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बड़ा फैसलाः चंडीगढ़ के पांच गांवों पर लगाया गया प्रॉपर्टी टैक्स, खत्म हुई 13 गांवों में पंचायत

Tue, 30 Oct 2018 09:58 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 30 Oct 2018 09:58 AM IST
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Property Tax on Five Villages of Chandigarh
प्रॉपर्टी टैक्स
यूटी प्रशासन का बड़ा फैसला, 5 गांवों पर प्रॉपर्टी टैक्स लगा दिया गया है, वहीं 13 गांवों में पंचायत खत्म कर दी गई है। इसकी अंतिम अधिसूचना जारी कर दी गई है। गांव पलसौरा, हल्लोमाजरा, मलोया, कजेहड़ी और डड्डूमाजरा की कामर्शियल इमारतों पर प्रॉपर्टी टैक्स लग गया है। खास बात यह है कि प्रॉपर्टीटैक्स 25 अक्तूबर 2017 से लागू माना जाएगा। गृह सचिव की मंजूरी के बाद अधिसूचना नगर निगम कमिश्नर के पास पहुंच गई है। अब नगर निगम इसी सप्ताह एक पब्लिक नोटिस जारी करने जा रहा है, जिसके तहत सेल्फ असेसमेंट स्कीम के तहत लोगों को टैक्स जमा करवाने के लिए समय दिया जाएगा।
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इसके तहत निवासियों को 10 प्रतिशत की छूट भी दी जाएगी। मालूम हो कि प्रशासन नगर निगम को कई बार इन गांवों पर टैक्स लगाने के निर्देश दे चुका था, लेकिन जब नगर निगम नहीं माना तो प्रशासन को खुद ही इन गांवों में टैक्स लगाने का फैसला लेना पड़ा। ये वे गांव हैं जो साल 2006 में प्रशासन से नगर निगम में शामिल हुए थे लेकिन अभी तक नगर निगम की ओर से इन गांवों की कामर्शियल इमारतों और दुकानों में प्रॉपर्टी टैक्स नहीं लगाया था। पुराने सर्वे के अनुसार यहां पर 4200 कामर्शियल दुकानें और इमारतें है, जिनसे प्रॉपर्टी टैक्स वसूल किया जाएगा।
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नगर निगम के अनुसार नए सिरे से भी इन गांवों का सर्वे करवाया जाएगा क्योंकि साल 2006 से लेकर अब तक कई दुकानें यहां पर बढ़ी भी हैं। शहर में प्रॉपर्टी टैक्स साल 2003 से लागू है लेकिन यह गांव साल 2006 में नगर निगम में शामिल हुए इसलिए इन पर प्रॉपर्टी टैक्स लगाने का निर्णय निगम के पार्षद वोट बैंक की राजनीति के कारण नहीं ले पा रहे थे। कांग्रेस अध्यक्ष प्रदीप छाबड़ा का कहना है कि जब तक उनकी पार्टी नगर निगम में सत्ता में रही। इन 5 गांवों में प्रॉपर्टी टैक्स नहीं लगने दिया। लेकिन अब भाजपा के नेताओं ने प्रशासन से मिलकर इन गांवों पर प्रॉपर्टी टैक्स लगा दिया, जबकि पहले से शहरवासियों पर कई तरह के टैक्स लगाए गए हैं।
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नगर निगम में आने वाले नए गांवों पर भी लगेगा टैक्स

Property Tax on Five Villages of Chandigarh
chandigarh village palsaura
इस समय प्रशासन के अंतगर्त 13 गांव हैं, जिन्हें नगर निगम में शिफ्ट करने के लिए प्रशासन ने अधिसूचना जारी की है। ऐसे में यहां से अब पंचायतें समाप्त हो जाएगी और साल 2021 में यहां पर भी नगर निगम के चुनाव ही होंगे। ऐसे में नगर निगम में इन गांवों के शामिल होने से यहां पर भी प्रॉपर्टीटैक्स लागू किया जाएगा जबकि इस समय अभी यहां पर प्रॉपर्टीटैक्स लागू नहीं हैं।

यह गांव नगर निगम में होने हैं शामिल
गांव किशनगढ़, मौलीजागरां, दड़वा, रायपुरकलां, मक्खन माजरा, बहलाना, रायपुर खुर्द, धनास, सारंगपुर, खुड्डा अलीशेर, कैंबवाला, खुड्डा लहौरा और खुड्डा जस्सू ऐसे गांव हैं जो कि इस समय प्रशासन के अंतर्गत हैं, जिन्हें नगर निगम में शामिल होने की अधिसूचना जारी हुई है। इनके शामिल होने से नगर निगम के वार्डों की संख्या भी 26 से बढ़कर 33 करने की योजना है।

पार्षदों ने निगम को पहुंचाया 3.60 करोड़ का नुकसान

Property Tax on Five Villages of Chandigarh
चंडीगढ़ का गांव मलोया
पार्षदों और सदन की वजह से नगर निगम को 3 करोड़ 60 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। इस नुकसान पर ऑडिट विभाग ने आपत्ति जताई है। इसे लेकर सलाहकार परिमल राय ने नगर निगम अधिकारियों की मंगलवार को बैठक बुलाई है। ऑडिट विभाग ने नगर निगम से जवाब-तलब किया है। ऑडिट विभाग की 2018-19 की रिपोर्ट में कहा गया है कि पलसौरा, हल्लोमाजरा, मलोया, कजेहड़ी और डड्डूमाजरा में 2006 में प्रॉपर्टीटैक्स लग जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा न होने से अब तक नगर निगम को तीन करोड़ 60 लाख रुपये का नुकसान हुआ है।

सलाहकार की ओर से बुलाई बैठक में नगर निगम के अधिकारियों को इस पर जवाब देने के लिए कहा गया है। उधर, अधिकारी नगर निगम के पार्षदों को जिम्मेदार ठहराने पर लगे हैं। अधिकारियों की रिपोर्ट के अनुसार वे इन गांवों में टैक्स लगाने के लिए कई बार एजेंडा सदन में लेकर आए, लेकिन पार्षदों ने बहुमत से टैक्स लगाने का प्रस्ताव खारिज कर दिया। ऑडिट विभाग ने अपनी आपत्ति में कहा है कि प्रॉपर्टीटैक्स निगम की आय का बड़ा स्त्रोत होता है। नगर निगम ने पांच गांवों से टैक्स नहीं लिया, लेकिन स्ट्रीट लाइट, सेनिटेशन, रोड, सीवरेज और पानी जैसी सुविधाएं उपलब्ध करवाईं।

ऑडिट विभाग के अनुसार इन पांच गांवों पर एक साल का 30 से 35 लाख का प्रॉपर्टीटैक्स बनता है। 2006 से लेकर अब तक नगर निगम ने टैक्स न वसूल कर 3 करोड़ 60 लाख का नुकसान किया है। ऑडिट विभाग ने नगर निगम से टैक्स न लेने का कारण पूछा है। इसके साथ ही गांवों की प्रॉपर्टी की ताजा सर्वे रिपोर्ट भी मांगी है। वहीं, अगर सर्वे नहीं हुआ है तो पूछा गया है कि क्यों नहीं हुआ। ऑडिट विभाग ने टैक्स वसूलने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं, इस बारे में भी जवाब मांगा है।
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