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हाईकोर्ट की टिप्पणी: दुनिया कोरोना से जूझ रही, श्मशान में कतारें और प्रशासन को निजीकरण की जल्दी

Mon, 31 May 2021 10:09 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Mon, 31 May 2021 10:09 PM IST
सार

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने आत्मनिर्भर भारत पर टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि ऐसा संस्थान जो भारतीय और भारतीयों द्वारा संचालित हो, भारतीयों को रोजगार देता हो और भारत को मुनाफा देता हो, इससे ज्यादा आत्मनिर्भर और क्या हो सकता है। हाईकोर्ट ने कहा कि निजीकरण और सबका साथ सबका विकास में विरोधाभास दिखाई देता है।

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Punjab and Haryana High court expressed grief over hurry in privatization of power department
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बिजली विभाग के निजीकरण मामले में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने दुख जताते हुए कहा कि जब पूरी दुनिया कोरोना महामारी से जूझ रही है, ऑक्सीजन नहीं है, आईसीयू नहीं है, श्मशान में लंबी कतारें हैं और मानव जाति के सामने इतिहास का यह बुरा दौर है। ऐसे दौर में मुनाफे वाले एक संस्थान का निजीकरण करने में इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई जा रही है।

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हाईकोर्ट ने सोमवार को कहा कि यह समझ से बाहर है कि लोगों को बेहतर सुविधाएं देने और मुनाफे के बीच भी आखिर क्यों निजीकरण का निर्णय लिया जा रहा है। हाईकोर्ट ने कहा कि बिजली कर्मी शहर में निर्बाध बिजली उपलब्ध हो इसके, लिए हमेशा तत्पर रहते हैं, उसके लिए वे प्रशंसा के पात्र हैं। 
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हाईकोर्ट ने कहा कि उनकी राय में निजीकरण सभी समस्याओं का रामबाण इलाज नहीं हो सकता है। जब विभाग मुनाफे में है, लोगों को शिकायत नहीं है, संस्थानों को निर्बाध बिजली मिल रही है तो इस दौर में आखिर क्यों इतनी आतुरता दिखाई जा रही है।

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हाईकोर्ट ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने 1963 में जब भाखड़ा नंगल बांध का उद्घाटन किया था तो उन्होंने इसे आधुनिक भारत का मंदिर बताया था। उन्होंने इसे देश की दुनिया पर निर्भरता के अंत के रूप में देखा था।

उन्होंने कहा कि प्रशासन की यह दलील की आत्मनिर्भर भारत के तहत ऐसा किया जा रहा है यह भी ठीक नहीं है। इंजीनियरिंग विंग आखिर क्यों स्थापित की गई और क्या यह अपना काम करने में नाकाम रही। हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसा संस्थान जो भारतीय हो, भारतीयों द्वारा हो, भारतीयों द्वारा संचालित हो, भारतीयों को रोजगार देता हो और भारत को मुनाफा देता हो इससे ज्यादा आत्मनिर्भर और क्या हो सकता है।

हाईकोर्ट ने निजीकरण पर बाबा साहेब अंबेडकर की टिप्पणियां शामिल करते हुए कहा कि संविधान के अनुसार प्रशासन की जिम्मेदारी होती है कि वह ऐसे संस्थानों को बचाए जो रोजगार देते हैं और समाज को सहारा देते हैं ताकि गरीब से गरीब व्यक्ति बेहतर भविष्य का सपना देख सके। निजीकरण और सबका साथ सबका विकास इन दोनों में विरोधाभास दिखाई देता है।

यह है मामला
चंडीगढ़ प्रशासन ने शहर में बिजली विभाग के निजीकरण का फैसला लिया था। इस फैसले को पावर मैन यूनियन ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने फैसले पर रोक लगा दी थी। इसके खिलाफ यूटी प्रशासन सुप्रीम कोर्ट गया और सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट को तीन माह में विवाद का निपटारा करने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट ने दो-तीन सुनवाई के बाद अगस्त की तारीख तय की तो प्रशासन ने निजीकरण की प्रक्रिया में तेजी ला दी। इसके खिलाफ यूनियन ने फिर अर्जी दाखिल की जिस पर हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए इस प्रक्रिया पर अब रोक लगा दी है।

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