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पीयू के औषधि विज्ञान विभाग पर धनवर्षा, पूर्व छात्रों ने दिए एक करोड़ रुपये

Sat, 04 Dec 2021 02:15 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Sat, 04 Dec 2021 02:15 AM IST
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PU former students gave one crore rupees to Department of Pharmaceutical Sciences
चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी के औषधि विज्ञान विभाग पर धनवर्षा हो रही है। विभाग की पहल पर पूर्व छात्र मदद को आगे बढ़े हैं। अब दो पूर्व छात्रों ने मिलकर इस विभाग को एक करोड़ रुपये दान किए गए हैं। इससे विभाग गदगद है, क्योंकि रकम से उपकरण, प्रयोगशालाओं का काम पूरा हो सकेगा। अब विभाग को जरूरत है शिक्षकों व तकनीकी कर्मियों की। विभाग का दावा है कि यह आवश्यकता उनकी पूरी हो जाए तो वह देश में फार्मास्युटिकल रैंक में पहले स्थान पर आ सकते हैं।
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पीयू के औषधि विज्ञान विभाग ने प्रेसवार्ता की। विभागाध्यक्ष प्रो. इंदुपाल कौर ने बताया कि उन्होंने कुछ समय पहले पूर्व छात्रों से संपर्क साधा था। साथ ही विभाग के लिए फंड की आवश्यकता बताई थी। कई पूर्व छात्रों ने विभाग की मदद की है। हाल ही में अमेरिका की कंपनी नेवाकार में कार्यरत डॉ. नवनीत पुरी ने विभाग को पांच हजार डॉलर की मदद की। उनके अलावा अब पूर्व छात्र
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वियाट्रिस यूएसए कंपनी के अध्यक्ष राजीव मलिक व माइलन कंपनी में मुख्य परिचालन अधिकारी संजीव के सेठी ने मिलकर एक करोड़ रुपये दान किए हैं।
उन्होंने बताया कि पूर्व छात्रों ने वर्ष 1982 में एमफार्मा की विभाग से पढ़ाई की है। इस रकम से फार्मास्युटिकल विभाग अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं का निर्माण करेगा। साथ ही आधुनिक उपकरण खरीदे जाएंगे। इस रकम से इस विभाग को आगे बढ़ने में मदद मिलेगी। प्रो. कौर ने बताया कि विभाग के नाम कई उपलब्धियां हैं। कोरोना काल में यहां के वैज्ञानिकों ने बेहतर शोध किए हैं। कई पेटेंट भी नाम किए हैं। इस विभाग की मान्यता दूर-दूर तक है। यहां विद्यार्थियों के दाखिले के बाद शत प्रतिशत प्लेसमेंट मिलती है। इस दौरान प्रो. भूपिंदर सिंह भूप, प्रो. अनिल कुमार आदि मौजूद रहे।
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इनसेट---
विभाग निरफ रैंकिंग में पाया है बेहतर स्थान
यूएसए की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी दो साल से वैज्ञानिकों की विश्व रैंकिंग जारी कर रही है। इस रैंकिंग में पंजाब यूनिवर्सिटी के औषधि विज्ञान विभाग के 10 से अधिक वैज्ञानिकों के नाम हैं। यह वैज्ञानिक फार्मा क्षेत्र के दो फीसदी वैज्ञानिकों में अपना स्थान रखते हैं। यहां के वैज्ञानिकों के शोध की पहचान अधिक है। उनका प्रभाव भी अधिक है। विभाग ने निरफ रैंकिंग में बेहतर स्थान पाया है, लेकिन वह पहले स्थान पर आने की तमन्ना रखता है। अब पैसों की आवश्यकता है। साथ ही संसाधनों की। विभाग के लोगों का कहना है कि पीयू उन्हें मदद करे। वह पीयू को और आगे ले जाने का काम करेंगे।
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