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गजब: सीजेएम ने जमानत दे दी, आरोपी को पता ही नहीं चला, एक साल 4 माह जेल में काटे, अब हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
Wed, 14 Jul 2021 02:20 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Wed, 14 Jul 2021 02:20 PM IST
सार
हाईकोर्ट ने कहा कि इस लापरवाही के चलते एक ओर जहां सेशन कोर्ट और हाईकोर्ट का समय बर्बाद हुआ तो वहीं याची को जमानत के बाद भी जेल में अतिरिक्त समय काटना पड़ा।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के सामने अपनी तरह का एक अलग मामला पहुंचा। इस मामले में आरोपी को 13 फरवरी 2020 को सीजेएम कोर्ट ने जमानत दे दी और याची को इसकी जानकारी तक नहीं हुई। इसके बाद याची सेशन जज के पास पहुंचा। वहां उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई। अब मामला हाईकोर्ट पहुंचा तो अदालत ने पंचकूला के सेशन जज और डायरेक्टर प्रोसीक्यूशन से जवाब तलब कर लिया है।
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पंचकूला सेक्टर 5 में दर्ज एक मामले में जमानत के लिए निशांत ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। याचिका पर 14 सितंबर को सुनवाई तय की गई थी। इसी बीच याची के वकील ने अर्जी दाखिल कर बताया कि याची को सीजेएम कोर्ट से 13 फरवरी 2020 को ही जमानत मिल चुकी है और ऐसे में वह मुख्य याचिका पर जल्द सुनवाई और याचिका वापिस लेने की अनुमति चाहते हैं।
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हाईकोर्ट ने इस पर हैरानी जताते हुए जब रिकार्ड देखा तो पाया कि सीजेएम ने उसे जमानत दे दी थी और आदेश में याची के वकील की उपस्थिति भी दर्ज थी। लेकिन इस बारे में याची को जानकारी ही नहीं थी और उसने सेशन जज के पास अपील दाखिल कर दी। हैरानी की बात तो यह रही कि सेशन जज ने भी सीजेएम के आदेश पर ध्यान नहीं दिया और न तो याची के वकील ने और न ही सरकारी वकील ने सेशन जज को इस बारे में अवगत करवाया। सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे में भी इसकी जानकारी नहीं थी जिसके बाद सेशन जज ने जमानत याचिका को खारिज कर दिया।
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अब याची ने नियमित जमानत के लिए हाईकोर्ट से गुहार लगाई थी। हाईकोर्ट ने कहा कि इस लापरवाही के चलते एक ओर जहां सेशन कोर्ट और हाईकोर्ट का समय बर्बाद हुआ तो वहीं याची को जमानत के बाद भी 1 साल 4 माह जेल में काटने पड़े। कोर्ट ने इस मामले में सेशन जज से रिपोर्ट तलब कर ली है। साथ ही हरियाणा के डायरेक्टर प्रोसीक्यूशन से जवाब तलब किया है कि इस सब के लिए कौन जिम्मेदार है।