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पदोन्नति में देरी का मामला: जवाब दाखिल न करने पर हाईकोर्ट नाराज, हरियाणा सरकार पर ठोका 10000 का जुर्माना
Fri, 11 Nov 2022 01:51 AM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Fri, 11 Nov 2022 01:51 AM IST
सार
याचिका में कोर्ट को बताया गया है कि पदोन्नति के लिए उपलब्ध योग्य उम्मीदवारों की पर्याप्त संख्या को देखते हुए सेवानिवृत्त प्राचार्यों की पुनर्नियुक्ति पूरी तरह से अनुचित है। हाईकोर्ट इस मामले पहले ही सेवानिवृत्त प्राचार्य की नियुक्ति पर अंतरिम रोक लगा चुका है। वह सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
हरियाणा शिक्षा विभाग में पदोन्नति में देरी को लेकर दाखिल याचिका पर जवाब में देरी हरियाणा सरकार को भारी पड़ गई। हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार पर 10000 का जुर्माना लगाते हुए 12 दिसंबर तक जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। हरियाणा सरकार को पदोन्नति में देरी का कारण और यह भी बताना होगा कि क्यों सेवानिवृत्त अधिकारियों को पुनर्नियुक्ति दी जा रही है।
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हाईकोर्ट ने आदेश की प्रति उच्चाधिकारियों को भेजने का आदेश दिया है और कहां है कि यह देखा जाए कि क्यों मुकदमेबाजी बढ़ रही है। इसके साथ ही देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारी की जेब से यह जुर्माने की राशि वसूलने का आदेश दिया है। विभिन्न शिक्षकों की ओर से याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया गया कि प्रदेश में प्राचार्य के पद रिक्त हैं और योग्य शिक्षक भी मौजूद हैं। बावजूद इसके उन्हें पदोन्नत नहीं किया जा रहा। उनके स्थान पर सेवानिवृत्त हो चुके प्राचार्य को पुन: प्रभार दिया जा रहा है। इस मामले में हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद सरकार ने जवाब दाखिल करने में देरी की, जिस पर कड़ा रुख अपनाते हुए हाईकोर्ट ने अब 10000 का जुर्माना लगाया है।
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हाई के जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी ने सत्यपाल सिंह और अन्य द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। पिछली सुनवाई पर अतिरिक्त मुख्य सचिव, शिक्षा विभाग, हरियाणा के आग्रह पर हाईकोर्ट ने इस मामले में जवाब दायर करने के लिए विभाग को अंतिम अवसर दिया था। जब यह मामला नौ नवंबर को हाई कोर्ट के समक्ष सुनवाई के लिए आया तो अंतिम अवसर के बावजूद, विभाग द्वारा कोई जवाब दायर नहीं किया गया और राज्य के वकील ने जवाब दाखिल करने के लिए एक और अवसर मांगा।
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इस पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया और विभाग पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाने का आदेश दिया। इस मामले में याचिकाकर्ताओं ने उच्च शिक्षा विभाग हरियाणा के उस फैसले को चुनौती दी है जिसके तहत राज्य के कॉलेजों में प्राचार्यों को उनकी सेवानिवृत्ति के बाद उसी पद पर नियुक्त करने का निर्णय लिया गया था।
याचिका में कोर्ट को बताया गया है कि पदोन्नति के लिए उपलब्ध योग्य उम्मीदवारों की पर्याप्त संख्या को देखते हुए सेवानिवृत्त प्राचार्यों की पुनर्नियुक्ति पूरी तरह से अनुचित है। हाईकोर्ट इस मामले पहले ही सेवानिवृत्त प्राचार्य की नियुक्ति पर अंतरिम रोक लगा चुका है। वह सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।