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धरना प्रदर्शन करो, पर आम आदमी परेशान हुआ तो बख्शेंगे नहीं: हाईकोर्ट
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 14 Dec 2017 09:26 AM IST
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- फोटो : Demo Pics
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राजनैतिक दलों व अन्य प्रदर्शनकारियों द्वारा नेशनल और स्टेट हाईवेज सहित अन्य जगहों पर की जा रही रैलियों और धरने प्रदर्शनों पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रवैया अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि धरना- प्रदर्शन करना संवैधानिक अधिकार है। इससे रोकेंगे नहीं, लेकिन यदि इससे आम आदमी परेशान हुआ तो दोषियों को बख्शेंगे भी नहीं।
हाईकोर्ट ने कहा कि भविष्य में प्रदर्शनों को किस तरह से नियोजित किया जाए, जिससे आम आदमी को परेशानी न हो। इसके लिए हाईकोर्ट ने वकीलों से सुझाव मांगे हैं जिसको आधार बनाकर आदेश जारी करेगा। हाईकोर्ट के आदेशों के अनुरूप पंजाब के एडवोकेट जनरल अतुल नंदा, अकाली दल की ओर से पेश हुए एडवोकेट हरप्रीत सिंह बराड़, सीनियर एडवोकेट पुनीत बाली, आरएस बैंस बैठक कर सुझाव देंगे।
बुधवार को सुनवाई शुरू होते ही हाईकोर्ट ने कहा कि रिहाइशी इलाकों और नेशनल और स्टेट हाईवेज और अन्य सड़कों को धरने के नाम पर रोके जाने को हाईकोर्ट बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगा। अपनी मांग को लेकर धरना प्रदर्शन करना मौलिक अधिकार है तो इस अधिकार के चलते सामान्य नागरिकों के अधिकारों का हनन नहीं किया जा सकता। देखने में आया है कि जब धरने लगा सड़कें रोक दी जाती हैं तो कई बार एंबुलेंस तक को भी जाने नहीं दिया जाता है और तोड़फोड़ भी कर दी जाती है। अब इसके लिए दिशा-निर्देश तय किए जाने बेहद जरूरी हैं।
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हाईकोर्ट ने कहा कि भविष्य में प्रदर्शनों को किस तरह से नियोजित किया जाए, जिससे आम आदमी को परेशानी न हो। इसके लिए हाईकोर्ट ने वकीलों से सुझाव मांगे हैं जिसको आधार बनाकर आदेश जारी करेगा। हाईकोर्ट के आदेशों के अनुरूप पंजाब के एडवोकेट जनरल अतुल नंदा, अकाली दल की ओर से पेश हुए एडवोकेट हरप्रीत सिंह बराड़, सीनियर एडवोकेट पुनीत बाली, आरएस बैंस बैठक कर सुझाव देंगे।
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बुधवार को सुनवाई शुरू होते ही हाईकोर्ट ने कहा कि रिहाइशी इलाकों और नेशनल और स्टेट हाईवेज और अन्य सड़कों को धरने के नाम पर रोके जाने को हाईकोर्ट बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगा। अपनी मांग को लेकर धरना प्रदर्शन करना मौलिक अधिकार है तो इस अधिकार के चलते सामान्य नागरिकों के अधिकारों का हनन नहीं किया जा सकता। देखने में आया है कि जब धरने लगा सड़कें रोक दी जाती हैं तो कई बार एंबुलेंस तक को भी जाने नहीं दिया जाता है और तोड़फोड़ भी कर दी जाती है। अब इसके लिए दिशा-निर्देश तय किए जाने बेहद जरूरी हैं।
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धरने के लिए अलग से तय कर दी जाए जगह
अदालत।
- फोटो : amar ujala
याचिकाकर्ता की मंशा पर उठाए सवाल
अकाली दल के वकील हरप्रीत बराड़ ने याचिकाकर्ता की मंशा पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि इस याचिका के चलते कोर्ट के आदेशों के प्रभाव में उनके 1500 लोगों के खिलाफ गैर जमानती धाराओं में मामले दर्ज कर दिए गए हैं और उनके नुमाइंदों को नामांकन तक नहीं भरने दिया गया। कोर्ट ने कहा कि हमें राजनीति से मतलब नहीं है बल्कि आम नागरिकों की चिंता है। कोर्ट ने बराड़ को कहा कि वे अगली सुनवाई पर अपना पक्ष लिखित में रखें।
धरने के लिए अलग से तय कर दी जाए जगह
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट से मांग की गई कि प्रत्येक जिले में धरना- प्रदर्शन और रैलियों के लिए अलग से एक जगह तय कर दी जाए । इसके अलावा अन्य स्थान पर ऐसा करने पर पाबंदी लगा दी जाए। डीसी से इजाजत लेकर ही तय जगह पर धरने प्रदर्शन किए जाएं तांकि आम लोगों को इससे कोई परेशानी न आए। अराइव सेफ नामक संस्था ने अर्जी दायर कर मांग की है कि राजनेताओं के रोड शो पर रोक लगाई जाए। रोड शो के समय नेता के समर्थक सड़कों पर जाम लगा देते हैं जिससे आम लोगों को आवाजाही में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। कोर्ट ने इस अर्जी को ऐसे ही मामलों में पहले से दायर याचिका के साथ सुनवाई करने के निर्देश दिए।
अकाली दल के वकील हरप्रीत बराड़ ने याचिकाकर्ता की मंशा पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि इस याचिका के चलते कोर्ट के आदेशों के प्रभाव में उनके 1500 लोगों के खिलाफ गैर जमानती धाराओं में मामले दर्ज कर दिए गए हैं और उनके नुमाइंदों को नामांकन तक नहीं भरने दिया गया। कोर्ट ने कहा कि हमें राजनीति से मतलब नहीं है बल्कि आम नागरिकों की चिंता है। कोर्ट ने बराड़ को कहा कि वे अगली सुनवाई पर अपना पक्ष लिखित में रखें।
धरने के लिए अलग से तय कर दी जाए जगह
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट से मांग की गई कि प्रत्येक जिले में धरना- प्रदर्शन और रैलियों के लिए अलग से एक जगह तय कर दी जाए । इसके अलावा अन्य स्थान पर ऐसा करने पर पाबंदी लगा दी जाए। डीसी से इजाजत लेकर ही तय जगह पर धरने प्रदर्शन किए जाएं तांकि आम लोगों को इससे कोई परेशानी न आए। अराइव सेफ नामक संस्था ने अर्जी दायर कर मांग की है कि राजनेताओं के रोड शो पर रोक लगाई जाए। रोड शो के समय नेता के समर्थक सड़कों पर जाम लगा देते हैं जिससे आम लोगों को आवाजाही में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। कोर्ट ने इस अर्जी को ऐसे ही मामलों में पहले से दायर याचिका के साथ सुनवाई करने के निर्देश दिए।