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Chandigarh: सेवाओं के लिए लिए जा रहे सुविधा शुल्क का चौतरफा विरोध, फैसले पर पुनर्विचार करेगा प्रशासन
Thu, 22 Dec 2022 10:35 AM IST
निवेदिता वर्मा
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Thu, 22 Dec 2022 10:35 AM IST
सार
संपर्क केंद्रों को लगातार हो रहे घाटे से बचाने के लिए सुविधा शुल्क लगाने का जब फैसला हुआ तो सोसाइटी फॉर प्रमोशन ऑफ आईटी इन चंडीगढ़ (स्पिक) की एग्जीक्यूटिव कमेटी में दो प्रस्तावों पर चर्चा हुई।
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चंडीगढ़ प्रशासन
- फोटो : file photo
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विस्तार
एक जनवरी 2023 से संपर्क केंद्रों पर किसी भी काम को कराने के लिए लोगों को 20 से 25 रुपये खर्च करने होंगे। प्रशासन ने इसे सुविधा शुल्क का नाम दिया है। बिजली-पानी का बिल जमा कराने पर भी यह वसूला जाएगा। इसका शहर में चौतरफा विरोध हो रहा है। लोग इससे खासे खफा हैं। कई राजनीतिक पार्टियों ने इस फैसले के खिलाफ प्रदर्शन करने की चेतावनी दे डाली है। प्रशासन अब इस फैसले पर पुनर्विचार करेगा।
लोगों के गुस्से को देखते हुए आईटी विभाग कुछ सेवाओं को पहले की तरफ फ्री करने और कुछ पर शुल्क लगाने पर विचार कर रहा है। इसमें वह सेवाएं होंगी, जिसका सबसे ज्यादा लाभ गरीब आदमी उठाता है। बिजली-पानी का बिल जमा करने पर लगने वाले शुल्क को भी मुफ्त या कम किया जा सकता है। व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़ी सेवाओं पर शुल्क को जारी रखा जा सकता है।
यूटी प्रशासन के गृह व आईटी विभाग के सचिव नितिन यादव ने बताया कि लोगों की मांग को देखते हुए ही फैसले पर एक बार फिर चर्चा व विचार किया जाएगा। इस मुद्दे को एक बार प्रशासक बनवारीलाल पुरोहित के समझ रखा जाएगा ताकि संपर्क केंद्रों के भविष्य को देखते हुए कोई उचित फैसला लिया जा सके। गृह सचिव ने बताया कि 20-25 रुपये का शुल्क लेने के बाद संपर्क केंद्र लाभ में नहीं जा रहा है बल्कि इससे सिर्फ घाटा पूरा होगा। उन्होंने कहा कि स्पिक के पास अलग से कोई बजट नहीं है। सरकार भी आधार जैसी कुछ ही सेवाओं के लिए पैसा देती है।
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विभागों ने पैसा देने से मना किया, इसलिए लोगों पर डाला बोझ
संपर्क केंद्रों को लगातार हो रहे घाटे से बचाने के लिए सुविधा शुल्क लगाने का जब फैसला हुआ तो सोसाइटी फॉर प्रमोशन ऑफ आईटी इन चंडीगढ़ (स्पिक) की एग्जीक्यूटिव कमेटी में दो प्रस्तावों पर चर्चा हुई। शुल्क लोग चुकाएं या विभाग। बिजली बिल के लिए बिजली विभाग और पानी के बिल के लिए नगर निगम और इसी तरह संबंधित बिल के लिए संबंधित विभाग से प्रति ट्रांजेक्शन एक शुल्क लेने पर विचार हुआ, लेकिन इस बारे जब विभागों से पूछा गया तो उन्होंने साफ मना कर दिया। इसलिए यह बोझ लोगों पर डाला गया है।
संपर्क केंद्रों पर सबसे ज्यादा जमा होता है बिजली और पानी का बिल
शहर में छोटे-बड़े मिलाकर कुल 45 संपर्क केंद्र हैं। यहां सबसे ज्यादा बिजली और पानी की बिल भरा जाता है। लोगों की तरफ से विरोध भी इसी को लेकर है कि इन दोनों बिलों को जमा करने पर शुल्क नहीं लिया जाना चाहिए। दूसरी तरफ विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अगर इन दोनों पर शुल्क नहीं लिया गया तो बड़े राजस्व का नुकसान होगा। नितिन यादव ने बताया कि शुल्क लगाने का फैसले लेने से पहले उन्होंने हरियाणा और पंजाब का रेट भी देखा। हरियाणा करीब 100 रुपये और पंजाब 230 रुपये के करीब सुविधा शुल्क लेता है। उसके अनुसार चंडीगढ़ का शुल्क काफी कम है।
सुविधा शुल्क लगाने की जरूरत क्यों पड़ी?
सचिव नितिन यादव ने कहा कि शहर में संपर्क केंद्रों की संख्या को बढ़ाने की मांग हो रही है। सभी पार्षद चाहते हैं कि उनके वार्ड में ज्यादा से ज्यादा संपर्क केंद्र हों। केंद्रों को चलाने का खर्च बढ़ गया है। अनुबंध कर्मचारियों का डीसी रेट बढ़ा है और जो नियमित कर्मी हैं, उनका पे स्केल बढ़ा है। सर्वर आदि का खर्च भी काफी बढ़ गया है। शहर में आईटी का कोई खास बजट भी नहीं है। सेवाओं को बेहतर बनाने, अन्य केंद्र खोलने, नई सेवाओं को लांच करने, सॉफ्टवेयर-सर्वर आदि को अपग्रेड करने के लिए पैसों की जरूरत है इसलिए ये शुल्क लगाए गए हैं।
एक जनवरी 2023 से तय किया शुल्क
कार्य शुल्क
बिजली बिल 25 रुपये
पानी का बिल 25 रुपये
किराया जमा कराना 25 रुपये
ट्यूबवेल बुकिंग 25 रुपये
वैट-सीएसटी रिटर्न भरना 25 रुपये
टैक्स भरना 25 रुपये
सर्वेंट वेरिफिकेशन 25 रुपये
बर्थ सर्टिफिकेट 25 रुपये
डेथ सर्टिफिकेट 25 रुपये
एससी सर्टिफिकेट 20 रुपये
ओबीसी सर्टिफिकेट 20 रुपये
संपर्क केंद्रों की संख्या
संपर्क केंद्र 18
मिनी संपर्क केंद्र 24
एस्टेंशन संपर्क केंद्र 3
संपर्क केंद्रों का खर्च कई गुना बढ़ गया है। नए संपर्क केंद्र भी खोलने की मांग की जा रही है। घाटे को कम करने के लिए ही ये शुल्क लगाए गए हैं। हालांकि लोगों की मांग को देखते हुए फैसले पर पुनर्विचार किया जाएगा। हम इस मुद्दे को प्रशासक के समझ रखेंगे और उन्हें स्थिति के बारे में बताएंगे। - नितिन यादव, सचिव, गृह व आईटी विभाग, यूटी प्रशासन
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लोगों के गुस्से को देखते हुए आईटी विभाग कुछ सेवाओं को पहले की तरफ फ्री करने और कुछ पर शुल्क लगाने पर विचार कर रहा है। इसमें वह सेवाएं होंगी, जिसका सबसे ज्यादा लाभ गरीब आदमी उठाता है। बिजली-पानी का बिल जमा करने पर लगने वाले शुल्क को भी मुफ्त या कम किया जा सकता है। व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़ी सेवाओं पर शुल्क को जारी रखा जा सकता है।
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यूटी प्रशासन के गृह व आईटी विभाग के सचिव नितिन यादव ने बताया कि लोगों की मांग को देखते हुए ही फैसले पर एक बार फिर चर्चा व विचार किया जाएगा। इस मुद्दे को एक बार प्रशासक बनवारीलाल पुरोहित के समझ रखा जाएगा ताकि संपर्क केंद्रों के भविष्य को देखते हुए कोई उचित फैसला लिया जा सके। गृह सचिव ने बताया कि 20-25 रुपये का शुल्क लेने के बाद संपर्क केंद्र लाभ में नहीं जा रहा है बल्कि इससे सिर्फ घाटा पूरा होगा। उन्होंने कहा कि स्पिक के पास अलग से कोई बजट नहीं है। सरकार भी आधार जैसी कुछ ही सेवाओं के लिए पैसा देती है।
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विभागों ने पैसा देने से मना किया, इसलिए लोगों पर डाला बोझ
संपर्क केंद्रों को लगातार हो रहे घाटे से बचाने के लिए सुविधा शुल्क लगाने का जब फैसला हुआ तो सोसाइटी फॉर प्रमोशन ऑफ आईटी इन चंडीगढ़ (स्पिक) की एग्जीक्यूटिव कमेटी में दो प्रस्तावों पर चर्चा हुई। शुल्क लोग चुकाएं या विभाग। बिजली बिल के लिए बिजली विभाग और पानी के बिल के लिए नगर निगम और इसी तरह संबंधित बिल के लिए संबंधित विभाग से प्रति ट्रांजेक्शन एक शुल्क लेने पर विचार हुआ, लेकिन इस बारे जब विभागों से पूछा गया तो उन्होंने साफ मना कर दिया। इसलिए यह बोझ लोगों पर डाला गया है।
संपर्क केंद्रों पर सबसे ज्यादा जमा होता है बिजली और पानी का बिल
शहर में छोटे-बड़े मिलाकर कुल 45 संपर्क केंद्र हैं। यहां सबसे ज्यादा बिजली और पानी की बिल भरा जाता है। लोगों की तरफ से विरोध भी इसी को लेकर है कि इन दोनों बिलों को जमा करने पर शुल्क नहीं लिया जाना चाहिए। दूसरी तरफ विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अगर इन दोनों पर शुल्क नहीं लिया गया तो बड़े राजस्व का नुकसान होगा। नितिन यादव ने बताया कि शुल्क लगाने का फैसले लेने से पहले उन्होंने हरियाणा और पंजाब का रेट भी देखा। हरियाणा करीब 100 रुपये और पंजाब 230 रुपये के करीब सुविधा शुल्क लेता है। उसके अनुसार चंडीगढ़ का शुल्क काफी कम है।
सुविधा शुल्क लगाने की जरूरत क्यों पड़ी?
सचिव नितिन यादव ने कहा कि शहर में संपर्क केंद्रों की संख्या को बढ़ाने की मांग हो रही है। सभी पार्षद चाहते हैं कि उनके वार्ड में ज्यादा से ज्यादा संपर्क केंद्र हों। केंद्रों को चलाने का खर्च बढ़ गया है। अनुबंध कर्मचारियों का डीसी रेट बढ़ा है और जो नियमित कर्मी हैं, उनका पे स्केल बढ़ा है। सर्वर आदि का खर्च भी काफी बढ़ गया है। शहर में आईटी का कोई खास बजट भी नहीं है। सेवाओं को बेहतर बनाने, अन्य केंद्र खोलने, नई सेवाओं को लांच करने, सॉफ्टवेयर-सर्वर आदि को अपग्रेड करने के लिए पैसों की जरूरत है इसलिए ये शुल्क लगाए गए हैं।
एक जनवरी 2023 से तय किया शुल्क
कार्य शुल्क
बिजली बिल 25 रुपये
पानी का बिल 25 रुपये
किराया जमा कराना 25 रुपये
ट्यूबवेल बुकिंग 25 रुपये
वैट-सीएसटी रिटर्न भरना 25 रुपये
टैक्स भरना 25 रुपये
सर्वेंट वेरिफिकेशन 25 रुपये
बर्थ सर्टिफिकेट 25 रुपये
डेथ सर्टिफिकेट 25 रुपये
एससी सर्टिफिकेट 20 रुपये
ओबीसी सर्टिफिकेट 20 रुपये
संपर्क केंद्रों की संख्या
संपर्क केंद्र 18
मिनी संपर्क केंद्र 24
एस्टेंशन संपर्क केंद्र 3
संपर्क केंद्रों का खर्च कई गुना बढ़ गया है। नए संपर्क केंद्र भी खोलने की मांग की जा रही है। घाटे को कम करने के लिए ही ये शुल्क लगाए गए हैं। हालांकि लोगों की मांग को देखते हुए फैसले पर पुनर्विचार किया जाएगा। हम इस मुद्दे को प्रशासक के समझ रखेंगे और उन्हें स्थिति के बारे में बताएंगे। - नितिन यादव, सचिव, गृह व आईटी विभाग, यूटी प्रशासन