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अगर शिक्षक बच्चों से जाति पूछेंगे तो पढ़ाएंगे क्या: हाईकोर्ट

Fri, 03 Mar 2017 09:30 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 03 Mar 2017 09:30 AM IST
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Punjab and haryana highcourt, Generic data, haryana news
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : File Photo
स्कूली बच्चों के जातिगत आंकड़े व अधिकारियों का जातिगत ब्योरा आरटीआई के जरिए दिए जाने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हैरानी और दुख जताया है। अदालत ने कहा कि अगर शिक्षक बच्चों से जाति पूछेंगे तो पढ़ाएंगे क्या। कोर्ट ने कहा कि यदि यही व्यवस्था जारी रही तो देश से जातिवाद कभी समाप्त नहीं हो पाएगा। हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को इस बारे में जवाब दाखिल करने और याची को सौंपे गए आंकड़ों की सर्टिफाइड कॉपी देने के लिए समय देते हुए सुनवाई को सोमवार तक के लिए टाल दिया। 
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वीरवार को मामले की सुनवाई शुरू होते ही जाट आरक्षण के खिलाफ याचिका दाखिल करने वाले याचिकाकर्ताओं की ओर से बहस शुरू की गई। याचिकाकर्ता की ओर से स्कूलों का डाटा देकर बताया गया कि हरियाणा में जाट प्रिंसिपल 58.11 प्रतिशत, लेक्चरर 46.96 प्रतिशत, एचएम ईएचएम 35.75, मास्टर 45.90 प्रतिशत, जेबीटी 41.37 प्रतिशत और छात्र 13.53 प्रतिशत हैं।
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हाईकोर्ट ने हैरानी जताते हुए पूछा कि आखिर बच्चों की जाति के आंकड़े एकत्रित कैसे किए गए। क्या शिक्षक ने सभी बच्चों से उनकी जाति पूछी थी। यदि ऐसा हुआ है तो इससे दुखद और कुछ भी नहीं हो सकता है। याची ने कहा कि यह सूचना आरटीआई से मांगी गई है। आंकड़ों पर आपत्ति जताते हुए सरकार ने कहा कि जो कॉपी सौंपी गई है, उसमें हर पन्ने पर सूचना अधिकारी के हस्ताक्षर होने चाहिए थे, जो नहीं है। इसके साथ सरकार ने इस सूचना पर भरोसा करने से इनकार कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि आरटीआई के माध्यम से दी गई सूचना पर कैसे सवाल उठा सकते हैं? अगली सुनवाई के दौरान इस बारे में विस्तृत जवाब दाखिल किया जाए। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि यही व्यवस्था रही तो जातिवाद कभी समाप्त नहीं होगा और इससे दुखद और कुछ नहीं हो सकता कि बच्चे से उसकी जाति पूछी जाए।
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कोर्ट ने पूछा- कैसे जुटाए गए आंकड़े  

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Punjab And Haryana Highcourt Chandigarh - फोटो : File Photo
कोर्ट ने पूछा- कैसे जुटाए गए आंकड़े  
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान ही हरियाणा सरकार की ओर से दी जा रही दलीलों के बीच सरकार से पूछा कि आंकड़े एकत्रित करने के लिए सरकार ने क्या माध्यम इस्तेमाल किया था। कमीशन के पास जो आंकड़े मौजूद थे, वे कैसे लिए गए। इस पर हरियाणा सरकार ने कहा कि इन्हें अन्य प्रकार से सर्वे के जरिए एकत्रित किया गया है। 

वेबसाइट पर सूची में जाति का जिक्र नहीं
याची ने बताया कि आरटीआई और सरकार की वेबसाइट से मिली जानकारी के अनुसार हरियाणा में 39 प्रतिशत आईएएस, 37 प्रतिशत आईपीएस, 42 प्रतिशत एचसीएस एग्जीक्यूटिव, 62 प्रतिशत आईएफएस, फूड सप्लाई विभाग में 30 प्रतिशत और एचपीएस में 37 फीसदी पदों पर जाट काबिज हैं।  सरकार की ओर से एडवोकेट लोकेश सिन्हल ने आंकड़ों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि उन्होंने अतिरिक्त हलफनामे के माध्यम से आंकड़ों का नकारा था। वहीं, याची की ओर से सौंपे गए आंकड़ों पर फिर से सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि आईएएस, आईपीएस, एचपीएस, एचसीएस की सूची वेबसाइट पर मौजूद है। इस सूची में कहीं पर भी जाति का जिक्र नहीं है और ऐसे में याची की ओर से सौंपी गई सूचना को सही नहीं माना जा सकता है।

याची ने कहा कि उसने सरकार की वेबसाइट से अधिकारियों की सूची उठाई थी। इस सूची में से सभी नामों को जांचने के लिए टेलीफोन के माध्यम से वेरिफिकेशन की गई। इस पूरी प्रक्रिया के बाद जाटों की सूची तैयार की गई है। याची की ओर से इस प्रक्रिया को अपनाने के लिए हरियाणा सरकार ने सही मानने से इनकार कर दिया। याची ने कहा कि यदि सरकार को उसकी ओर से सौंपी गई सूची पर भरोसा नहीं है तो ऐसी स्थिति में वह इन नामों को अपने स्तर पर जांच ले और देेखे की जाट अधिकारियों की जो सूची दी गई है, उसमें सभी जाट हैं या नहीं।
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