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फौजियों के सम्मान पर प्रॉपर्टी टैक्स की चोट!
अमर उजाला, पंचकूला
Updated Wed, 06 Nov 2013 01:14 AM IST
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सैन्य अफसरों और पूर्व सैनिकों पर भी टैक्स की मार पड़ी है। इनके लिए प्रॉपर्टी टैक्स में छूट के लिए 300 वर्ग गज की सीमा तय की गई है।
अब इंडियन एक्स सर्विसमैन मूवमेंट के अलावा पंचकूला में रहने वाले करीब 1100 सैन्य अधिकारी व पूर्व सैन्य अधिकारियों ने इसमें संशोधन के लिए प्रदेश के आला अधिकारियों और सरकार तक मसला पहुंचाने की तैयारी कर ली है।
उनकी दलील है कि फौजी अधिकारियों और पूर्व सैनिकों को पहले से दी जा रही रियायत में अचानक बदलाव क्यों किए गए हैं।
नगर निगम की ओर से प्रॉपर्टी टैक्स चार्ज किए जाने के बाद सैकड़ों पूर्व सैन्य अधिकारी टैक्स के दायरे में आ गए हैं। सेक्टर-दो और सेक्टर-12 में सैकड़ों की संख्या में अधिकारी रहते हैं।
पार्षद लीली बावा का कहना है कि जल्द ही इस मामले को प्रदेश सरकार के संबंधित अधिकारियों के समक्ष रखा जाएगा। सैन्य अधिकारियों या पूर्व सैनिकों के लिए इस तरह के मानक तय किए जाने से न केवल परेशानियां बढ़ी है, बल्कि उनके सम्मान को भी ठेस पहुंचा है।
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ज्ञापन सौंपा, फिर भी अनसुनी
इंडियन एक्स सर्विसमैन मूवमेंट के कन्वीनर ब्रिगेडियर किरण कृष्ण ने कहा कि प्रॉपर्टी टैक्स को लेकर जब सरकार नीतियां तैयार कर रही थी, उसी वक्त पूर्व सैन्य अधिकारियों की संस्था की ओर से अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा गया था।
पहले भी फौजी अधिकारियों या पूर्व सैनिकों से मकानों पर ईस्ट पंजाब रेंट कंट्रोल एक्ट के तहत टैक्स का प्रावधान नहीं था। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पूर्व सैनिकों या शहीद हो चुके सैन्य अधिकारियों और उनकी विधवाओं के लिए सरकार की ओर पेंशन में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई, फिर उन्हें टैक्स के दायरे में क्यों लाया गया। ब्रिगेडियर के. कृष्ण ने कहा कि इस मामले को आगे भी उठाया जाएगा।
प्रदेश सरकार तक पहुंचाएंगे मामला
मूवमेंट से जुड़े ब्रिगेडियर ओएस गोराया ने कहा कि शहीदों या पूर्व सैनिकों को अलग कोटे के तहत जमीन अलॉट की गई थी। इसे 300 वर्ग गज के दायरे में सीमित किया जाना गलत है।
इस मामले को पूर्व सैनिक और अधिकारी प्रदेश सरकार के समक्ष रखेंगे, ताकि उचित संसोधन हो सके।
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अब इंडियन एक्स सर्विसमैन मूवमेंट के अलावा पंचकूला में रहने वाले करीब 1100 सैन्य अधिकारी व पूर्व सैन्य अधिकारियों ने इसमें संशोधन के लिए प्रदेश के आला अधिकारियों और सरकार तक मसला पहुंचाने की तैयारी कर ली है।
उनकी दलील है कि फौजी अधिकारियों और पूर्व सैनिकों को पहले से दी जा रही रियायत में अचानक बदलाव क्यों किए गए हैं।
नगर निगम की ओर से प्रॉपर्टी टैक्स चार्ज किए जाने के बाद सैकड़ों पूर्व सैन्य अधिकारी टैक्स के दायरे में आ गए हैं। सेक्टर-दो और सेक्टर-12 में सैकड़ों की संख्या में अधिकारी रहते हैं।
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पार्षद लीली बावा का कहना है कि जल्द ही इस मामले को प्रदेश सरकार के संबंधित अधिकारियों के समक्ष रखा जाएगा। सैन्य अधिकारियों या पूर्व सैनिकों के लिए इस तरह के मानक तय किए जाने से न केवल परेशानियां बढ़ी है, बल्कि उनके सम्मान को भी ठेस पहुंचा है।
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ज्ञापन सौंपा, फिर भी अनसुनी
इंडियन एक्स सर्विसमैन मूवमेंट के कन्वीनर ब्रिगेडियर किरण कृष्ण ने कहा कि प्रॉपर्टी टैक्स को लेकर जब सरकार नीतियां तैयार कर रही थी, उसी वक्त पूर्व सैन्य अधिकारियों की संस्था की ओर से अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा गया था।
पहले भी फौजी अधिकारियों या पूर्व सैनिकों से मकानों पर ईस्ट पंजाब रेंट कंट्रोल एक्ट के तहत टैक्स का प्रावधान नहीं था। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पूर्व सैनिकों या शहीद हो चुके सैन्य अधिकारियों और उनकी विधवाओं के लिए सरकार की ओर पेंशन में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई, फिर उन्हें टैक्स के दायरे में क्यों लाया गया। ब्रिगेडियर के. कृष्ण ने कहा कि इस मामले को आगे भी उठाया जाएगा।
प्रदेश सरकार तक पहुंचाएंगे मामला
मूवमेंट से जुड़े ब्रिगेडियर ओएस गोराया ने कहा कि शहीदों या पूर्व सैनिकों को अलग कोटे के तहत जमीन अलॉट की गई थी। इसे 300 वर्ग गज के दायरे में सीमित किया जाना गलत है।
इस मामले को पूर्व सैनिक और अधिकारी प्रदेश सरकार के समक्ष रखेंगे, ताकि उचित संसोधन हो सके।