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Chandigarh: विधवा को कोर्ट के चक्कर लगवाना पंजाब सरकार को बड़ा महंगा, हाईकोर्ट ने लगाया दो लाख का जुर्माना
Fri, 28 Apr 2023 10:43 PM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Fri, 28 Apr 2023 10:43 PM IST
सार
कोर्ट ने पारिवारिक पेंशन 3 माह मे तय करने और इसका छह प्रतिशत ब्याज सहित भुगतान करने का पंजाब सरकार को आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि किस आधार पर याची के पति के यह लाभ रोके गए इसको लेकर कोई ठोस आधार नहीं दिया गया।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने घुटने की बीमारी से पीड़ित विधवा को फैमिली पेंशन के लिए अदालत के चक्कर लगवाने पर पंजाब सरकार पर दो लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने सरकार को तीन माह के भीतर पेंशन व रिटायरमेंट लाभ ब्याज सहित जारी करने का आदेश दिया है। रूपनगर निवासी कौशल्या देवी ने बताया कि उनके पति जूनियर स्केल स्टेनोग्रफर के तौर पर पंजाब सरकार में कार्यरत थे। इस दौरान पति के खिलाफ एक आपराधिक मामला दर्ज हो गया। इस आपराधिक मामले की जानकारी को छुपाते हुए उसने समय पूर्व सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन कर दिया।
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आवेदन को तत्काल स्वीकार कर लिया गया और इसको लेकर कोई शर्त भी नहीं रखी गई लेकिन जब उसने पेंशन व अन्य लाभ के लिए आवेदन किया तो महालेखाकार कार्यालय ने इसे रोक दिया। इसके तीन माह बाद ही उसकी मौत हो गई। पति की मौत के बाद विधवा ने पेंशन व अन्य लाभ के लिए दावा किया लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ। बाद में उसने हाईकोर्ट की शरण ली। हाईकोर्ट ने 2016 में याची के दावे पर निर्णय लेने का पंजाब सरकार को आदेश दिया था। सरकार ने याची के दावे को खारिज कर दिया।
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सरकार ने विधवा के जीने के अधिकार छीनने की कोशिश की
कोर्ट ने कहा कि यदि पेंशन रोकने का निर्णय लिया गया तो इसका केवल 1/3 हिस्सा ही रोका जा सकता है और वह भी सुनवाई का अवसर देने के बाद। मृत व्यक्ति को सुनवाई का मौका देने का कोई औचित्य नहीं है। इस मामले में सरकार ने विधवा के जीने के अधिकार को छीनने की कोशिश की है। कोर्ट ने पारिवारिक पेंशन 3 माह मे तय करने और इसका छह प्रतिशत ब्याज सहित भुगतान करने का पंजाब सरकार को आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि किस आधार पर याची के पति के यह लाभ रोके गए इसको लेकर कोई ठोस आधार नहीं दिया गया।
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लंबे समय से है बीमारी से पीड़ित
महिला को हाईकोर्ट की ओर से उपलब्ध करवाए गए लीगल ऐड काउंसिल एडवाकेट अरनव सूद ने बताया कि याचिकाकर्ता लंबे समय से घुटने की बीमारी की वजह से परेशान है। गरीबी के कारण वह अपन इलाज तक नहीं करवा पा रही है। वह बिस्तर पर ही लेटी रहती है। उसके पास वकील को देने के लिए फीस तक नहीं थी और ऐसे में उसे मुफ्त वकील की सुविधा उपलब्ध करवाई गई है।