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पटरी पर आने लगी जिंदगी, PRTC ने 600 बसें रूटों पर भेजीं
ब्यूरो/अमर उजाला, पटियाला(पंजाब)
Updated Sun, 27 Aug 2017 08:29 PM IST
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PRTC
- फोटो : File Photo
पेप्सू रोड ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन (पीआरटीसी) ने डेरा प्रकरण में रविवार को हालात में सुधार के मद्देनजर अपने बेड़े की 1050 बसों में से 600 बसें विभिन्न रूटों पर चला दीं। इससे लोगों की परेशानी कम हुई। पीआरटीसी के एमडी मनजीत सिंह नारंग ने इसकी पुष्टि की।
नारंग ने बताया कि रविवार सुबह सारे हालात का जायजा लिया गया। इसके बाद फैसला लिया गया कि जिन रूटों पर बसों को कोई खतरा नहीं है, उन पर साधारण बसें भेज दी जाएं। उन्होंने बताया कि दिल्ली, जम्मू, हिमाचल प्रदेश, हरिद्वार, यूपी और हरियाणा के लिए बसें चला दी गई हैं। अभी फिलहाल साधारण बसें ही रूटों पर भेजी गई हैं। सोमवार को स्थिति का दोबारा जायजा लेकर अगला फैसला लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि 50 रूटों पर करीब 600 बसों को चला दिया गया है। साथ ही सारे डिपुओं के जनरल मैनेजरों को आदेश दिए गए हैं कि अपने-अपने जिले के डीसी के साथ संपर्क बनाए रखें व लगातार रूटों पर बसें चलाते जाएं। हर समय चौकन्ने रहने के आदेश भी दिए गए हैं।
पीआरटीसी ने फैसला लिया है कि सोमवार को डेरा प्रमुख को सजा सुनाए जाने के बाद जब हालात पूरी तरह से स्थिर हो जाएंगे, तो मंगलवार से ही एसी बसों को चलाया जाएगा।
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नारंग ने बताया कि रविवार सुबह सारे हालात का जायजा लिया गया। इसके बाद फैसला लिया गया कि जिन रूटों पर बसों को कोई खतरा नहीं है, उन पर साधारण बसें भेज दी जाएं। उन्होंने बताया कि दिल्ली, जम्मू, हिमाचल प्रदेश, हरिद्वार, यूपी और हरियाणा के लिए बसें चला दी गई हैं। अभी फिलहाल साधारण बसें ही रूटों पर भेजी गई हैं। सोमवार को स्थिति का दोबारा जायजा लेकर अगला फैसला लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि 50 रूटों पर करीब 600 बसों को चला दिया गया है। साथ ही सारे डिपुओं के जनरल मैनेजरों को आदेश दिए गए हैं कि अपने-अपने जिले के डीसी के साथ संपर्क बनाए रखें व लगातार रूटों पर बसें चलाते जाएं। हर समय चौकन्ने रहने के आदेश भी दिए गए हैं।
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पीआरटीसी ने फैसला लिया है कि सोमवार को डेरा प्रमुख को सजा सुनाए जाने के बाद जब हालात पूरी तरह से स्थिर हो जाएंगे, तो मंगलवार से ही एसी बसों को चलाया जाएगा।
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पटियाला के व्यापारियों का 100 करोड़ का नुकसान
डेरा मामले में भड़की हिंसा के मद्देनजर पटियाला में शुक्रवार बाद दोपहर से पहले डर के कारण और फिर शनिवार को कर्फ्यू के कारण बाजार बंद रहे। इससे पटियाला में व्यापारियों और आम दुकानदारों का 100 करोड़ से ज्यादा का नुकसान हुआ है। दुकानदारों और व्यापारियों ने इस नुकसान की भरपाई के लिए सरकार को टैक्स से छूट देने की मांग की है।
पटियाला व्यापार बचाओ संघर्ष कमेटी के प्रधान राकेश गुप्ता और व्यापारी कुंदन गोगिया ने कहा कि डेरा मामले में बाजार बंद रहने के कारण दुकानदारों व व्यापारियों को पटियाला में 100 करोड़ से ज्यादा का नुकसान झेलना पड़ा है। कोई भी व्यापारी या दुकानदार अपने नुकसान का क्लेम सरकार के पास तो नहीं कर सकता, लेकिन सरकार को चाहिए कि व्यापारियों व दुकानदारों को राहत देने के लिए टैक्स में छूट देने का प्रबंध करे। उन्होंने कहा कि अगर पेप्सू रोड ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन (पीआरटीसी) समेत अन्य सरकारी और अर्द्धसरकारी विभाग अपने नुकसान की भरपाई के लिए सरकार के पास क्लेम कर रहे हैं, तो आम लोगों के नुकसान की भरपाई भी एक क्लेम के तौर पर की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि तकरीबन हर दुकानदार या व्यापारी ने काम के लिए मुलाजिम रखे होते हैं, जिन्हें छुट्टियों की तनख्वाह भी देनी होती है। दुकानदारों और व्यापारियों की ओर से लिए लोन पर ब्याज भी पड़ता है। दूसरी तरफ बाजार बंद रहने कारण उनको आमदनी नहीं हो पाई। सरकार का टैक्स भी व्यापारियों पर पड़ता रहता है। उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा नुकसान सब्जी, फल, दूध, दही या अन्य डेयरी प्रोडक्ट बेचने वाले दुकानदारों को हुआ है। उनकी चीजें खराब हो गईं। उन्होंने कहा कि पहले नोटबंदी से व्यापारियों का नुकसान हुआ, इसके बाद जीएसटी ने परेशान किया और अब रही सही कसर इस डेरा मामले में बाजार बंद होने से निकल गई है।
पटियाला व्यापार बचाओ संघर्ष कमेटी के प्रधान राकेश गुप्ता और व्यापारी कुंदन गोगिया ने कहा कि डेरा मामले में बाजार बंद रहने के कारण दुकानदारों व व्यापारियों को पटियाला में 100 करोड़ से ज्यादा का नुकसान झेलना पड़ा है। कोई भी व्यापारी या दुकानदार अपने नुकसान का क्लेम सरकार के पास तो नहीं कर सकता, लेकिन सरकार को चाहिए कि व्यापारियों व दुकानदारों को राहत देने के लिए टैक्स में छूट देने का प्रबंध करे। उन्होंने कहा कि अगर पेप्सू रोड ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन (पीआरटीसी) समेत अन्य सरकारी और अर्द्धसरकारी विभाग अपने नुकसान की भरपाई के लिए सरकार के पास क्लेम कर रहे हैं, तो आम लोगों के नुकसान की भरपाई भी एक क्लेम के तौर पर की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि तकरीबन हर दुकानदार या व्यापारी ने काम के लिए मुलाजिम रखे होते हैं, जिन्हें छुट्टियों की तनख्वाह भी देनी होती है। दुकानदारों और व्यापारियों की ओर से लिए लोन पर ब्याज भी पड़ता है। दूसरी तरफ बाजार बंद रहने कारण उनको आमदनी नहीं हो पाई। सरकार का टैक्स भी व्यापारियों पर पड़ता रहता है। उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा नुकसान सब्जी, फल, दूध, दही या अन्य डेयरी प्रोडक्ट बेचने वाले दुकानदारों को हुआ है। उनकी चीजें खराब हो गईं। उन्होंने कहा कि पहले नोटबंदी से व्यापारियों का नुकसान हुआ, इसके बाद जीएसटी ने परेशान किया और अब रही सही कसर इस डेरा मामले में बाजार बंद होने से निकल गई है।