित किया जाता है ऐसा ही शहर में भी किया जा सकता है। शहरवासियों से दोनों तरह के कचरे को अलग से एकत्रित किया जा सकता है और शहर वासी इसके लिए तैयार भी हैं। लेकिन प्रशासन ने ही इसकी कोई योजना नहीं बनाई है ऐसा करने से जैविक कचरे को खाद में और अन्य कचरे जिसमे प्लास्टिक आदि शामिल हैं, को री-साइकिल किया जा सके।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि, प्रशासन ने रोज गार्डन तो क्या शहर कि अन्य ग्रीन बेल्ट्स और पार्कों के मेंटेनेंस के लिए कुछ नहीं किया है। योजना के तहत ग्रीन बेल्ट्स बनाई गई थी अब भी वही हैं अन्य ग्रीन बेल्ट्स को विकसित करने की कोई योजना तक नहीं बनाई गई। सुनवाई के दौरान मौजूद वकीलों के भी कई मुद्दे उठाए। कोर्ट ने कहा कि ग्रीन बेल्ट पर लगातार कब्जे हो रहे हैं और प्रशासन सो रहा है। जब कब्जे हटाने के लिए नींद टूटती है तो उसके लिए मोटी राशि खर्च करनी पड़ती है। एक ओर जहां शहर की हरियाली समाप्त हो रही है वहीं दूसरी ओर प्रशासन के लिए मुश्किलें पैदा हो रही हैं। इस दौरान कोर्ट ने कहा कि शहर के अधिकतर पेड दीमक की चपेट में हैं खोखले होते जा रहे हैं इसके लिए प्रशासन के हॉर्टिकल्चर विभाग ने अब तक कुछ नहीं किया है। दीमक हटाया जाना तो दूर प्रशासन ने शहर में नए पेड़ तक नहीं लगाए हैं।
हाईकोर्ट परिसर में क्यों नहीं बनवाते मल्टीलेवल पार्किंग
पार्किंग के मुद्दे पर भी हाई कोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन को आड़े हाथों लिया। कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट में दूरदराज के क्षेत्रों से लोग अपने केस के लिए आते हैं। हाईकोर्ट में उनके लिए ही पार्किंग्स तक नहीं हैं। हरियाणा के एडिशनल एडवोकेट जनरल रणधीर सिंह ने यह मुद्दा उठाया था कि रॉक गार्डन के पास ग्रीन बेल्ट में सैंकड़ों वाहन कच्चे में खड़े करने पर लिटिगेंट्स मजबूर हैं। हाईकोर्ट में जहाँ वकीलों के वाहन खड़े होते हैं क्यों नहीं उस जगह को मल्टी-लेवल पार्किंग के तौर पर विकसित करते।
विदेशों की तर्ज पर क्यों नहीं होता कचरे का निपटारा
हाईकोर्ट ने कहा की शहर में गारबेज डिस्पोजल के मामले में भी प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है सुनवाई के दौरान एडवोकेट अलका सरीन ने कहा की विदेशों में जैविक और अजैविक कचरे को अलग से एकत्रित किया जाता है ऐसा ही शहर में भी किया जा सकता है। शहरवासियों से दोनों तरह के कचरे को अलग से एकत्रित किया जा सकता है और शहर वासी इसके लिए तैयार भी हैं। लेकिन प्रशासन ने ही इसकी कोई योजना नहीं बनाई है ऐसा करने से जैविक कचरे को खाद में और अन्य कचरे जिसमे प्लास्टिक आदि शामिल हैं, को री-साइकिल किया जा सके।