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Punjab: हाईकोर्ट ने कहा- कानूनी अधिकार का इस्तेमाल, आत्महत्या के लिए उकसाने का अपराध नहीं
Thu, 26 Oct 2023 11:49 PM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Thu, 26 Oct 2023 11:49 PM IST
सार
हाईकोर्ट ने सुनवाई के करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा दायर शिकायत में अदालत ने रजनीश को दोषी ठहराया था और उसकी अपील खारिज कर दी गई थी। किसी के कानूनी अधिकार का लाभ उठाना उत्पीड़न या उकसावे की श्रेणी में नहीं आ सकता है।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए साफ कर दिया है कि कानूनी अधिकार का प्रयोग करना आत्महत्या के लिए उकसाने का अपराध नहीं माना जा सकता। पटियाला निवासी कुलदीप सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बताया था कि उसके खिलाफ आत्महत्या के लिए मजबूर करने व अन्य धारा में एफआईआर दर्ज की गई है।
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याचिकाकर्ता ने चेक बाउंस का आरोप लगाते हुए रजनीश कुमार के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई थी। रजनीश ने खुद को बेकसूर बताया लेकिन पटियाला कोर्ट ने 2015 में उसे दोषी करार दिया था। इसके बाद निचली अदालत ने उसकी अपील को भी खारिज कर दिया था। 2016 में उसने खुद को बेकसूर बताते हुए पत्र लिखकर आत्महत्या कर ली। रजनीश की मौत के बाद याची समेत अन्य के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज कर लिया गया। सुसाइड नोट में रजनीश ने आरोप लगाया था कि उसे याचिकाकर्ता और अन्य सह-अभियुक्तों के साथ मिल कर फंसाया गया।
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हाईकोर्ट ने सुनवाई के करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा दायर शिकायत में अदालत ने रजनीश को दोषी ठहराया था और उसकी अपील खारिज कर दी गई थी। किसी के कानूनी अधिकार का लाभ उठाना उत्पीड़न या उकसावे की श्रेणी में नहीं आ सकता है। इसी के साथ हाईकोर्ट ने याची के खिलाफ दर्ज मामले को रद्द करने का आदेश दिया।
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