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Punjab: बिना FIR एक ही मामले में तीसरी जांच, हाईकोर्ट ने मोहाली के एसएसपी व डीएसपी ट्रैफिक को किया तलब

Thu, 08 Feb 2024 04:37 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Thu, 08 Feb 2024 04:37 PM IST
सार

बिना एफआईआर एक ही मामले की तीसरी बार जांच करने पर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपना लिया है। हाईकोर्ट ने मोहाली के एसएसपी और डीएसपी ट्रैफिक को तलब किया। इसके अलावा ऐसे अन्य मामलों का भी ब्योरा मांगा है।

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Punjab and Haryana High Court summoned Mohali SSP and DSP Traffic
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट।

विस्तार

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक ही मामले में तीसरी बार जांच की बात सामने आने पर कड़ा रुख अपनाते हुए इसे न्यायालय की अवमानना जैसा बताया है। हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि बिना एफआईआर जांच कैसे की गई और सुप्रीम कोर्ट के ललिता कुमारी मामले में जारी निर्देशों का पालन क्यों नहीं किया गया। अगली सुनवाई पर हाईकोर्ट ने मोहाली के एसएसपी व डीएसपी ट्रैफिक को हाजिर रहने का आदेश दिया है।

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याचिका दाखिल करते हुए सुरेंद्र कुमार ने बताया कि उसका मोहाली में एक प्लॉट को लेकर विवाद चल रहा था और यह मामला डेराबस्सी की अदालत में विचाराधीन है। इसी बीच दूसरे पक्ष ने एसएसपी को इस मामले में आपराधिक शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की थी। मामले की जांच एसपी सिटी को सौंपी गई और उन्होंने इसे सिविल विवाद बताते हुए 17 जनवरी 2022 को रिपोर्ट सौंप दी। इसके बाद दोबारा एक शिकायत दी गई और इस बार शिकायत पर जांच एसपी पीआईबी को सौंप दी गई।
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जांच के बाद इस बार भी मामले को सिविल बताते हुए बंद करने की रिपोर्ट दे दी गई। दो बार क्लोजर के बाद अब तीसरी बाद फिर से शिकायत दी गई है और इस बार जांच डीएसपी ट्रैफिक को दी गई है। डीएसपी ट्रैफिक बार-बार याची को अपने कार्यालय बुलाकर परेशान कर रहे हैं।

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याची ने कहा कि जब पहले दो बार जांच हो चुकी है और एफआईआर से वरिष्ठ अधिकारी इन्कार कर चुके हैं तो यह तीसरी जांच कैसे वैध है जबकि इस बार जांच अधिकारी पूर्व के अधिकारियों से कनिष्ठ है। हाईकोर्ट ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ललिता कुमारी मामले में स्पष्ट कर चुका है कि बिना एफआईआर जांच नहीं की जानी चाहिए। यदि प्राथमिक जांच जरूरी हो तो यह 15 दिन में पूरी होनी चाहिए और विशेष परिस्थितियों में अधिकतम छह सप्ताह में होनी चाहिए।

हाईकोर्ट ने कहा कि मोहाली के मामले से यह स्पष्ट है कि अन्य जिलों में भी एक शिकायत पर अनेक जांच की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता। ऐसे में हाईकोर्ट ने फिलहाल मोहाली के एसएसपी से पूछा है कि मोहाली में ऐसे कितने मामले हैं जिनमें बिना एफआईआर दर्ज किए जांच की गई है। इन मामलों में शिकायतकर्ता कौन है, किस तारीख को शिकायत मिली और जांच आरंभ हुई। इसके साथ ही एक शिकायत में कितनी बार जांच हुई, जांच का परिणाम क्या था और जांच अधिकारी कौन था।

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