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पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट में कहा- गलती से हुई थी शवों की अदला बदली, मजिस्ट्रेट जांच शुरू

Thu, 23 Jul 2020 10:44 AM IST
खुशबू गोयल अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Thu, 23 Jul 2020 10:44 AM IST
सार

  • अमृतसर के गुरुनानक देव हॉस्पिटल में हुई थी अदला-बदली
  • कोरोना मरीज के शव के बदले भेज दिया था महिला का शव
  • विस्तृत जवाब दाखिल न करने पर हाईकोर्ट ने लगाई एसीपी को फटकार

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Punjab Admitted Mistake in High Court for Exchange of Dead Bodies
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

विस्तार

अमृतसर के असिस्टेंट पुलिस कमिश्नर (एसीपी) ने पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में स्वीकार किया है कि गुरु नानक देव हॉस्पिटल द्वारा कोरोना पॉजिटिव मरीज प्रीतम सिंह के स्थान पर उसके घर महिला का शव भेज दिया गया था। उन्होंने कोर्ट को बताया कि अब मामले की मजिस्ट्रेट जांच शुरू कर दी गई है।
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बुधवार को असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस अमृतसर नार्थ सरबजीत सिंह ने हाईकोर्ट में जवाब दायर कर स्वीकार किया कि गलती से शव बदल गए थे। एसीपी द्वारा दी गई जानकारी पर हाईकोर्ट ने कहा कि आपसे मामले में विस्तृत जवाब मांगा गया था, जो नहीं दिया गया।
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सिर्फ यह बताया गया कि इस पूरे मामले में जो गलती हुई है उसके लिए कौन जिम्मेदार है, उसकी जांच एसडीएम को सौंप दी गई है।  याचिकाकर्ता के वकील सतिंदरदीप सिंह बोपाराय ने बताया कि अब हाईकोर्ट ने सरकार को दो दिनों के भीतर विस्तृत जानकारी दिए जाने के आदेश दे दिए हैं कि वह बताए प्रीतम सिंह जीवित हैं या मृत।
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17 जुलाई को हुई थी कोरोना संक्रमित की मौत

बता दें कि मुकेरियां निवासी मृतक के बेटों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बताया है कि उनके पिता प्रीतम सिंह एक जुलाई को कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। इसके बाद 2 जुलाई को उन्हें होशियापुर के रयात एंड बाहरा यूनिवर्सिटी में बने कोरोना आईसोलेशन सेंटर में एडमिट करवाया गया था।

5 जुलाई को उन्हें अमृतसर के गुरु नानक देव हॉस्पिटल में शिफ्ट कर दिया गया। 18 जुलाई को उन्हें मैसेज मिला कि उनके पिता की 17 जुलाई रात 11 बजे मृत्यु हो गई है। लेकिन अमृतसर से एंबुलेंस के जरिए जो शव मुकेरियां भेजा गया, वह उनके पिता का नहीं बल्कि किसी महिला का था। इसका खुलासा होने के बाद महिला का शव मुकेरियां की मोर्चरी में शिफ्ट कर दिया गया।

याचिकाकर्ताओं ने कहा, उम्मीद है उनके पिता जीवित
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि उनके पिता जीवित हैं, क्योंकि कोरोना के स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर के तहत शव का संस्कार करने से पहले रिश्तेदारों को मृतक का चेहरा दिखाना अनिवार्य होता है। उन्हें उम्मीद है कि उनके पिता जीवित हैं और अभी हॉस्पिटल में ही हैं। लेकिन उनके बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं दी जा रही है।
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