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पीयू के छात्र बोले, कोर्स पूरा नहीं हुआ, परीक्षा की तिथि आगे बढ़ाएं
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चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय व 200 संबद्ध कॉलेजों के शिक्षकों के चल रहे कार्य बहिष्कार का छात्रों पर बड़ा असर हुआ है। विद्यार्थियों की पढ़ाई चौपट हो गई। कोर्स पूरा नहीं हो पाया और परीक्षाएं 23 दिसंबर से होने जा रही हैं। कुछ विभागों ने परीक्षा न करवाने के लिए नोटिस भी निकाले हैं, क्योंकि शिक्षकों का सहयोग नहीं मिल रहा है। कोर्स पूरा न होने और इस गहमागहमी के बीच छात्रों की धड़कनें बढ़ीं तो उन्होंने पीयू के सामने मांग रखी है कि परीक्षा की तिथि आगे बढ़ाई जाए। कोर्स पूरा होने के बाद ही परीक्षा आयोजित की जाए। इसे लेकर पीयू के पसीने छूट रहे हैं। वह पहले ही साफ कह चुके हैं कि शिक्षकों के बिना परीक्षा कराना संभव नहीं हो पाएगा।
इस तरह प्रभावित हुई पढ़ाई
पीयू ने विषम सेमेस्टर की परीक्षाओं के लिए तिथि 23 दिसंबर तय की है। शुरुआत में परीक्षाएं ऑफलाइन थीं लेकिन छात्रों ने विरोध किया तो परीक्षा ऑनलाइन होंगी। परीक्षा के लिए शिक्षक तेजी से कोर्स पूरा कर रहे थे। छात्र भी अपनी तैयारियों में जुटे थे। इसी बीच शिक्षकों ने सातवें वेतनमान की मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन तेज कर दिया। भूख हड़ताल शुरू कर दी। साथ ही शिक्षण कार्य का बहिष्कार कर दिया। परीक्षाएं भी कराने से इनकार कर दिया। इसके कारण छात्रों की पढ़ाई बाधित हो गई। शिक्षकों ने पंजाब सरकार से लेकर अफसरों तक को साफ संदेश दे दिया है कि बिना मांग पूरी हुए वह किसी कीमत पर चुप नहीं रहेंगे। उनका हक है जो लेंगे।
पीयू हमारी मांगों पर जल्द ध्यान दे
पीयू के छात्र विनोद शर्मा का कहना है कि इस समय शिक्षक हड़ताल पर हैं। विज्ञान संकाय का उनका कोर्स पूरा नहीं हो पाया है। कुछ ही कोर्स पूरे हुए हैं। ऐसे में परीक्षा वह किस स्थिति में देंगे। बिना चैप्टर पढ़ाए विज्ञान में कुछ समय नहीं आता है। ऐसे में परीक्षा की तिथि आगे बढ़ानी चाहिए। इसी संकाय के छात्र सुमित सिंह, राजेश शर्मा आदि का भी कहना है कि कोर्स पूरा करना जरूरी है। पंजाब विश्वविद्यालय छात्रों की मांगों पर विचार करे। कुछ दिन परीक्षा की तिथि आगे बढ़ाई जाए। ऐसा नहीं हुआ तो छात्रों को नुकसान होगा। यदि परीक्षा ली जाए तो उन विषयों में से प्रश्न न पूछे जाएं।
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प्रश्नपत्र सभी विषयों के तैयार नहीं
सूत्रों का कहना है कि शिक्षकों का कार्य बहिष्कार 15 दिनों से चल रहा है। इसी बीच प्रश्नपत्र बनाए जाने हैं। ऐसे में कई विषयों के प्रश्नपत्र अभी तैयार नहीं हुए हैं। शिक्षकों ने साफ कह दिया है कि वह बिना मांग पूरी हुए काम नहीं करेंगे। चाहे शिक्षण कार्य हो या फिर प्रश्नपत्र बनाने का। हालांकि, पीयू ने कई पेपर तैयार करवा लिए हैं। जानकारों का कहना है कि परीक्षा के लिए जो समुचित तैयारियां होनी थीं, वह अब तक नहीं हो सकी हैं। बिना शिक्षकों के काम नहीं चलने वाला। वहीं, डीयूआई प्रो. वीआर सिन्हा का कहना है कि शिक्षक अपनी जिम्मेदारी समझते हैं। उनसे सहयोग की अपेक्षा है।
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इस तरह प्रभावित हुई पढ़ाई
पीयू ने विषम सेमेस्टर की परीक्षाओं के लिए तिथि 23 दिसंबर तय की है। शुरुआत में परीक्षाएं ऑफलाइन थीं लेकिन छात्रों ने विरोध किया तो परीक्षा ऑनलाइन होंगी। परीक्षा के लिए शिक्षक तेजी से कोर्स पूरा कर रहे थे। छात्र भी अपनी तैयारियों में जुटे थे। इसी बीच शिक्षकों ने सातवें वेतनमान की मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन तेज कर दिया। भूख हड़ताल शुरू कर दी। साथ ही शिक्षण कार्य का बहिष्कार कर दिया। परीक्षाएं भी कराने से इनकार कर दिया। इसके कारण छात्रों की पढ़ाई बाधित हो गई। शिक्षकों ने पंजाब सरकार से लेकर अफसरों तक को साफ संदेश दे दिया है कि बिना मांग पूरी हुए वह किसी कीमत पर चुप नहीं रहेंगे। उनका हक है जो लेंगे।
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पीयू हमारी मांगों पर जल्द ध्यान दे
पीयू के छात्र विनोद शर्मा का कहना है कि इस समय शिक्षक हड़ताल पर हैं। विज्ञान संकाय का उनका कोर्स पूरा नहीं हो पाया है। कुछ ही कोर्स पूरे हुए हैं। ऐसे में परीक्षा वह किस स्थिति में देंगे। बिना चैप्टर पढ़ाए विज्ञान में कुछ समय नहीं आता है। ऐसे में परीक्षा की तिथि आगे बढ़ानी चाहिए। इसी संकाय के छात्र सुमित सिंह, राजेश शर्मा आदि का भी कहना है कि कोर्स पूरा करना जरूरी है। पंजाब विश्वविद्यालय छात्रों की मांगों पर विचार करे। कुछ दिन परीक्षा की तिथि आगे बढ़ाई जाए। ऐसा नहीं हुआ तो छात्रों को नुकसान होगा। यदि परीक्षा ली जाए तो उन विषयों में से प्रश्न न पूछे जाएं।
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प्रश्नपत्र सभी विषयों के तैयार नहीं
सूत्रों का कहना है कि शिक्षकों का कार्य बहिष्कार 15 दिनों से चल रहा है। इसी बीच प्रश्नपत्र बनाए जाने हैं। ऐसे में कई विषयों के प्रश्नपत्र अभी तैयार नहीं हुए हैं। शिक्षकों ने साफ कह दिया है कि वह बिना मांग पूरी हुए काम नहीं करेंगे। चाहे शिक्षण कार्य हो या फिर प्रश्नपत्र बनाने का। हालांकि, पीयू ने कई पेपर तैयार करवा लिए हैं। जानकारों का कहना है कि परीक्षा के लिए जो समुचित तैयारियां होनी थीं, वह अब तक नहीं हो सकी हैं। बिना शिक्षकों के काम नहीं चलने वाला। वहीं, डीयूआई प्रो. वीआर सिन्हा का कहना है कि शिक्षक अपनी जिम्मेदारी समझते हैं। उनसे सहयोग की अपेक्षा है।