हाईकोर्ट में यूपीएससी ने कहा- दिनकर गुप्ता की डीजीपी पद पर नियुक्ति नियमों के अनुरूप
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पंजाब के डीजीपी दिनकर गुप्ता की नियुक्ति रद्द करने के कैट के फैसले पर रोक को जारी रखते हुए हाईकोर्ट ने गुरुवार को यूपीएससी का पक्ष सुना। करीब 4 घंटे यूपीएससी ने दिनकर गुप्ता की नियुक्ति को जायज बताने में गुजारे, जिसके बाद हाईकोर्ट ने सुनवाई स्थगित कर दी। यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (यूपीएससी) की ओर से कहा गया कि पंजाब के डीजीपी पद पर इम्पैनलमेंट कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश के अनुसार ही दिनकर गुप्ता की नियुक्ति की थी।
ऐसे में दिनकर गुप्ता की डीजीपी के तौर पर नियुक्ति को सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन कहना गलत है। यूपीएससी ने सभी के नामों पर गौर करने के बाद नियुक्ति के लिए सिफारिश की थी। यूपीएससी ने कहा कि दिनकर गुप्ता की नियुक्ति प्रकाश सिंह मामले में जारी सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देश की अनुरूप की गई है। उन्होंने कहा कि याची वरिष्ठता की दलील दे रहे हैं जबकि प्रकाश सिंह मामले में यह स्पष्ट किया गया है कि नियुक्ति के लिए केवल वरिष्ठता ही पैमाना नहीं है, अन्य पैमानों का भी ध्यान रखना चाहिए।
पंजाब सरकार पहले ही हाईकोर्ट में दायर अपील में कह चुकी है कि कैट के इस फैसले के चलते डीजीपी पद पर दिनकर गुप्ता की नियुक्ति रद्द होने से राज्य में यह पद रिक्त हो गया है। पंजाब बॉर्डर राज्य है, जिसकी पाकिस्तान से 553 किलोमीटर लंबी सीमा लगती है। पाकिस्तान से आतंकवाद, तस्करी और ड्रग्स का खतरा बना रहता है, ऐसे में पुलिस को बिना मुखिया के नहीं छोड़ा जा सकता। सरकार ने कहा था कि पंजाब पुलिस बिना डीजीपी के इन समस्याओं से निपट नहीं सकती। ऐसे में कैट का फैसला सही नहीं है।
कैट ने नियुक्ति की थी रद्द
डीजीपी के पद पर दिनकर गुप्ता की गत वर्ष 7 फरवरी को नियुक्ति की गई थी। जिसे पंजाब की एंटी ड्रग स्पेशल टास्क फोर्स के डीजीपी मोहम्मद मुस्तफा और पीएसपीसीएल के डीजीपी सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय ने कैट में चुनौती दी थी। कैट ने 17 जनवरी को दोनों की याचिकाओं को स्वीकार करते हुए डीजीपी के पद पर दिनकर गुप्ता की नियुक्ति को अवैध करार दिया था। कैट के इसी फैसले को पंजाब सरकार और दिनकर गुप्ता ने हाईकोर्ट में अपील दायर कर चुनौती दी है।